नई दिल्ली/प्रयागराज। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के पूर्ण परिचालन से देश में माल ढुलाई का ढांचा तेजी से बदल रहा है। यात्री ट्रेनों के लिए इस्तेमाल होने वाली रेल लाइनों से मालगाड़ियों को अलग किए जाने के कारण कोयला, स्टील, खाद, अनाज, सीमेंट, कंटेनर और अन्य सामान की आवाजाही अधिक तेज और भरोसेमंद हुई है। 2,843 किलोमीटर लंबे इस उच्च क्षमता वाले रेल नेटवर्क का हिस्सा भारतीय रेल के कुल नेटवर्क में करीब चार प्रतिशत है, लेकिन यह कुल रेल माल ढुलाई का 14 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभाल रहा है। उत्तर प्रदेश इस बदलाव का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां पूर्वी और पश्चिमी दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की कनेक्टिविटी औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति दे रही है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) की ओर से विकसित नेटवर्क में 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) और 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) शामिल है। दोनों कॉरिडोर का उद्देश्य मालगाड़ियों के लिए अलग और उच्च क्षमता वाला रेल मार्ग उपलब्ध कराना है, ताकि यात्री रेल सेवाओं और माल परिवहन के बीच होने वाली क्षमता की प्रतिस्पर्धा कम हो तथा सामान को निर्धारित गंतव्य तक कम समय में पहुंचाया जा सके।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर मुख्य रूप से भारी और थोक माल की ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण है। इस मार्ग से कोयला, लोहा एवं इस्पात, उर्वरक, खाद्यान्न और कृषि उत्पाद, पेट्रोलियम-तेल-लुब्रिकेंट्स (पीओएल), सीमेंट, क्लिंकर तथा ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुओं का परिवहन किया जा रहा है। इससे उत्पादन केंद्रों, कृषि क्षेत्रों और औद्योगिक इकाइयों तक आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति को गति मिल रही है। दूसरी ओर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर उच्च मूल्य और विविध प्रकार के माल के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके जरिए एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, टाइल्स और अन्य मूल्यवान सामान वाले कंटेनरों की आवाजाही हो रही है। इसके अलावा कोयला, लोहा-इस्पात, उर्वरक, खाद्यान्न, पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल, सीमेंट और क्लिंकर भी इस मार्ग से भेजे जा रहे हैं।
डीएफसी पर केवल पारंपरिक माल परिवहन ही नहीं, बल्कि विशेष लॉजिस्टिक्स सेवाओं का भी विस्तार हुआ है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर ‘ट्रक ऑन ट्रेन’ (टीओटी) सेवा के जरिए दूध परिवहन शुरू किया गया है। समय-संवेदनशील ई-कॉमर्स और पार्सल यातायात के लिए ‘संयुक्त पार्सल उत्पाद-रैपिड कार्गो सेवा’ (जेपीपी-आरसीएस) भी संचालित की जा रही है। इससे ऐसे सामान को रेल के जरिए तेजी से पहुंचाने का विकल्प मिला है, जिनके लिए समय पर डिलीवरी कारोबारी दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश डीएफसी नेटवर्क का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का 1,078 किलोमीटर हिस्सा आता है, जो किसी भी राज्य में इस कॉरिडोर का सबसे लंबा हिस्सा है। इसके अतिरिक्त वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का 19 किलोमीटर हिस्सा भी उत्तर प्रदेश में है। इससे प्रदेश को देश के पूर्वी और पश्चिमी माल परिवहन नेटवर्क के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का लाभ मिल रहा है।
ग्रेटर नोएडा का दादरी इस नेटवर्क में रणनीतिक महत्व रखता है। यहां का कनेक्शन उत्तरी भारत के बड़े उपभोग और औद्योगिक केंद्रों को पश्चिमी समुद्री बंदरगाहों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) तक कंटेनर यातायात के लिए यह संपर्क महत्वपूर्ण है। इसके चलते उत्तर भारत से समुद्री बंदरगाहों तक सामान पहुंचाने में लगने वाला समय कम हुआ है और कारोबारियों के लिए लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी बनी है।
ईस्टर्न डीएफसी उत्तर प्रदेश के कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों के साथ कृषि क्षेत्रों को भी जोड़ता है। कोयला, स्टील और उर्वरक जैसे कच्चे माल की आपूर्ति तेज होने से उद्योगों को फायदा मिल रहा है, जबकि तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हुई है। प्रदेश में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘इन्वेस्ट यूपी’ और डीएफसीसीआईएल के सहयोग से न्यू भाऊपुर, न्यू दाउदखान, न्यू गुलाओठी, न्यू मिर्जापुर और न्यू दादरी जैसे रणनीतिक स्थानों पर गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य रेल नेटवर्क को उद्योगों और बाजारों से बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देना है।
उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के लिए भी डीएफसी कनेक्टिविटी से माल परिवहन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से आईसीडीजी और आईसीडीडी से कंटेनर लोडिंग बढ़ी है, जिसके परिणामस्वरूप कमाई में आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पीबीसीपी टर्मिनल से भी लोडिंग में तेजी आई है। चालू वित्त वर्ष में यहां 251 रेक लोड किए जा चुके हैं, जो लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि है।
न्यू दादरी से जेपीपी-आरसीएस सेवा के तहत प्रतिदिन लगभग 10 वीपी की लोडिंग हो रही है। इससे उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल को रोजाना करीब 10 लाख रुपये की आय हो रही है। समयबद्ध पार्सल परिवहन से रेलवे के लिए अतिरिक्त राजस्व के साथ ई-कॉमर्स और अन्य समय-संवेदनशील कारोबारों को भी तेज माल परिवहन का विकल्प मिला है।
डीएफसी संचालन का एक बड़ा असर बिजली उत्पादन संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति पर पड़ा है। मंडल के सभी पावर प्लांट तक कोयला पहुंचाने की प्रक्रिया तेज, आसान और अधिक भरोसेमंद हुई है। इससे बिजली संयंत्रों को ईंधन की नियमित आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली है। इसी तरह मंडल से अनाज की लोडिंग बढ़ने के कारण चालू वित्त वर्ष में इस क्षेत्र से होने वाली कमाई में करीब 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
गुड्स शेड और साइडिंग तक बुक किए गए सामान की समय पर डिलीवरी से ग्राहक सेवा में सुधार हुआ है। माल की आवाजाही में लगने वाला समय कम होने के साथ परिचालन क्षमता भी बढ़ी है। बंदरगाहों, खासकर जेएनपीटी तक कंटेनर पहुंचने में कम समय लगने से कारोबारियों की लॉजिस्टिक्स लागत और समय प्रबंधन बेहतर हुआ है। कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद और अन्य भारी वस्तुओं के लिए डीएफसी कनेक्टिविटी ने परिवहन को अधिक तेज और भरोसेमंद बनाया है।
इस व्यवस्था का असर मौजूदा रेलवे नेटवर्क पर भी पड़ा है। मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर उपलब्ध होने से पारंपरिक रेल मार्गों पर माल यातायात का दबाव कम हुआ है। इससे यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए उपलब्ध क्षमता बढ़ी और समयपालन तथा परिचालन दक्षता में सुधार की संभावना मजबूत हुई है। प्रयागराज मंडल में माल ढुलाई बढ़ने से रेलवे की आय का आधार भी मजबूत हुआ है, जिसका क्षेत्रीय औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी डीएफसी का परिचालन बड़े पैमाने पर हो चुका है। अगस्त 2026 तक इस नेटवर्क पर 5.21 लाख से अधिक मालगाड़ी यात्राएं पूरी की जा चुकी हैं। इस दौरान औसतन करीब 435 मालगाड़ियां प्रतिदिन चलाई जा रही हैं। नेटवर्क ने 658 बिलियन ग्रॉस टन किलोमीटर (जीटीकेएम) और 360 बिलियन नेट टन किलोमीटर (एनटीकेएम) का परिवहन प्रदर्शन दर्ज किया है। इससे माल परिवहन की क्षमता और उत्पादकता में लगातार वृद्धि का संकेत मिलता है।
डीएफसी से परिवहन लागत और सप्लाई चेन की दक्षता सुधारने में भी मदद मिल रही है। विशेष रूप से वेस्टर्न डीएफसी पर डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों और भारी मालवहन क्षमता के कारण प्रति टन परिवहन लागत कम करने में सहायता मिली है। सामान की आवाजाही अधिक समयबद्ध होने से राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 10 प्रतिशत से नीचे लाने के वैश्विक लक्ष्य की दिशा में भी मदद मिल रही है।
भारी माल को सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करने का पर्यावरणीय और सड़क परिवहन पर भी असर है। राजमार्गों पर ट्रकों का दबाव कम होने से भीड़भाड़, दुर्घटनाओं और सड़क रखरखाव से जुड़ी लागत घटाने में मदद मिल सकती है। वहीं मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक होने से यात्री रेल मार्गों पर क्षमता का बेहतर इस्तेमाल संभव हुआ है।
डीएफसी का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका विद्युतीकृत परिचालन है। पूरी तरह विद्युतीकृत रेल परिवहन से डीजल की खपत में बड़ी कमी आती है। अनुमान के अनुसार डीएफसी के परिचालन से अगले 30 वर्षों में करीब 477 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम किया जा सकता है। इससे परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन को घटाने और वायु गुणवत्ता सुधारने में योगदान मिलेगा।
रेल क्षमता को गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, लॉजिस्टिक्स पार्क और डिजिटल माल परिवहन सेवाओं से जोड़ने की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। इससे उत्पादन केंद्र, गोदाम, औद्योगिक क्षेत्र, बाजार और बंदरगाह एक अधिक संगठित सप्लाई चेन से जुड़ रहे हैं। डीएफसी के विस्तार और इन सुविधाओं के एकीकरण से भारत में माल परिवहन की गति, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े औद्योगिक और उपभोग बाजार वाले राज्य को इसका सीधा लाभ मिल रहा है, जबकि देश के लिए यह व्यवस्था अधिक सक्षम, टिकाऊ और कम समय वाली लॉजिस्टिक्स प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रही है।
