आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख और कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर पर साइबर सिक्योरिटी और एआई फॉर ऑल नाम से दो नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। साइबर सिक्योरिटी पाठ्यक्रम द्वितीय सेमेस्टर और एआई फॉर ऑल तृतीय सेमेस्टर में लागू होगा। आईआईटी कानपुर के सहयोग से तैयार साइबर सिक्योरिटी पाठ्यक्रम में एथिकल हैकिंग, साइबर अपराध, नेटवर्क एवं डेटा सुरक्षा, साइबर कानून, डिजिटल गोपनीयता और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि एआई फॉर ऑल के माध्यम से विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उसके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराया जाएगा। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर सूचना प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, उद्योग, सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

बदलते तकनीकी दौर में विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर पर साइबर सिक्योरिटी और एआई फॉर ऑल नाम से दो नए व्यावसायिक (वोकेशनल) पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।

इन नए पाठ्यक्रमों की रूपरेखा शुक्रवार को सेठ पदमचंद जैन इंस्टीट्यूट सभागार में आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों और प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत की गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आशु रानी ने की। इस दौरान महाविद्यालयों को पाठ्यक्रम की संरचना, संचालन और विद्यार्थियों को मिलने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी गई।
विश्वविद्यालय के अनुसार साइबर सिक्योरिटी पाठ्यक्रम को स्नातक के द्वितीय सेमेस्टर में लागू किया जाएगा, जबकि एआई फॉर ऑल पाठ्यक्रम तृतीय सेमेस्टर से पढ़ाया जाएगा। दोनों पाठ्यक्रमों को रोजगारोन्मुख और कौशल आधारित शिक्षा की अवधारणा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।
बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि आज का समय पूरी तरह डिजिटल तकनीक पर आधारित है। ऐसे में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े प्रशिक्षित युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि विद्यार्थियों को समय रहते आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाए तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर करियर बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है।
विश्वविद्यालय ने साइबर सिक्योरिटी पाठ्यक्रम को आईआईटी कानपुर के सहयोग से तैयार किया है। इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों से लेकर साइबर खतरों की पहचान, नेटवर्क सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, एथिकल हैकिंग की आधारभूत जानकारी, साइबर अपराध, साइबर कानून, डिजिटल गोपनीयता और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को केवल कक्षा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि प्रयोगात्मक प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और परियोजना आधारित शिक्षण के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव भी दिया जाएगा।
दूसरी ओर, एआई फॉर ऑल पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की बुनियादी अवधारणाओं और उसके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराया जाएगा। उन्हें यह समझाया जाएगा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, उद्योग, कृषि, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में एआई किस प्रकार तेजी से बदलाव ला रहा है। साथ ही विद्यार्थियों को ऐसे कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिनकी आने वाले वर्षों में उद्योगों और संस्थानों में सबसे अधिक आवश्यकता होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन दोनों पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नवाचार, उद्यमिता और समस्या-समाधान की क्षमता भी विकसित होगी। इससे सूचना प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, उद्योग, सरकारी विभागों और निजी संस्थानों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही जो विद्यार्थी स्वयं का स्टार्टअप या तकनीकी उद्यम शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह पाठ्यक्रम उपयोगी साबित होंगे।
बैठक में सी3आईहब, आईआईटी कानपुर के प्रोग्राम मैनेजर श्रवण शर्मा, इनोवेशन ऑफिसर शैलेंद्र कुमार यादव और साइबर सिक्योरिटी इंस्ट्रक्टर अमन राज ने भी पाठ्यक्रमों के उद्देश्य, उनकी उपयोगिता और भविष्य में मिलने वाले अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता दोनों ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें आने वाले वर्षों में रोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ेंगी। इसलिए विद्यार्थियों को अभी से इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना समय की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि साइबर सुरक्षा केवल कंप्यूटर की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बैंकिंग, ई-कॉमर्स, सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन डेटा और व्यक्तिगत गोपनीयता की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज लगभग हर क्षेत्र में निर्णय प्रक्रिया, स्वचालन और नवाचार का महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है।
बैठक में विश्वविद्यालय कंप्यूटर सेंटर (यूसीसी) सेल प्रभारी प्रो. अनिल कुमार गुप्ता, संस्थान निदेशक प्रो. बृजेश रावत, परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश सहित विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने इन नए पाठ्यक्रमों का स्वागत करते हुए इसे विद्यार्थियों के भविष्य और रोजगार क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
विश्वविद्यालय का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें कौशल आधारित, रोजगारोन्मुख और तकनीक-सक्षम शिक्षा उपलब्ध कराना है। साइबर सिक्योरिटी और एआई फॉर ऑल जैसे पाठ्यक्रम इसी सोच को आगे बढ़ाते हैं। आने वाले समय में जब तकनीक आधारित रोजगार तेजी से बढ़ेंगे, तब इन पाठ्यक्रमों से प्रशिक्षित विद्यार्थी न केवल नौकरी के बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे, बल्कि देश के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
