आगरा। आगरा में दो अलग-अलग स्थानों पर विशाल भारतीय अजगर और कॉमन सैंड बोआ सांप मिलने से लोगों में हड़कंप मच गया। मिधाकुर गांव के ज्वार (चरी) के खेत से करीब 12 फीट लंबे भारतीय अजगर और किरावली वन क्षेत्र स्थित एक मंदिर परिसर से कॉमन सैंड बोआ का वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग की संयुक्त टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू किया। दोनों सांप पूरी तरह स्वस्थ पाए गए और उनकी स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सांप दिखाई देने पर उन्हें पकड़ने या नुकसान पहुंचाने की बजाय तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

आगरा में वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग की संयुक्त टीम ने दो अलग-अलग स्थानों से दो सांपों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। इनमें मिधाकुर गांव के खेत में मिला लगभग 12 फीट लंबा भारतीय अजगर (Python molurus) और किरावली वन क्षेत्र स्थित एक मंदिर परिसर में दिखाई दिया कॉमन सैंड बोआ (Eryx conicus) शामिल है। दोनों रेस्क्यू बिना किसी नुकसान के पूरे किए गए और यह अभियान वन्यजीव संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता का उदाहरण भी बना।
ज्वार के घने खेत में छिपा था 12 फीट लंबा अजगर
पहली घटना मिधाकुर गांव की है, जहां ज्वार (चरी) के घने खेत में एक विशाल भारतीय अजगर दिखाई दिया। खेत में 10 से 12 फीट ऊंची खड़ी फसल होने के कारण अजगर आसानी से उसमें छिपा हुआ था। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना उत्तर प्रदेश वन विभाग को दी।

सूचना मिलते ही वन विभाग ने वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट को मौके पर बुलाया। टीम ने पूरी सावधानी के साथ खेत के भीतर पहुंचकर अजगर की लोकेशन का पता लगाया। घनी फसल के बीच रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन विशेषज्ञों ने बिना किसी अनावश्यक तनाव के अजगर को सुरक्षित पकड़ लिया।
रेस्क्यू के बाद अजगर की स्वास्थ्य स्थिति की जांच की गई। वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, जिसके बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
मंदिर परिसर में दिखा कॉमन सैंड बोआ
दूसरी घटना आगरा के किरावली वन क्षेत्र की है। यहां एक मंदिर परिसर में लोगों को कॉमन सैंड बोआ दिखाई दिया। सांप को देखकर स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी।
वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षित तरीके से सैंड बोआ का रेस्क्यू किया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे भी उपयुक्त वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार कॉमन सैंड बोआ विषहीन होता है और सामान्यतः जमीन के भीतर बिल बनाकर रहता है। यह मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं माना जाता, लेकिन अंधविश्वासों और अवैध वन्यजीव व्यापार के कारण इसकी तस्करी बड़े पैमाने पर की जाती है।
भारतीय अजगर को मिला है सर्वोच्च कानूनी संरक्षण
भारतीय अजगर (Python molurus) को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में Near Threatened (निकट संकटग्रस्त) श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत इसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
वहीं कॉमन सैंड बोआ (Eryx conicus) भारत के सबसे अधिक अवैध रूप से तस्करी किए जाने वाले सांपों में शामिल है। अंधविश्वासों और अवैध पालतू वन्यजीव व्यापार की मांग के कारण इस प्रजाति को लगातार खतरे का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों रेस्क्यू अभियानों से यह स्पष्ट होता है कि देशज सांपों के संरक्षण के लिए समय पर सूचना और लोगों की जागरूकता बेहद जरूरी है।
खेती और वन्यजीव एक-दूसरे से जुड़े हैं : कार्तिक सत्यनारायण
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि भारतीय अजगर अपने आसपास के वातावरण में आसानी से छिप जाता है। यही कारण है कि घने खेतों में उसका रेस्क्यू करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।
उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का भी उदाहरण है कि खेती वाले क्षेत्र और वन्यजीव एक-दूसरे से कितने करीब जुड़े हुए हैं। उन्होंने दोनों रेस्क्यू अभियानों में त्वरित सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग का आभार भी व्यक्त किया।
खुद सांप पकड़ने की कोशिश न करें : गीता शेषमणि
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि चाहे खेत हो या मंदिर परिसर, वन्यजीव अक्सर इंसानी बस्तियों के आसपास पहुंच जाते हैं। ऐसे में लोगों को घबराने या खुद सांप पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी सांप दिखाई दे तो तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें, ताकि वन्यजीव और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सैंड बोआ की तस्करी चिंता का विषय
वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण परियोजनाओं के निदेशक बैजूराज एम.वी. ने कहा कि कॉमन सैंड बोआ भारत में सबसे अधिक अवैध रूप से तस्करी किए जाने वाले सांपों में से एक है।
उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक संकेत है कि अब लोग सांप दिखाई देने पर उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय संबंधित अधिकारियों को सूचना दे रहे हैं। इससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता का पता चलता है।
आपातकालीन हेल्पलाइन भी जारी
वाइल्डलाइफ एसओएस आगरा-मथुरा क्षेत्र में वन्यजीवों के रेस्क्यू के लिए अपनी आपातकालीन हेल्पलाइन +91 9917109666 का लगातार संचालन कर रहा है। संस्था ने लोगों से आग्रह किया है कि यदि किसी भी स्थान पर कोई वन्यजीव दिखाई दे तो उसे पकड़ने, भगाने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत प्रशिक्षित विशेषज्ञों या वन विभाग को सूचना दें। समय पर दी गई सूचना न केवल वन्यजीवों की जान बचा सकती है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है।
