फतेहाबाद। फतेहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली और अभद्र व्यवहार के आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार ने स्टाफ नर्स पर सुविधा शुल्क मांगने, रुपये पूरे न मिलने पर दवाइयां और डिस्चार्ज पर्चा रोकने तथा परिजनों के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाया है। शिकायत उपजिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद जांच शुरू हो गई है, जबकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है।
आगरा के फतेहाबाद स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के नाम पर कथित अवैध वसूली और अभद्रता का मामला सामने आया है। प्रसूता के परिजनों ने अस्पताल की एक स्टाफ नर्स पर डिलीवरी कराने के बदले सुविधा शुल्क मांगने, पूरी रकम नहीं मिलने पर दवाइयां और डिस्चार्ज पर्चा रोकने तथा विरोध करने पर परिजनों के साथ धक्का-मुक्की करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत मिलने के बाद उपजिलाधिकारी (एसडीएम) फतेहाबाद ने जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) आगरा ने भी मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है।
शिकायत के अनुसार तहसील फतेहाबाद क्षेत्र के ग्राम बरीपुरा निवासी हरीशंकर पुत्र इमित्तालाल ने उपजिलाधिकारी स्वाति शर्मा को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि 18 जुलाई 2026 को उनकी गर्भवती पत्नी अंजली को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहाबाद में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि प्रसव कराने के नाम पर अस्पताल की स्टाफ नर्स ने उनसे 2,000 रुपये की मांग की।
पीड़ित का कहना है कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने किसी तरह 1,800 रुपये की व्यवस्था कर नर्स को दे दिए, लेकिन 200 रुपये कम होने पर स्टाफ नर्स ने नाराजगी जताई। आरोप है कि शेष राशि नहीं मिलने पर मरीज को मिलने वाली दवाइयां और डिस्चार्ज पर्चा देने से इनकार कर दिया गया। इससे परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब परिवार ने इस व्यवहार का विरोध किया तो पीड़ित की वृद्ध मां के साथ अभद्रता की गई और उनका हाथ पकड़कर अस्पताल परिसर से बाहर निकाल दिया गया। परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इस तरह का व्यवहार न केवल अमानवीय है, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों के अधिकारों का भी उल्लंघन है।
मामला यहीं नहीं रुका। पीड़ित ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपने गांव की आशा कार्यकर्ता रेखा देवी को प्रसूता का डिस्चार्ज पर्चा लेने अस्पताल भेजा, तब उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया और धक्का-मुक्की की गई। इस घटना के बाद परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत पत्र में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़ित के अनुसार गुरुवार को मामले को दबाने और आशा कार्यकर्ता के खिलाफ माहौल बनाने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े कुछ लोगों ने उनके पिता को शराब पिलाकर और प्रलोभन देकर एक कथित फर्जी वीडियो तैयार कराया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस वीडियो का उद्देश्य मामले की वास्तविकता को प्रभावित करना और शिकायत को कमजोर करना था। हालांकि, इस आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी भी जांच की जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी फतेहाबाद स्वाति शर्मा ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए नायब तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) आगरा डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच के लिए विभागीय टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत होता है, इसलिए तथ्यों की विस्तृत जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों से सुविधा शुल्क मांगने और इलाज के बदले धनराशि लेने के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार ऐसी शिकायतों पर सख्ती बरतने की बात करता है, लेकिन इसके बावजूद इस तरह के मामले सामने आने से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं।
फिलहाल इस मामले में जांच शुरू हो चुकी है। अब सभी की नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। वहीं यदि जांच में आरोप निराधार पाए जाते हैं तो जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन दोनों ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।

