आगरा। पालीवाल पार्क में आयोजित वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम में सिर्फ पौधे लगाने तक बात सीमित नहीं रही, बल्कि आगरा के हरित भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। टीटीज़ेड क्षेत्र में मात्र तीन प्रतिशत वनावरण बढ़ाने के लिए निजी भूमि पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने, सार्वजनिक स्थलों के प्रत्येक वृक्ष पर QR कोड लगाने, विलायती बबूल हटाकर देशी प्रजातियों को बढ़ावा देने तथा वृक्षारोपण अभियान में पारदर्शिता लाने पर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम में अधिकारियों, पर्यावरणविदों और नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि हरित अभियान तभी सफल होगा, जब पौधे लगाने के साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज उठाए

पालीवाल पार्क में हुआ हरित संकल्प
पालीवाल पार्क में मंगलवार सुबह 8 बजे से 9:30 बजे तक वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी (सामाजिक वानिकी) राजेश कुमार तथा सरकारी उद्यान अधीक्षक रजनीश पाण्डेय मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने, सार्वजनिक उद्यानों के संरक्षण तथा शहर में वृक्षों की संख्या बढ़ाने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कदम्ब के पौधे से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों और प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने संयुक्त रूप से कदम्ब का पौधा लगाकर किया। इसके बाद सभी ने प्रातः भ्रमणकर्ताओं के सहयोग से विकसित ‘कदम्ब खण्डी’ का अवलोकन किया। इस स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय कदम्ब तथा राधारानी के प्रिय तमाल के 300 से अधिक पौधे विकसित किए गए हैं। इसे जनसहभागिता से तैयार किया गया एक प्रेरणादायी मॉडल बताया गया। प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य प्रभावी ढंग से पूरे किए जा सकते हैं।
टीटीज़ेड में सिर्फ तीन प्रतिशत वनावरण
बैठक के दौरान ताज ट्रेपेजियम ज़ोन (टीटीज़ेड) में वर्तमान वनावरण लगभग तीन प्रतिशत होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद कम है और केवल सरकारी भूमि पर वृक्षारोपण करके अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते। जब तक निजी भूमि स्वामियों को बड़े स्तर पर वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा, तब तक वनावरण में उल्लेखनीय वृद्धि संभव नहीं होगी।
इस दौरान सुझाव दिया गया कि वन विभाग और टीटीज़ेड प्राधिकरण सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष वर्तमान व्यवस्थाओं और आदेशों की समीक्षा के लिए आवश्यक प्रार्थना करें, ताकि निजी भूमि पर वृक्षारोपण को अधिक प्रोत्साहन मिल सके। इस सुझाव पर प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।
पारदर्शिता से बढ़ेगा भरोसा
पर्यावरण प्रेमी एवं अधिवक्ता के. सी. जैन ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। लगाए गए पौधों के संरक्षण, उनकी जीवित रहने की स्थिति और नियमित निगरानी की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के एक वर्ग में सरकारी वृक्षारोपण अभियानों को लेकर विश्वास की कमी दिखाई देती है। यदि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा और पर्यावरण से जुड़े विवाद तथा अनावश्यक शंकाएं भी कम होंगी।
हर वृक्ष पर लगे QR कोड
के. सी. जैन ने सार्वजनिक उद्यानों और प्रमुख सड़कों पर लगे प्रत्येक वृक्ष पर स्थानीय नाम, वानस्पतिक नाम और QR कोड सहित आकर्षक नामपट्ट लगाने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि QR कोड स्कैन करते ही संबंधित वृक्ष की प्रजाति, आयु, औषधीय उपयोग, पर्यावरणीय महत्व, पुष्प और फल आने का समय तथा अन्य वैज्ञानिक जानकारी लोगों को मिल सकेगी। इससे विशेष रूप से नई पीढ़ी प्रकृति के अधिक करीब आएगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
विलायती बबूल हटाने पर जोर
बैठक में विलायती बबूल (Prosopis juliflora) जैसी आक्रामक विदेशी प्रजाति पर भी गंभीर चर्चा हुई। बताया गया कि यह पालीवाल पार्क के अलावा शाहजहाँ गार्डन, सर्किट हाउस परिसर, यमुना किनारा मार्ग के पार्कों तथा संजय प्लेस स्थित संजय पार्क सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर फैल चुकी है।
बैठक में यह भी बताया गया कि टीटीज़ेड प्राधिकरण पहले ही निर्णय ले चुका है कि ऐसी विदेशी एवं आक्रामक प्रजातियों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनके स्थान पर देशी और पर्यावरण के अनुकूल वृक्ष लगाए जाएंगे। इस संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार और उद्यान अधीक्षक रजनीश पाण्डेय ने प्राधिकरण के निर्णय के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
जनभागीदारी ही सबसे बड़ी ताकत
कार्यक्रम में मौजूद सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक नागरिक की भागीदारी के बिना हरित अभियान सफल नहीं हो सकता। वक्ताओं ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक माना जाएगा, जब लगाए गए पौधों का वर्षों तक संरक्षण और संवर्धन भी सुनिश्चित किया जाए।
पर्यावरण प्रेमियों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में किशोर जैन, डॉ. संजीव गोयल, प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ. मुकुल पंड्या, डॉ. मानसी राय, डॉ. अनिल अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्रातः भ्रमणकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने शहर को अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
