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Agra News : वृक्षारोपण से आगे की सोच, हर पेड़ पर QR कोड और देशी प्रजातियों को बढ़ावा

Divisional Forest Officer Rajesh Kumar, Government Garden Superintendent Rajneesh Pandey, environmentalists and morning walkers planting a Kadamba sapling during an environmental awareness and tree plantation program at Paliwal Park in Agra.
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पालीवाल पार्क में मंगलवार सुबह 8 बजे से 9:30 बजे तक वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी (सामाजिक वानिकी) राजेश कुमार तथा सरकारी उद्यान अधीक्षक रजनीश पाण्डेय मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने, सार्वजनिक उद्यानों के संरक्षण तथा शहर में वृक्षों की संख्या बढ़ाने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों और प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने संयुक्त रूप से कदम्ब का पौधा लगाकर किया। इसके बाद सभी ने प्रातः भ्रमणकर्ताओं के सहयोग से विकसित ‘कदम्ब खण्डी’ का अवलोकन किया। इस स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय कदम्ब तथा राधारानी के प्रिय तमाल के 300 से अधिक पौधे विकसित किए गए हैं। इसे जनसहभागिता से तैयार किया गया एक प्रेरणादायी मॉडल बताया गया। प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य प्रभावी ढंग से पूरे किए जा सकते हैं।

बैठक के दौरान ताज ट्रेपेजियम ज़ोन (टीटीज़ेड) में वर्तमान वनावरण लगभग तीन प्रतिशत होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद कम है और केवल सरकारी भूमि पर वृक्षारोपण करके अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते। जब तक निजी भूमि स्वामियों को बड़े स्तर पर वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा, तब तक वनावरण में उल्लेखनीय वृद्धि संभव नहीं होगी।

इस दौरान सुझाव दिया गया कि वन विभाग और टीटीज़ेड प्राधिकरण सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष वर्तमान व्यवस्थाओं और आदेशों की समीक्षा के लिए आवश्यक प्रार्थना करें, ताकि निजी भूमि पर वृक्षारोपण को अधिक प्रोत्साहन मिल सके। इस सुझाव पर प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

पर्यावरण प्रेमी एवं अधिवक्ता के. सी. जैन ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। लगाए गए पौधों के संरक्षण, उनकी जीवित रहने की स्थिति और नियमित निगरानी की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के एक वर्ग में सरकारी वृक्षारोपण अभियानों को लेकर विश्वास की कमी दिखाई देती है। यदि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा और पर्यावरण से जुड़े विवाद तथा अनावश्यक शंकाएं भी कम होंगी।

के. सी. जैन ने सार्वजनिक उद्यानों और प्रमुख सड़कों पर लगे प्रत्येक वृक्ष पर स्थानीय नाम, वानस्पतिक नाम और QR कोड सहित आकर्षक नामपट्ट लगाने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि QR कोड स्कैन करते ही संबंधित वृक्ष की प्रजाति, आयु, औषधीय उपयोग, पर्यावरणीय महत्व, पुष्प और फल आने का समय तथा अन्य वैज्ञानिक जानकारी लोगों को मिल सकेगी। इससे विशेष रूप से नई पीढ़ी प्रकृति के अधिक करीब आएगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

बैठक में विलायती बबूल (Prosopis juliflora) जैसी आक्रामक विदेशी प्रजाति पर भी गंभीर चर्चा हुई। बताया गया कि यह पालीवाल पार्क के अलावा शाहजहाँ गार्डन, सर्किट हाउस परिसर, यमुना किनारा मार्ग के पार्कों तथा संजय प्लेस स्थित संजय पार्क सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर फैल चुकी है।

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