आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को उद्योगों की बदलती जरूरतों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नई तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘Hackathon with Dora’ कार्यशाला आयोजित की गई। विश्वविद्यालय कंप्यूटर सेंटर द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को हैकाथॉन की अवधारणा, समस्या-समाधान आधारित सोच, AI टूल्स के प्रभावी उपयोग और उद्योगोन्मुखी उत्पाद विकसित करने की प्रक्रिया से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने छात्रों को नवाचार, तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक कौशल विकसित करने का संदेश दिया।

बदलती तकनीक और तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में युवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लगातार नए कदम उठा रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय कंप्यूटर सेंटर ने अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए ‘Hackathon with Dora’ विषय पर एक प्रेरणादायक कार्यशाला का आयोजन किया। 24 जुलाई 2026 को आयोजित यह कार्यशाला अगस्त माह में होने वाले मुख्य हैकाथॉन से पहले एक आइस-ब्रेकिंग सेशन के रूप में आयोजित की गई, ताकि विद्यार्थी हैकाथॉन की कार्यप्रणाली, उद्योगों की वर्तमान जरूरतों और नवाचार आधारित कार्य संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकें।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक अनुभव, तकनीकी दक्षता और समस्या-समाधान आधारित सोच से जोड़ना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में कंपनियां केवल डिग्री नहीं, बल्कि ऐसे युवाओं की तलाश करती हैं जो नई समस्याओं का समाधान खोज सकें और उपयोगी तकनीकी उत्पाद विकसित करने की क्षमता रखते हों।

कार्यशाला में हेला लैब्स के शिवन गर्ग और इन्फोएज के नैतिक ने विद्यार्थियों को हैकाथॉन की अवधारणा और उसके महत्व से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि हैकाथॉन केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीमित समय में किसी वास्तविक समस्या का प्रभावी समाधान तैयार करने का मंच है। इसमें टीमवर्क, नवाचार, तकनीकी समझ और व्यावहारिक सोच का समन्वय आवश्यक होता है।

विशेषज्ञों ने उद्योग जगत की वर्तमान आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि आज कंपनियां ऐसे उत्पादों और समाधानों को प्राथमिकता देती हैं, जो वास्तविक समस्याओं का समाधान करें और उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी साबित हों। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि किसी भी सफल तकनीकी उत्पाद के विकास में समस्या की सही पहचान, बेहतर योजना, उपयोगकर्ता की जरूरतों की समझ और नवीन तकनीकों का प्रभावी उपयोग कितना महत्वपूर्ण होता है।
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी रहा। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को एआई के बढ़ते प्रभाव, विभिन्न एआई टूल्स और उनके प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में लगभग हर क्षेत्र में एआई की भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए जरूरी है कि वे नई तकनीकों को अपनाएं और उनका रचनात्मक उपयोग करना सीखें।
कार्यक्रम में छात्रों को समस्या-समाधान आधारित सोच विकसित करने, नवाचार को अपनाने और उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप अपने तकनीकी एवं व्यावहारिक कौशल को मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि जो विद्यार्थी नई तकनीकों को सीखने और प्रयोग करने के लिए तैयार रहेंगे, उनके लिए रोजगार और स्टार्टअप दोनों क्षेत्रों में बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कंप्यूटर सेंटर के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक अनुभव और कौशल विकास भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं को लगातार अपडेट रखें, तकनीकी दक्षता बढ़ाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक एवं प्रभावी उपयोग कर अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार और उद्योगों के लिए पूरी तरह तैयार करना है। इसी सोच के तहत समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनसे छात्रों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और उद्योग जगत की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन प्रेरणा मेहता ने किया। इस अवसर पर डॉ. मीनाक्षी चौधरी, इंजीनियर सोनल पांडेय, इंजीनियर सुमित पाठक, इंजीनियर साधना सिंह, नीतू काबरा, अनुपमा पारस, तृप्ति पाल और प्रशांत कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण उपस्थित रहे और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यशाला के समापन पर विद्यार्थियों ने आगामी हैकाथॉन में पूरे उत्साह के साथ भाग लेने का संकल्प लिया। विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान छात्रों ने उद्योगोन्मुखी कौशल, नवाचार, तकनीकी विकास और एआई के प्रभावी उपयोग से जुड़े कई प्रश्न पूछे तथा व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त किया।
विश्वविद्यालय का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिताओं के लिए तैयार नहीं करते, बल्कि उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने, उद्योगों की अपेक्षाओं को समझने और नवाचार आधारित सोच विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि विश्वविद्यालय अब शिक्षा को कौशल, तकनीक और रोजगार से जोड़ने की दिशा में लगातार नए प्रयास कर रहा है।
