कर्नाटक/बेंगलुरु। बेंगलुरु के मराठाहल्ली स्थित न्यू होराइज़न इंजीनियरिंग कॉलेज ऑडिटोरियम में युवा भरतनाट्यम् नृत्यांगना कु. अनन्या शर्मा का रंगप्रवेश (अरंगेत्रम) भव्य एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। लगभग दो घंटे तक चली इस प्रस्तुति में अनन्या ने बिना किसी थकान के अद्भुत ऊर्जा, भावपूर्ण अभिनय और उत्कृष्ट नृत्य-कौशल का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध नृत्य संस्था ‘नटराजरंगम स्कूल ऑफ डांस’ की वरिष्ठ नृत्यगुरु अभिनया नटराजन के कुशल निर्देशन में तैयार हुई अनन्या ने भरतनाट्यम् की कठिन प्रस्तुतियों को सहजता से मंच पर जीवंत कर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली परिचय दिया।

बेंगलुरु के मराठाहल्ली स्थित न्यू होराइज़न इंजीनियरिंग कॉलेज ऑडिटोरियम में युवा भरतनाट्यम् नृत्यांगना कु. अनन्या शर्मा का रंगप्रवेश (अरंगेत्रम) भव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को समर्पित इस सांस्कृतिक आयोजन में कला, साहित्य, शिक्षा और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने सहभागिता की। लगभग दो घंटे तक चली इस प्रस्तुति में अनन्या शर्मा ने बिना किसी थकान के अद्भुत ऊर्जा, लय, ताल, भाव और अभिनय का ऐसा संगम प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
प्रसिद्ध नृत्य संस्था ‘नटराजरंगम स्कूल ऑफ डांस’ की वरिष्ठ नृत्यगुरु अभिनया नटराजन के कुशल मार्गदर्शन और वर्षों के कठिन प्रशिक्षण का प्रभाव अनन्या की प्रत्येक प्रस्तुति में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। लगभग 17 वर्षीय अनन्या ने अपने आत्मविश्वास, सहज मुस्कान और मंच पर प्रभावशाली उपस्थिति से दर्शकों का मन मोह लिया। उनकी अंग-शुद्धि, संतुलित मुद्राएं, भावाभिव्यक्ति और संगीत के साथ तालमेल ने यह सिद्ध कर दिया कि उन्होंने भरतनाट्यम् की गहन साधना पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ की है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुष्पांजलि से हुआ। इसके बाद अनन्या ने जातिस्वरम् और मुरुगन कौत्वम् की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सौंदर्यपूर्ण परंपरा से परिचित कराया। प्रत्येक प्रस्तुति में उनकी तकनीकी दक्षता, लयबद्धता और शारीरिक संतुलन देखने योग्य था। दर्शकों ने हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज से उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और चुनौतीपूर्ण भाग वर्णम् रहा। भरतनाट्यम् की इस विस्तृत और कठिन प्रस्तुति में अनन्या शर्मा ने अपनी अद्भुत स्मरण-शक्ति, ताल-लय पर मजबूत पकड़, नृत्य की शुद्धता तथा अभिनय की परिपक्वता का शानदार परिचय दिया। भक्ति-रस से ओतप्रोत इस प्रस्तुति में उन्होंने भावों के सूक्ष्म परिवर्तन को जिस सहजता और प्रभावशीलता से मंच पर प्रस्तुत किया, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित कला-प्रेमियों ने इसे पूरे आयोजन की सबसे यादगार प्रस्तुति बताया।
इसके बाद अनन्या ने भगवान शिव को समर्पित ‘चंद्रचूड़ शिवशंकर पार्वती रमण’ शिवकृति प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति में उनके अभिनय, मुद्राओं और भावों ने भगवान शिव के विविध स्वरूपों को सजीव कर दिया। इसके उपरांत उन्होंने विरह-वेदना से व्याकुल नायिका की मनःस्थिति को दर्शाने वाली प्रसिद्ध जावली ‘माताडबारदेनो’ प्रस्तुत की, जिसमें उनकी भावाभिव्यक्ति और अभिनय-कौशल की विशेष सराहना हुई। दर्शक नायिका के मनोभावों से स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करते रहे।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित तिल्लाना की ऊर्जावान प्रस्तुति ने पूरे सभागार में नई ऊर्जा का संचार कर दिया। इसके पश्चात मंगलम् के साथ कार्यक्रम का पारंपरिक और गरिमापूर्ण समापन हुआ। अंतिम प्रस्तुति के बाद पूरा सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा और उपस्थित लोगों ने खड़े होकर अनन्या शर्मा का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर अनन्या शर्मा के माता-पिता आनंदिये शर्मा एवं छाया शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, गुरुजनों और कला-प्रेमियों का सम्मान किया तथा उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से नृत्यगुरु अभिनया नटराजन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि उनके समर्पित मार्गदर्शन, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रशिक्षण के कारण ही अनन्या आज इस महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुंच सकी हैं। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में नृत्यगुरु भावना कांथि, लेखिका एवं कला-समीक्षक वाई. के. संध्या शर्मा, जीईएआर इंटरनेशनल स्कूल के अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवासन, चिकित्सक डॉ. भरत, प्रोफेसर सुभाष चंद शर्मा तथा डॉ. राजरानी शर्मा मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने अनन्या शर्मा की प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और परंपराओं का सशक्त संवाहक है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी का इस प्रकार भारतीय कला और संस्कृति से जुड़ना अत्यंत सुखद और प्रेरणादायक है।
समारोह में उपस्थित कला-प्रेमियों ने भी अनन्या शर्मा की प्रस्तुति को यादगार बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा, समर्पण और कठोर साधना से यह सिद्ध कर दिया है कि यदि लगन और उचित मार्गदर्शन मिले तो युवा कलाकार भारतीय शास्त्रीय कला की महान परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। रंगप्रवेश के इस सफल आयोजन ने न केवल अनन्या शर्मा के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा के प्रति नई पीढ़ी में उत्साह और सम्मान का संदेश भी दिया। कार्यक्रम का समापन कलाकारों के सम्मान, आभार प्रदर्शन और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के संकल्प के साथ हुआ।
