आगरा। देश में होटल, रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट, ढाबा और बैंक्वेट हॉल के निर्माण एवं संचालन के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नए पर्यावरणीय नियम लागू कर दिए हैं। 20 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार अब होटलों को सर्विस सेक्टर के तहत चार प्रमुख श्रेणियों—व्हाइट, ग्रीन, ऑरेंज और रेड—में रखा जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब 20 कमरों तक के होटल व्हाइट कैटेगरी में शामिल होंगे, जिससे पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में भी छोटे होटल स्थापित करना आसान हो जाएगा। वहीं 300 से अधिक कमरों वाले होटल ही रेड कैटेगरी में आएंगे, जबकि पहले 100 से अधिक कमरों वाले होटल रेड श्रेणी में रखे जाते थे। नए नियमों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), जल पुनर्चक्रण, स्वच्छ ईंधन, गैस आधारित जेनसेट और प्रदूषण स्कोर के आधार पर वर्गीकरण जैसी व्यवस्थाओं को भी अनिवार्य किया गया है। रेस्टोरेंट, ढाबा, भोजनालय और बैंक्वेट हॉल के लिए भी अलग-अलग पर्यावरणीय मानक तय किए गए हैं।
देशभर में होटल निर्माण के लिए लागू हुए नए पर्यावरण नियम
देश में होटल और पर्यटन उद्योग से जुड़े कारोबारियों के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नई पर्यावरणीय गाइडलाइन लागू कर दी है। सदस्य सचिव भारत कुमार शर्मा द्वारा 20 जुलाई को जारी अधिसूचना के तहत होटल और रिजॉर्ट्स को अब औद्योगिक इकाई नहीं बल्कि सर्विस सेक्टर का हिस्सा माना जाएगा। इसके साथ ही प्रदूषण स्तर, पर्यावरणीय स्कोर और कमरों की संख्या के आधार पर उनका नया वर्गीकरण किया गया है।
नए नियमों का सबसे बड़ा असर छोटे और मध्यम स्तर के होटल कारोबार पर पड़ेगा। अब 20 कमरों तक के होटल व्हाइट कैटेगरी में शामिल किए गए हैं। व्हाइट कैटेगरी गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियों के लिए आरक्षित मानी जाती है। इससे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में भी छोटे होटल खोलने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हो जाएगी।
पहले क्या था और अब क्या बदला
इससे पहले 12 फरवरी 2025 को जारी नियमों में 100 से अधिक कमरों वाले सभी होटल रेड कैटेगरी में रखे गए थे। वहीं 20 से अधिक कमरों वाले होटल ऑरेंज कैटेगरी और 20 कमरों तक के होटल ग्रीन कैटेगरी में आते थे।
बाद में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सिफारिशों पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 17 अक्टूबर 2025 को बिना कमरों वाले छोटे रेस्टोरेंट, क्लाउड किचन और छोटे रिजॉर्ट्स को व्हाइट कैटेगरी में शामिल कर राहत दी थी।
अब नई अधिसूचना के तहत होटलों का वर्गीकरण और अधिक वैज्ञानिक बनाया गया है, जिसमें प्रदूषण सूचकांक और पर्यावरणीय स्कोर को प्रमुख आधार बनाया गया है।
रेस्टोरेंट, ढाबा और बैंक्वेट हॉल के लिए भी अलग नियम
सीपीसीबी ने केवल होटलों के लिए ही नहीं बल्कि रेस्टोरेंट, ढाबा, भोजनालय और बैंक्वेट हॉल के लिए भी नई पर्यावरणीय श्रेणियां तय की हैं। रेस्टोरेंट, ढाबा और भोजनालयों को उनके प्रदूषण स्कोर के आधार पर व्हाइट, ग्रीन और ऑरेंज कैटेगरी में रखा जाएगा।
इसी प्रकार मैरिज होम और बैंक्वेट हॉल का भी वर्गीकरण उनकी ग्राहक क्षमता, क्षेत्रफल और प्रदूषण सूचकांक के आधार पर किया जाएगा। बड़े बैंक्वेट हॉल और अधिक क्षमता वाले प्रतिष्ठानों पर अपेक्षाकृत कड़े पर्यावरणीय मानक लागू होंगे।
पर्यटन उद्योग को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से छोटे होटल संचालकों और पर्यटन क्षेत्र को राहत मिलने की संभावना है। पहले 100 से अधिक कमरों वाले होटल रेड कैटेगरी में आने के कारण पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया अधिक जटिल हो जाती थी। अब 300 कमरों से अधिक वाले होटल ही रेड श्रेणी में आने से मध्यम श्रेणी के बड़े होटल संचालकों को भी राहत मिलेगी।
इसके साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट, जल पुनर्चक्रण, स्वच्छ ईंधन और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनिवार्य प्रावधान पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत करेंगे। नए नियमों का उद्देश्य पर्यटन और होटल उद्योग के विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है, ताकि विकास और संरक्षण दोनों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सके।
