आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार के वृक्षारोपण महाअभियान-2026 को इस बार जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। अभियान के तहत आगरा और अलीगढ़ मंडल में कुल 2 करोड़ 90 लाख 28 हजार 600 पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। गड्ढों की खुदाई पूरी हो चुकी है, पौधशालाओं में पर्याप्त संख्या में पौधे उपलब्ध हैं और विभिन्न विभागों को उनके लक्ष्य के अनुसार जिम्मेदारियां भी सौंप दी गई हैं। 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वन महोत्सव के दौरान बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा।

आगरा सर्किट हाउस में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री के.पी. मलिक की अध्यक्षता में आगरा और अलीगढ़ मंडल के वन अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभियान की तैयारियों, पौधों की उपलब्धता, विभागों के बीच समन्वय और जनसहभागिता बढ़ाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधा लगाकर की गई। इसके बाद अधिकारियों ने दोनों मंडलों में होने वाले पौधारोपण अभियान की तैयारियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि आगरा मंडल में 1 करोड़ 65 लाख 44 हजार 800 पौधे लगाए जाएंगे, जबकि अलीगढ़ मंडल में 1 करोड़ 24 लाख 83 हजार 800 पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। दोनों मंडलों को मिलाकर कुल 2 करोड़ 90 लाख 28 हजार 600 पौधे लगाए जाएंगे। इस अभियान में वन विभाग के साथ राजस्व, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर निकाय, शिक्षा, सिंचाई और अन्य विभाग भी अपनी भागीदारी निभाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए सभी स्थानों पर पहले ही गड्ढों की खुदाई पूरी कर ली गई है। वन विभाग की पौधशालाओं में पर्याप्त संख्या में पौधे तैयार हैं और जरूरत के अनुसार सभी विभागों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इस बार केवल पौधे लगाने पर ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि लगाए गए पौधे जीवित रह सकें और आने वाले वर्षों में बड़े पेड़ों का रूप ले सकें।
राज्य मंत्री के.पी. मलिक ने कहा कि यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का जनआंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों, विशेषकर विधायकों के साथ समन्वय स्थापित कर उनके क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधारोपण कराया जाए। विधायक निधि के माध्यम से ट्रेंचिंग, ब्रिकगार्ड और पौधों की सुरक्षा से जुड़े कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि पौधों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि 1 जुलाई से 7 जुलाई तक चलने वाले वन महोत्सव में सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। महिला स्वयं सहायता समूहों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और युवाओं को अभियान से जोड़कर इसे जनभागीदारी का उत्सव बनाया जाए। आम नागरिकों को भी प्रेरित किया जाए कि वे अपने घर, खेत, विद्यालय, कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाएं और उनकी नियमित देखभाल करें।
बैठक में राज्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधशालाओं में अधिक से अधिक फलदार और उपयोगी प्रजातियों के पौधे तैयार किए जाएं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को फल और अन्य उपयोगी संसाधनों का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जाए जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों और लंबे समय तक जीवित रह सकें।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि पौधारोपण का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं होना चाहिए। असली सफलता तब मानी जाएगी जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहेंगे और बड़े होकर पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान देंगे। इसके लिए संबंधित विभागों को नियमित निगरानी करने और पौधों की देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जनपद स्तर पर गैर सरकारी संस्थाओं, महिला मंडलों, किसान समूहों, छात्र-छात्राओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों को अभियान से जोड़ा जाएगा। स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान का हिस्सा बन सकें।
बैठक में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) एवं मिशन निदेशक राम कुमार, मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र एवं नोडल अधिकारी के. इलांगो, वन संरक्षक अनिल कुमार पटेल, वन संरक्षक श्रद्धा यादव, सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक राजेश कुमार सहित आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, हाथरस और कासगंज के वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार का मानना है कि यदि इस अभियान में आम जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है तो प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ेगा, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकेगा। इसलिए इस बार अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य केवल करोड़ों पौधे लगाना नहीं, बल्कि प्रत्येक लगाए गए पौधे को सुरक्षित रखते हुए उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करना भी है।

