आगरा। आगरा कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के 125वें स्थापना वर्ष समारोह में जिलाधिकारी मनीष बंसल जी ने न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने के लिए बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अधिवक्ताओं के सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा देते हुए राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण, डिजिटल न्याय प्रणाली को बढ़ावा देने और गरीब एवं वंचित वर्ग को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई।

कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अधिवक्ता भवन में गुरुवार को कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन (जिला बार संघ) के 125वें स्थापना वर्ष समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी मनीष बंसल जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। ऐतिहासिक अवसर पर बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी ने समारोह को गरिमामय बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप न्यायिक प्रणाली को मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा हुई।
अपने संबोधन में जिलाधिकारी मनीष बंसल जी ने कहा कि अधिवक्ता केवल न्यायालय की कार्यवाही का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के ऐसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं जो आम नागरिक और न्याय प्रणाली के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर, गरीब और वंचित वर्ग को न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में अधिवक्ताओं का दायित्व केवल मुकदमों की पैरवी तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय के मूल उद्देश्य को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी उनकी अहम भागीदारी है।

उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता तभी बढ़ सकती है जब बार और बेंच के बीच पारस्परिक सम्मान, संवाद और समन्वय मजबूत हो। न्यायिक प्रक्रिया में सभी पक्षों के सामूहिक सहयोग से ही समयबद्ध और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपेक्षा की कि वे न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सरल तथा जनोन्मुख बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहें।
जिलाधिकारी ने प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि जिला प्रशासन हमेशा रचनात्मक सुझावों का स्वागत करता है। उन्होंने कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन की ओर से रखे गए सुझावों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन देते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल सरकारी कार्यों का निष्पादन नहीं, बल्कि न्यायिक एवं राजस्व व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनसुलभ बनाना भी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व वादों के शीघ्र निस्तारण के लिए जिला प्रशासन पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। लंबित मामलों को कम करने और आम लोगों को अनावश्यक विलंब से राहत दिलाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि समयबद्ध सुनवाई और पारदर्शी कार्यप्रणाली से लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
डिजिटल इंडिया अभियान का उल्लेख करते हुए जिलाधिकारी ने अधिवक्ताओं से ई-कोर्ट और ऑनलाइन फाइलिंग प्रणाली को अधिक से अधिक अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ तकनीक को अपनाना आवश्यक हो गया है। डिजिटल माध्यमों के उपयोग से न केवल कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि समय की बचत होगी और न्यायिक प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि अधिवक्ता आधुनिक तकनीक का उपयोग कर न्याय व्यवस्था को नई गति प्रदान करेंगे।
समारोह के दौरान कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन की 125 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह संस्था लंबे समय से अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ न्यायिक परंपराओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। संस्था की ऐतिहासिक विरासत नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
कार्यक्रम में अधिवक्ताओं का सम्मान भी किया गया। इस दौरान वरिष्ठ और सक्रिय अधिवक्ताओं को उनकी सेवाओं तथा न्यायिक क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की और अधिवक्ताओं के प्रति सम्मान की भावना को और सुदृढ़ किया।
समारोह के अंत में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच निरंतर संवाद न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह विश्वास भी व्यक्त किया गया कि भविष्य में भी दोनों पक्ष जनहित से जुड़े विषयों पर मिलकर कार्य करते रहेंगे।
कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) आजाद भगत सिंह जी, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महामंत्री, वरिष्ठ अधिवक्ता तथा बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे। पूरे आयोजन का वातावरण न्यायिक गरिमा, आपसी सहयोग और संस्थागत समन्वय की भावना से ओतप्रोत रहा। समारोह ने न केवल बार एसोसिएशन की 125 वर्ष की ऐतिहासिक यात्रा को सम्मान दिया, बल्कि भविष्य में अधिक सशक्त, पारदर्शी और जनकेंद्रित न्याय व्यवस्था की दिशा में सामूहिक संकल्प को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
