आगरा। चिकित्सा उपकरणों से जुड़े क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन में नैतिकता, वैज्ञानिक प्रक्रिया और नियामक मानकों की सही जानकारी शोध और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) की ओर से Institutional Ethics Committee और Scientific Review Committee के सहयोग से ISO 14155:2020 पर एक दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की गई। New Surgical Block स्थित MRU Hall में हुई कार्यशाला में चिकित्सा उपकरणों से संबंधित क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन की योजना, संचालन, दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग के साथ इसके नैतिक एवं नियामक पहलुओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रक्रिया समझाई।
12 सितंबर 2026 को आयोजित कार्यशाला का विषय “Competency in ISO 14155:2020 – Clinical Investigation of Medical Devices for Human Subjects” रहा। कार्यक्रम का आयोजन एसएन मेडिकल कॉलेज के मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट ने Institutional Ethics Committee और Scientific Review Committee के सहयोग से किया। इसका उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों से संबंधित क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन के दौरान आवश्यक नैतिक, वैज्ञानिक और नियामक मानकों की जानकारी देना था। इसके साथ ही चिकित्सा फैकल्टी की व्यावहारिक दक्षता को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ डीन एवं प्रधानाचार्य प्रशांत गुप्ता, उप-प्रधानाचार्य एवं सह-संरक्षक टीपी सिंह, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के जीवी सिंह, सदस्य सचिव-आईईसी, नोडल एमआरयू बृजेश शर्मा, दिव्या श्रीवास्तव, रुचिका गर्ग, नीतू, को-नोडल एमआरयू, आरती अग्रवाल और गीतू ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रतिभागियों का स्वागत किया गया और ISO 14155:2020 के विषय में प्रारंभिक जानकारी दी गई। एमआरयू के नोडल बृजेश शर्मा और अलका यादव ने प्रतिभागियों को मानक की मूल अवधारणाओं और कार्यशाला के उद्देश्य से अवगत कराया।
इसके बाद आरती अग्रवाल ने चिकित्सा उपकरणों की क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन के नैतिक पक्ष पर जानकारी दी। उन्होंने चिकित्सा उपकरणों से जुड़े शोध में नैतिक पहलुओं की भूमिका और क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन के दौरान उनसे जुड़े आवश्यक बिंदुओं को समझाया। कार्यशाला में प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि चिकित्सा उपकरणों से संबंधित किसी अध्ययन में वैज्ञानिक प्रक्रिया के साथ नैतिक आवश्यकताओं का ध्यान रखना क्यों महत्वपूर्ण है।
कार्डियोलॉजी विभाग के सौरभ नागर ने मेडिकल डिवाइस क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन की योजना से जुड़े पहलुओं पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इन्वेस्टिगेशन की योजना तैयार करने से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रतिभागियों के साथ साझा की। इसके बाद उर्वशी वर्मा ने क्लीनिकल प्रैक्टिस में मेडिकल डिवाइस से संबंधित क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन के संचालन के बारे में जानकारी दी। उनके सत्र में चिकित्सा क्षेत्र में इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ता प्रियदर्शिनी अरम्बम, Director–Clinical Operations, MedTech & Public Health Expert तथा Technical Advisor, U.P. Promote Pharma Council, New Delhi ने ISO 14155:2020 पर विस्तृत सत्र लिया। उन्होंने मेडिकल डिवाइस क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया। इसके साथ ही इन्वेस्टिगेशन के दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं पर भी जानकारी दी गई।
विशेषज्ञ सत्र में ISO 14155:2020 के अनुरूप क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने से संबंधित विषयों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को मेडिकल डिवाइस से जुड़े क्लीनिकल रिसर्च में दस्तावेज तैयार करने, आवश्यक सूचनाओं को व्यवस्थित रखने और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला। कार्यशाला का स्वरूप केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित hands-on learning के माध्यम से प्रक्रिया को समझाया गया।
हैंड्स-ऑन अभ्यास के दौरान प्रतिभागियों ने मेडिकल डिवाइस क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन से जुड़े व्यावहारिक पक्षों को समझा। इससे उन्हें मानक में बताई गई प्रक्रियाओं को वास्तविक परिस्थितियों के संदर्भ में देखने का अवसर मिला। कार्यशाला का यह हिस्सा चिकित्सा फैकल्टी और शोधकर्ताओं की व्यावहारिक समझ विकसित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण रहा। क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन की योजना से लेकर उसके संचालन, दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग तक के अलग-अलग चरणों को समझने पर ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों के साथ चर्चा सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें मेडिकल डिवाइस क्लीनिकल रिसर्च से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक और नियामक पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया से संबंधित अपने सवाल और विषय विशेषज्ञों के सामने रखे। चर्चा के दौरान क्लीनिकल रिसर्च में सामने आने वाले व्यावहारिक पक्षों और नियामक आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला के समापन अवसर पर ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर नीतू चौहान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला के माध्यम से चिकित्सा संकाय और शोधकर्ताओं को ISO 14155:2020 के अनुरूप मेडिकल डिवाइस क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। इसमें अध्ययन की योजना बनाने से लेकर संचालन, दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग तक के अलग-अलग चरणों को शामिल किया गया। नैतिक और नियामक आवश्यकताओं के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझाने पर भी कार्यक्रम में विशेष ध्यान रहा।
कार्यक्रम के सफल संचालन में ईना गुप्ता, सौरभ, पुष्पेंद्र, दीक्षा पांडेय आदि का योगदान रहा। एमआरयू, Institutional Ethics Committee और Scientific Review Committee के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में चिकित्सा उपकरणों से जुड़े क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया को व्यावहारिक और नियामक दोनों दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों के व्याख्यान, hands-on learning और चर्चा सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को ISO 14155:2020 के अनुरूप कार्य करने से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।
