आगरा। आलू की कीमतों में उतार-चढ़ाव से किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने और निजी शीतगृहों में भंडारित आलू की शत-प्रतिशत निकासी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बाजार से लेकर निर्यात तक की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। शनिवार को फतेहाबाद रोड स्थित होटल ग्रैंड मर्क्योर में दो दिवसीय आलू क्रेता-विक्रेता (बी-टू-बी मीट) सम्मेलन की शुरुआत हुई। इसमें देशभर के व्यापारी और 31 जनपदों के आलू उत्पादक किसान शामिल हुए।
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार आलू उत्पादक किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सम्मेलन में एक्सपोर्टर कंपनियों और किसानों के बीच एमओयू हुए, भाव स्थिरता कोष तथा शीतगृह भंडारण शुल्क में राहत पाने वाले लाभार्थियों को चेक बांटे गए। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार किसानों के मंडी शुल्क को माफ करने पर विचार कर रही है और आगरा में जल्द अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र पेरु-लीमा की शाखा शुरू होने की उम्मीद है।

12 सितंबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निवेश व्यापार तथा कृषि निर्यात राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह ने फतेहाबाद विधायक छोटे लाल वर्मा की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलित कर किया। 12 और 13 सितंबर को आयोजित किए जा रहे इस बी-टू-बी मीट का उद्देश्य प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों द्वारा निजी शीतगृहों में भंडारित आलू की शत-प्रतिशत निकासी कराना और किसानों को उनकी उपज का समुचित मूल्य दिलाना है।
सम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए आलू उत्पादकों के साथ देशभर के व्यापारी और 31 जनपदों के किसान शामिल हुए। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में प्रदेश में आलू विकास से जुड़ी योजनाओं और उनके सफल क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और आलू की बिक्री से जुड़े विषयों पर भी संवाद हुआ। उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ, कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन, एक्सपोर्टर और आलू उत्पादक किसानों ने भंडारण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता, उत्पादन तकनीक, विश्व बाजार तक पहुंच और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर पहले दिन अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में विभिन्न एक्सपोर्टर कंपनियों और आलू उत्पादक किसानों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर कर उनका आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना और कोल्ड स्टोरेज यानी शीतगृह के किराए तथा भंडारण शुल्क में राहत से संबंधित योजनाओं के लाभार्थियों को चेक वितरित किए गए। इसके जरिए किसानों को उनकी उपज के भंडारण और बाजार में कीमतों से जुड़े दबाव से राहत देने की व्यवस्था की जानकारी दी गई।
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी की सरकार ने आलू उत्पादक किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना लागू की है। इसका उद्देश्य बाजार में आलू की कीमत गिरने पर किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाना है। यदि आलू का बाजार भाव उत्पादन लागत से कम होता है तो लागत और बिक्री दर के अंतर के आधार पर किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना के लिए सरकार ने 1000 करोड़ रुपये का भावांतर भुगतान कोष तैयार किया है।

उन्होंने बताया कि आलू उत्पादकों को शीतगृह के किराए और भंडारण शुल्क में राहत देने के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। सरकार ने भामाशाह भाव स्थिरता कोष के तहत निजी शीतगृहों में भंडारित आलू के भंडारण प्रभार पर अनुदान योजना शुरू की है। इसके तहत किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कोल्ड स्टोरेज के भंडारण शुल्क पर अनुदान दिया जा रहा है।
किसानों को राहत राशि प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पारदर्शी भुगतान प्रक्रिया भी तय की गई है। योजना के तहत किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और राहत राशि सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजने का प्रावधान किया गया है। मंत्री ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण आलू बीज की खरीद पर भी किसानों को सहायता देने की व्यवस्था है। विभागीय या प्रमाणित आधारीय आलू बीज खरीदने पर किसानों को निर्धारित सहायता मिलेगी।

उन्होंने रूफटॉप खेती को बढ़ावा देने के लिए संचालित योजनाओं का लाभ लेने की भी अपील की। साथ ही बताया कि जल्द ही जेवर एयरपोर्ट पर आलू के निर्यात की सरल प्रक्रिया और सर्टिफिकेशन के लिए भवन बनकर तैयार होगा। इससे आलू उत्पादक किसानों को निर्यात के क्षेत्र में अधिक राहत मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और आलू उत्पादकों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों के मंडी शुल्क को माफ करने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि आगरा में जल्द अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र पेरु-लीमा की शाखा का शुभारंभ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से होगा। इससे उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और किसानों का गुणवत्तापूर्ण आलू विश्व बाजार तक पहुंच सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यहां विभिन्न प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना होगी, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा।

दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि आलू गरीब से लेकर अमीर तक सभी की थाली का हिस्सा है। इसलिए आलू की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर किसानों पर न पड़े, इसके लिए प्रदेश सरकार और उनके स्तर से गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के आलू उत्पादकों को राहत दिलाने के लिए ओडिशा सरकार के साथ बैठक की गई है। रूस, मलेशिया सहित अन्य देशों में आलू के निर्यात की संभावनाओं को लेकर भी सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्यात की संभावनाएं तलाशने के लिए भेजा गया है, ताकि प्रदेश के आलू किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके साथ है और बाजार की परिस्थितियों के कारण उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
मंत्री ने किसानों से आलू के साथ औद्यानिक फसलों की ओर भी बढ़ने की अपील की। उन्होंने फूल, फल, सब्जी और मसालों की खेती को अधिक लाभकारी बताते हुए किसानों से इन फसलों की संभावनाओं का लाभ उठाने को कहा। सम्मेलन में आलू की खेती से जुड़े उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार की चुनौतियों के साथ किसानों के लिए उपलब्ध योजनाओं पर भी संवाद जारी रहा।
कार्यक्रम में निदेशक भानु प्रकाश राम, संयुक्त निदेशक राजीव वर्मा, उत्तर प्रदेश कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन की अध्यक्ष तृप्ति सिंह, उपनिदेशक नीरज कौशल, धर्मपाल, जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी और अधीक्षक उद्यान रजनीश पांडे सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में एक्सपोर्टर और आलू उत्पादक किसान भी सम्मेलन में शामिल हुए।
