आगरा। मिलेट्स यानी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए सक्षम बनाने की दिशा में कृषि विभाग ने पहल की है। उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026-27 के तहत कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में कृषक उत्पादक संगठनों के सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने किसानों को बीज उत्पादन की तकनीक के साथ बीज प्रमाणीकरण और बीज विधायन की प्रक्रिया की जानकारी दी। प्रतिभागियों को मिलेट्स के उपयोग को बढ़ावा देने तथा स्वयं बीज तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन कृषि विभाग में संचालित उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026-27 योजना के अंतर्गत किया गया। इसका उद्देश्य कृषक उत्पादक संगठनों से जुड़े सदस्यों को मिलेट्स के बीज उत्पादन से संबंधित व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना रहा। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को बेहतर बीज तैयार करने की प्रक्रिया समझाने के साथ उसकी गुणवत्ता बनाए रखने से जुड़े जरूरी पहलुओं से अवगत कराया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में आयोजित कार्यक्रम में अपर कृषि निदेशक दलहन एवं तिलहन राजेश कुमार तथा संयुक्त कृषि निदेशक विनोद कुमार यादव विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने प्रतिभागियों को मिलेट्स के महत्व और इनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने किसानों से बीज उत्पादन की प्रक्रिया को समझकर उसे अपनी कृषि गतिविधियों से जोड़ने का आह्वान किया। प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को बीज उत्पादन से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बीज की गुणवत्ता बनाए रखने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि अच्छी फसल के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज का महत्व काफी अधिक है। बीज तैयार करने से लेकर उसकी गुणवत्ता की जांच और प्रमाणन तक की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक है।
उप निदेशक मृदा संरक्षण नीरज रान कटियार ने प्रशिक्षण के दौरान मृदा संरक्षण से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने कृषि उत्पादन में मिट्टी की भूमिका और खेती की बेहतर व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को प्रतिभागियों के सामने रखा। उप निदेशक पादप रक्षा राजेश कुमार ने फसल सुरक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी साझा की। किसानों को फसल को प्रभावित करने वाले कारकों तथा उत्पादन के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों से अवगत कराया गया।

उप निदेशक बीज प्रमाणीकरण संस्था जगदीश प्रसाद ने बीज प्रमाणीकरण से संबंधित विषय पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने किसानों को प्रमाणित बीज की प्रक्रिया और गुणवत्ता सुनिश्चित करने से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी। इस सत्र का उद्देश्य प्रतिभागियों को यह समझाना रहा कि उत्पादित बीज को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार करने और प्रमाणित कराने की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की जाती है।
राष्ट्रीय बीज निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक सीपी सिंह ने भी प्रतिभागियों को बीज उत्पादन से जुड़े विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बीज तैयार करने की प्रक्रिया से संबंधित तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई। प्रशिक्षण में बीज की गुणवत्ता और उत्पादन व्यवस्था को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। किसानों को उत्पादन से जुड़े जरूरी चरणों की जानकारी विशेषज्ञों के माध्यम से दी गई।

जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान किसानों को विभागीय स्तर पर संचालित गतिविधियों और मिलेट्स से संबंधित कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कृषक उत्पादक संगठनों के सदस्यों की भूमिका पर भी चर्चा की। प्रशिक्षण में किसानों को मिलेट्स की खेती और बीज उत्पादन को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
सेवानिवृत्त प्रसार प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. फैज बख्श सैय्यद ने भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने बीज उत्पादन और कृषि प्रसार से जुड़े विषयों पर जानकारी दी। विशेषज्ञों ने किसानों के सवालों और उनकी जिज्ञासाओं को भी प्रशिक्षण के दौरान संबोधित किया। इससे प्रतिभागियों को बीज तैयार करने की तकनीक को समझने में मदद मिली।
कार्यक्रम में सहायक निदेशक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला विकास सेठ ने समस्त अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों और किसानों की सहभागिता के लिए धन्यवाद दिया। इसके साथ ही दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन किया गया।
आयोजन में अनिरुद्ध माधव विषय वस्तु विशेषज्ञ तथा योजना प्रभारी वैभव कुमार की सक्रिय भूमिका रही। जनपदीय सलाहकार एवं कार्यक्रम संचालक सलीम अली खां ने कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया। तकनीकी सहायक सचिदानंद दुबे और सर्वेश कुमार भी मौजूद रहे। प्रशिक्षण को सफल बनाने में इन सभी की सहभागिता सराहनीय रही।
कृषि विभाग की इस पहल के तहत किसानों को केवल मिलेट्स की खेती तक सीमित रखने के बजाय बीज उत्पादन की प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया। इससे कृषक उत्पादक संगठनों के सदस्यों को बीज की गुणवत्ता और प्रमाणन से संबंधित जानकारी प्राप्त हुई। प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने उत्पादन से लेकर प्रमाणीकरण और विधायन तक के विभिन्न चरणों को समझाया।
मिलेट्स को पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को उत्पादन के साथ गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की दिशा में तैयार करना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अपने स्तर पर बीज उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया गया। अधिकारियों ने मिलेट्स के अधिक से अधिक उपयोग और खेती के विस्तार के लिए किसानों को जागरूक किया।
कृषक उत्पादक संगठनों से जुड़े सदस्यों के लिए आयोजित इस प्रशिक्षण में कृषि विभाग के विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने-अपने विषय से संबंधित जानकारी साझा की। मृदा संरक्षण से लेकर पादप रक्षा और बीज प्रमाणीकरण तक के विषयों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया। राष्ट्रीय बीज निगम से जुड़े अधिकारी ने भी बीज उत्पादन से संबंधित जानकारी दी। इस तरह प्रतिभागियों को मिलेट्स बीज उत्पादन से जुड़े अलग-अलग पक्षों की जानकारी एक ही कार्यक्रम में मिली।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने किसानों को मिलेट्स के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ इसकी खेती और बीज उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में आयोजित यह प्रशिक्षण कृषक उत्पादक संगठनों के सदस्यों को बीज उत्पादन की तकनीकी समझ देने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
