आगरा। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने अनफिट वाहनों पर कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में हुई जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति की बैठक में 72 लंबित अनफिट वाहनों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए। जिले में 412 स्कूलों के नाम पर 1421 वाहन पंजीकृत हैं। अभियान के दौरान अब तक 140 वाहनों के चालान किए जा चुके हैं जबकि 37 वाहनों का संचालन पूरी तरह बंद कराया गया है। जिलाधिकारी ने साफ कहा कि बच्चों को लेकर चलने वाला कोई भी अनफिट वाहन सड़क पर नहीं होना चाहिए।

कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में मिशन सेफ फ्यूचर 2.0 के तहत चल रहे अभियान की समीक्षा की गई। प्रदेश में 11 अगस्त से 25 अगस्त तक शैक्षणिक संस्थानों के अनाधिकृत और अनफिट स्कूली वाहनों के खिलाफ सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जिले में पंजीकृत वाहनों की फिटनेस के साथ परमिट आयु चालक की पात्रता और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि 10 अगस्त को तैयार की गई सूची में 79 वाहन अनफिट मिले थे। इनमें सात वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष 72 वाहनों का सत्यापन लंबित है। जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर निर्देश दिए कि केवल कार्यालय में उपलब्ध अभिलेख देखकर वाहनों की स्थिति तय न की जाए। परिवहन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर प्रत्येक वाहन की वास्तविक स्थिति की जांच करे।
उन्होंने कहा कि सत्यापन में यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए कि संबंधित वाहन अभी संचालित है या किसी स्थान पर खड़ा है अथवा उसे स्क्रैप कराया जा चुका है। यदि कोई अनफिट वाहन बच्चों को लेकर सड़क पर चलता हुआ मिले तो उसके खिलाफ नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने लंबित सत्यापन को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। अगली बैठक में प्रत्येक वाहन की स्थिति के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।

बैठक में विद्यालय संचालकों से निजी वैन के माध्यम से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों के संबंध में भी जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने कहा कि कई मामलों में अभिभावकों का समूह बच्चों के आवागमन के लिए किसी वाहन की व्यवस्था करता है। ऐसी स्थिति में भी उस वाहन को नियमों के अनुरूप पंजीकृत कराना जरूरी है। उसकी फिटनेस सुनिश्चित होनी चाहिए और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी निर्धारित मानकों का पालन होना चाहिए।
उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से कहा कि यदि अभिभावकों के समूह द्वारा विद्यार्थियों के लिए वाहन की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आती है तो स्कूल प्रबंधन वैधानिक प्रक्रिया पूरी कराने में सक्रिय भूमिका निभाए। बच्चों के आवागमन में इस्तेमाल होने वाले वाहन को केवल इस आधार पर नियमों से अलग नहीं माना जा सकता कि उसे अभिभावकों ने मिलकर अनुबंधित किया है।
जिलाधिकारी ने नियम 222-ख का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को स्कूल लाने और ले जाने में इस्तेमाल होने वाली बस वैन अथवा अभिभावकों के समूह द्वारा अनुबंधित वाहन की फिटनेस निर्धारित आयु क्षमता तथा अन्य सुरक्षा मानकों की जांच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। संबंधित अधिकारियों को इस नियम की जानकारी सभी विद्यालयों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
विद्यालय प्रबंधन को भी नियमों की जानकारी देकर प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अनफिट वाहन किसी भी परिस्थिति में संचालित नहीं होने दिए जाएं। स्कूली परिवहन से जुड़े नियमों का शत-प्रतिशत पालन कराया जाए।
बैठक में विद्यालयवार वाहनों का पूरा विवरण तैयार करने को कहा गया। इसमें प्रत्येक स्कूल के नाम के साथ वहां संचालित वाहनों की संख्या दर्ज करने के निर्देश दिए गए। फिट और अनफिट वाहनों की अलग-अलग स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा गया। जिन वाहनों का भौतिक सत्यापन पूरा हो चुका है उनकी जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल की जाएगी।
चालकों के सत्यापन को लेकर भी जिलाधिकारी ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। सत्यापित चालकों की सूची में चालक का नाम वाहन संख्या विद्यालय का नाम और सत्यापन की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज करने को कहा गया। इससे यह पता चल सकेगा कि किस स्कूल के वाहन को कौन चालक संचालित कर रहा है और उसकी पात्रता तथा सत्यापन की स्थिति क्या है।
अभियान के दौरान जिन वाहनों के चालान किए गए हैं उनका भी विद्यालयवार और वाहनवार विवरण तैयार किया जाएगा। इसी तरह सीज किए गए वाहनों की जानकारी भी अलग से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि कार्रवाई का रिकॉर्ड स्पष्ट और व्यवस्थित होना चाहिए ताकि प्रत्येक वाहन की स्थिति की निगरानी की जा सके।
स्कूल खुलने के समय जांच अभियान चलाने पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुबह विद्यालय खुलने के समय बच्चों को लेकर पहुंचने वाले वाहनों की जांच के लिए विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जाए। इस दौरान बिना फिटनेस वाले वाहन बच्चों को लेकर जाते हुए मिलें तो उनके खिलाफ नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि केवल अभियान चलाकर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। स्कूली वाहनों की नियमित निगरानी भी जरूरी है। विद्यालयों की सुरक्षा एवं परिवहन समितियों की बैठक नियमित रूप से आयोजित की जाए। इन बैठकों में विद्यार्थियों के सुरक्षित आवागमन से जुड़े मामलों की प्रभावी समीक्षा होनी चाहिए। किसी कमी की जानकारी मिलने पर उसे दूर कराने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाए।
जिले में 412 स्कूलों के नाम पर पंजीकृत 1421 वाहनों की संख्या को देखते हुए अभियान की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिटनेस परमिट वाहन की आयु चालक की पात्रता और सुरक्षा मानकों की जांच के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि बच्चों को लेकर चलने वाले वाहन निर्धारित मानकों पर खरे उतरें।
अभियान में अब तक 140 वाहनों के चालान और 37 वाहनों का संचालन बंद कराया जाना कार्रवाई की स्थिति को दर्शाता है। वहीं 79 अनफिट वाहनों में से सात की फिटनेस पूरी होने के बाद 72 वाहनों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। प्रशासन का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि रिकॉर्ड में अनफिट दर्ज कोई वाहन वास्तविकता में बच्चों के आवागमन में इस्तेमाल न हो रहा हो।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस अभियान में कार्रवाई के साथ निगरानी व्यवस्था भी मजबूत रखी जाए। विद्यालय संचालकों को भी अपने स्तर से परिवहन व्यवस्था की नियमित समीक्षा करनी होगी। बैठक में स्पष्ट किया गया कि विद्यार्थियों के आवागमन से जुड़े किसी भी वाहन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी नगर यमुनाधर चौहान और एआरटीओ आलोक अग्रवाल मौजूद रहे। जिला विद्यालय निरीक्षक बालिका विश्वप्रताप सिंह के साथ विभिन्न विद्यालयों के संचालक और प्रधानाचार्य भी शामिल हुए। संबंधित अधिकारियों को अभियान की प्रगति और वाहनों के सत्यापन की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
