आगरा। डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए डीएम मनीष बंसल ने बैंकों को गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही मुद्रा लोन, स्वयं सहायता समूहों, छोटे व्यापारियों और स्वरोजगार योजनाओं में ऋण वितरण बढ़ाकर जिले का ऋण-जमा अनुपात सुधारने, लंबित आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण करने और सरकारी योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले बैंक प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला परामर्शदात्री समिति एवं जिला स्तरीय समीक्षा समिति (डीसीसी/डीएलआरसी) की त्रैमासिक बैठक में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार, सरकारी ऋण योजनाओं की प्रगति, वित्तीय समावेशन और साइबर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में पिछली कार्यवाही की पुष्टि के बाद विभिन्न योजनाओं की प्रगति का विभागवार मूल्यांकन किया गया। समीक्षा में बताया गया कि दिसंबर 2025 तक जिले का ऋण-जमा अनुपात करीब 70.70 प्रतिशत रहा। डीएम ने इसे और बेहतर बनाने के लिए सभी बैंकों को लक्ष्य आधारित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में कहा गया कि बैंकिंग सेवाओं से अभी भी वंचित लोगों तक बैंक खाता, बीमा, पेंशन और ऋण जैसी सुविधाएं पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने, बैंक मित्रों तथा वित्तीय साक्षरता सलाहकारों के माध्यम से ग्राम और ब्लॉक स्तर पर वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित करने तथा अधिक से अधिक जनधन खाताधारकों को प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना से जोड़ने के निर्देश दिए गए। निजी बैंकों को भी जनधन खाते खोलने में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 20,36,887 जनधन खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 16,74,590 खातों की आधार सीडिंग पूरी हो चुकी है। डीएम ने आधार सीडिंग का प्रतिशत और बढ़ाने के साथ निष्क्रिय खातों को भी सक्रिय बनाने पर जोर दिया।

रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा में रुडसेट के माध्यम से भेजे गए 586 प्रशिक्षण एवं ऋण संबंधी प्रस्तावों में 504 स्वीकृत, 78 लंबित और चार निरस्त पाए गए। लंबित मामलों पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। साथ ही मशरूम उत्पादन, मोमबत्ती निर्माण, अचार पैकेजिंग तथा महिलाओं के उपयोगी लघु उद्योगों के लिए ऋण उपलब्ध कराने और प्रशिक्षण संस्थानों तथा औद्योगिक इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा, ताकि लाभार्थी केवल ऋण तक सीमित न रहें बल्कि सफल उद्यमी बन सकें।
वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों की समीक्षा में बताया गया कि चालू तिमाही में आयोजित शिविरों के माध्यम से 6011 लोगों को बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन के प्रति जागरूक किया गया। इसके बावजूद डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के लगातार सामने आ रहे मामलों पर डीएम ने चिंता जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, बुजुर्गों तथा पहली बार डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करने वाले लोगों के बीच विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए। लोगों को फर्जी लिंक, ओटीपी, केवाईसी अपडेट और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान किया जाए।
ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) की समीक्षा में बताया गया कि जिले का औसत सीडी रेशियो 71.16 प्रतिशत है। 17 बैंक आरबीआई के 60 प्रतिशत मानक से ऊपर हैं, जबकि 13 बैंक अभी भी निर्धारित मानक से नीचे हैं। कर्नाटका बैंक, साउथ इंडियन बैंक, फेडरल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, एसबीआई, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया। डीएम ने इन बैंकों को अगली समीक्षा बैठक तक सुधार लाने के निर्देश देते हुए कहा कि मुद्रा लोन, स्वयं सहायता समूहों, छोटे व्यापारियों और खुदरा ऋणों के वितरण में तेजी लाकर सीडी रेशियो बढ़ाया जाए।
शिक्षा ऋण की समीक्षा में बताया गया कि दिसंबर तिमाही तक 1021 शिक्षा ऋण स्वीकृत किए गए, जबकि 2191 ऋणों के माध्यम से 77.21 करोड़ रुपये का वितरण किया गया। केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का प्रदर्शन बेहतर रहा। दूसरी ओर एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक सहित कई निजी बैंकों की प्रगति संतोषजनक नहीं मिलने पर डीएम ने संबंधित प्रतिनिधियों से जवाब मांगा और सुधार के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना की समीक्षा में बताया गया कि जिले को भेजी गई 5924 पत्रावलियों में 2986 प्रस्ताव स्वीकृत किए जा चुके हैं। डीएम ने कहा कि यह सरकार की महत्वपूर्ण रोजगारपरक योजना है और इसमें अनावश्यक देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। संबंधित बैंक प्रबंधकों को समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना में लक्ष्य के सापेक्ष 14 प्रस्ताव बैंकों को भेजे गए, जिनमें तीन स्वीकृत, नौ लंबित और शेष प्रक्रिया में हैं। डीएम ने जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी को योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा लंबित प्रस्तावों का शीघ्र निस्तारण कराने के निर्देश दिए। इसी क्रम में मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत पारंपरिक मिट्टी शिल्प से जुड़े कारीगरों को आसान ऋण उपलब्ध कराने, उनके कौशल के संरक्षण और आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में एनआरएलएम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों और ओडीओपी उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, कारीगरों को बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा लंबित प्रस्तावों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों की सराहना की गई, जबकि अन्य योजनाओं में अत्यधिक ऋण अस्वीकृति पर संबंधित बैंकों से जवाब तलब किया गया।
इसके अलावा शहरी आजीविका मिशन, पीएम स्वनिधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मत्स्य पालन ऋण योजना और पीएमएफएमई योजना की भी समीक्षा हुई। पशुपालन केसीसी के तहत सहज दुग्ध संस्था से जुड़े किसानों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराने और संस्था के साथ संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। पीएमएफएमई योजना के लंबित मामलों पर बैंकों को 15 दिन के भीतर निर्णय लेकर 20 जुलाई तक सभी आवेदनों का निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, अग्रणी जिला प्रबंधक ऋषिकेश बनर्जी, आरबीआई के जिला विकास प्रबंधक संदीप मिश्रा, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
