आगरा। रुनकता स्थित शनिदेव मंदिर में चढ़ावे की रकम से जबरन हफ्ता वसूली का मामला सामने आया है। मंदिर समिति के सदस्य ने एक महिला समेत आठ लोगों पर हर सप्ताह 10 हजार रुपये की चौथ मांगने, 40 हजार रुपये जबरन ले जाने, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज के साथ शिकायत सौंपी है, जिसके बाद मामले की जांच एसीपी हरीपर्वत को सौंप दी गई है।
सिकंदरा थाना क्षेत्र के रुनकता स्थित शनिदेव मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। मंदिर समिति के एक सदस्य ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र के कुछ लोग लंबे समय से मंदिर में आने वाले चढ़ावे से जबरन हफ्ता वसूली कर रहे हैं। आरोप है कि विरोध करने पर न केवल गाली-गलौज और मारपीट की जाती है, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी जाती है। मामले की शिकायत पुलिस से की गई है और घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी जांच के लिए सौंपा गया है।
शिकायतकर्ता नरेन्द्र, जो रुनकता धाम शनिदेव मंदिर समिति के सदस्य हैं, मंदिर में आने वाले चढ़ावे का हिसाब-किताब संभालते हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग नियमित रूप से मंदिर की चढ़ावे की राशि से हर सप्ताह 10 हजार रुपये की चौथ मांगते रहे हैं। आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने या देरी होने पर दबाव बनाया जाता है और डराकर रकम वसूल ली जाती है।
शिकायत में आशा, संजू, धन्नो देवी उर्फ सरोज, चिन्का उर्फ नागेन्द्र, वोल्टर उर्फ प्रतीक, सुमन देवी, सीमा और राजू को नामजद किया गया है। पीड़ित का आरोप है कि सभी आरोपी कई बार मंदिर परिसर में पहुंचकर विवाद कर चुके हैं और पहले भी डराकर रुपये ले जा चुके हैं।
नरेन्द्र के अनुसार, 9 मई की रात करीब नौ बजे सभी आरोपी एक साथ मंदिर कार्यालय पहुंचे। वहां पहुंचते ही उन्होंने गाली-गलौज शुरू कर दी और हफ्ते की रकम समय पर नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। आरोप है कि इस दौरान उन्हें कुर्सी से जबरन हटाकर मुख्य कुर्सी पर कब्जा कर लिया गया। इसके बाद धमकाकर मंदिर के चढ़ावे में से 40 हजार रुपये ले लिए गए।
पीड़ित का कहना है कि पूरी घटना के दौरान उन्हें लगातार डराया-धमकाया गया। आरोपियों ने जाते समय चेतावनी दी कि यदि पुलिस में शिकायत की गई या उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कराने की कोशिश की गई तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। जान से मारने की धमकी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस से सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी पुलिस को उपलब्ध कराई है। बताया गया है कि फुटेज में कुछ लोग मंदिर कार्यालय के अंदर मौजूद दिखाई दे रहे हैं और नोट गिनते हुए भी नजर आ रहे हैं। पुलिस अब इस वीडियो की तकनीकी जांच कर आरोपों की सत्यता का मिलान करेगी।
घटना सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। शिकायत मिलने पर डीसीपी ने जांच एसीपी हरीपर्वत अमीषा को सौंप दी है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली राशि धार्मिक आस्था से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि चढ़ावे की रकम पर जबरन वसूली या दबाव बनाने जैसे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा विषय बन जाता है। यही कारण है कि पुलिस इस मामले के हर पहलू की गहनता से पड़ताल करने की तैयारी में है।
स्थानीय लोगों के बीच भी घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह के विवाद सामने आना चिंता का विषय है। उनका मानना है कि यदि किसी प्रकार की आर्थिक या प्रबंधन संबंधी शिकायत है तो उसका समाधान कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया से होना चाहिए, न कि दबाव या धमकी के जरिए।
फिलहाल पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सीसीटीवी फुटेज, शिकायतकर्ता के बयान, नामजद आरोपियों से पूछताछ और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही हैं। जांच पूरी होने के बाद पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई करेगी। पूरे मामले पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है और सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

