आगरा। जनपद में पंचायत सहायकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा के बाद जिला पंचायत राज विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए चार पंचायत सहायकों को सेवा से मुक्त कर दिया है, जबकि 135 पंचायत सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत सचिवालय में समय से उपस्थित न होने, ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने तथा निर्धारित दायित्वों का निर्वहन नहीं करने वाले पंचायत सहायकों के विरुद्ध भी जल्द प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। वहीं बेहतर कार्य करने वाले पंचायत सहायकों को प्रोत्साहित करने की भी योजना बनाई गई है।

जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि जनपद में पंचायत सहायकों की कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई पंचायत सहायक अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं। विभिन्न विकास खंडों से प्राप्त आख्या और संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की गई।
समीक्षा में सामने आया कि चार पंचायत सहायकों द्वारा लंबे समय से अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जा रहा था तथा कार्य के प्रति घोर लापरवाही बरती जा रही थी। संबंधित ग्राम पंचायतों ने इनके विरुद्ध प्रस्ताव भेजे थे, जिनके आधार पर इन्हें सेवा से मुक्त कर दिया गया। सेवा से हटाए गए पंचायत सहायकों में नवीन कुमार (ग्राम पंचायत बलाई), नीतू (ग्राम पंचायत औंध), रूबी (ग्राम पंचायत नगला दलेल) तथा राहुल (ग्राम पंचायत करकौली, विकास खंड पिनाहट) शामिल हैं।
इसके अलावा जनपद के 135 पंचायत सहायकों के विरुद्ध भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जांच के दौरान इन पंचायत सहायकों के खिलाफ कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें ओएसआर (ओन सोर्स रेवेन्यू) से अर्जित आय को ग्राम पंचायत के खाते में जमा न करना, नियमित रूप से पंचायत सचिवालय में उपस्थित न होना, ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज न करना तथा निर्धारित कार्यों का समय पर निष्पादन नहीं करना शामिल है। इन सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पंचायत सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी ने कहा कि पंचायत सहायकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। ग्राम पंचायतों में समय से पंचायत सचिवालय नहीं पहुंचने वाले और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले पंचायत सहायकों को चिन्हित किया जा रहा है। ऐसे कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पंचायत सहायकों की नियुक्ति ग्रामीण जनता को विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने और ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के उद्देश्य से की गई है। यदि कोई पंचायत सहायक अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करता है तो इसका सीधा असर ग्रामीणों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है। इसी कारण विभाग ने कार्य में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।
विभाग ने केवल कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले पंचायत सहायकों को प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि ग्राम पंचायतों के माध्यम से सबसे अधिक सेवाएं प्रदान करने और स्वयं के प्रयासों से अधिक आय अर्जित करने वाले पंचायत सहायकों को सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले पंचायत सहायकों को प्रोत्साहन स्वरूप एक मोबाइल फोन उपलब्ध कराया जाए।
विभाग का मानना है कि इससे पंचायत सहायकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। साथ ही पंचायत सहायकों को अपने कार्यों के प्रति अधिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ काम करने की प्रेरणा मिलेगी।
जिला पंचायत राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि पंचायत सहायकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगी। जो पंचायत सहायक अपने दायित्वों का ईमानदारी और समयबद्ध तरीके से निर्वहन करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही और अनियमितता बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग का उद्देश्य ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर सेवा व्यवस्था सुनिश्चित करना है, ताकि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।
