आगरा। आगरा के खटीकपाड़ा क्षेत्र में खटीक समाज के आराध्य संत बाबा दुर्लभ नाथ की स्मृति में बनने वाले भव्य स्मृति द्वार के निर्माण की शुरुआत हो गई। केपी हॉस्पिटल के पास स्थित खटीक समाज कम्युनिटी हॉल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा एवं कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्मृति द्वार के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। वर्षों से चली आ रही इस मांग के धरातल पर आने से खटीक समाज और क्षेत्र के लोगों में उत्साह देखने को मिला। भूमि पूजन के दौरान क्षेत्र जयकारों से गूंज उठा। समाज के बुजुर्गों, युवाओं और मातृशक्ति ने कार्यक्रम में शामिल होकर इस पहल का स्वागत किया और इसके लिए मंत्री का आभार जताया।
भूमि पूजन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में खटीक समाज और आसपास के क्षेत्र के लोग पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने कहा कि संत बाबा दुर्लभ नाथ की स्मृति में बनने वाला यह द्वार आने वाली पीढ़ियों के लिए संत की शिक्षाओं और समाज की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनेगा। उनके मुताबिक यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं बल्कि समाज की आस्था, गौरव और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा विषय है। लंबे समय से स्मृति द्वार की मांग की जा रही थी और अब इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से समाज में खुशी का माहौल है।

भूमि पूजन के अवसर पर कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि संत बाबा दुर्लभ नाथ का जीवन और उनके विचार पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। उन्होंने समाज को सही राह दिखाने के साथ समरसता का संदेश देने का काम किया। ऐसे महान संत की स्मृति में स्मृति द्वार का निर्माण होना केवल खटीक समाज ही नहीं बल्कि पूरे आगरा के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार महापुरुषों और संतों की विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। स्मृति द्वार आने वाली पीढ़ियों को समाज की सांस्कृतिक पहचान और संत बाबा दुर्लभ नाथ के आदर्शों की याद दिलाने का काम करेगा।
योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि संतों की विरासत समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे महापुरुषों के जीवन और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। स्मृति द्वार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने खटीक समाज के विकास और क्षेत्र की उन्नति के लिए लगातार काम करने की बात भी कही। भूमि पूजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निर्माण स्थल पर पूजन की प्रक्रिया पूरी की गई और इसके साथ ही स्मृति द्वार के निर्माण की औपचारिक शुरुआत हुई।
कार्यक्रम में समाज के लोगों ने मंत्री का स्वागत भी किया। पदाधिकारियों ने साफा बांधकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया। इस दौरान समाज के लोगों ने जयकारे लगाए। वक्ताओं ने कहा कि संत बाबा दुर्लभ नाथ की स्मृति में बनने वाला द्वार समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। यह आने-जाने वाले लोगों को संत की स्मृति से जोड़ने के साथ समाज के इतिहास और आस्था की पहचान भी कराएगा। वक्ताओं के मुताबिक किसी समाज की पहचान केवल वर्तमान गतिविधियों से नहीं बनती, बल्कि उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत भी उसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। संत बाबा दुर्लभ नाथ की स्मृति को स्थायी रूप देने की पहल इसी विरासत को आगे बढ़ाने से जुड़ी है।

भूमि पूजन समारोह में खटीक समाज के बुजुर्गों के साथ युवाओं और महिलाओं की भी भागीदारी रही। लोगों ने कहा कि समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने से उनमें उत्साह है। क्षेत्र के लोगों ने उम्मीद जताई कि स्मृति द्वार का निर्माण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जल्द पूरा होगा और इसके बाद यह खटीकपाड़ा क्षेत्र की पहचान से जुड़ा प्रमुख स्थल बनेगा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने संत बाबा दुर्लभ नाथ के जीवन और उनके योगदान को याद किया तथा उनके बताए आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान संत श्री दुर्लभ नाथ सेवा समिति की भूमिका भी प्रमुख रही। समिति के पदाधिकारियों और समाज के लोगों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि संत की स्मृति में बनने वाले द्वार को लेकर समाज में लंबे समय से उत्सुकता थी। भूमि पूजन के बाद अब लोगों को इसके निर्माण का इंतजार है। उनका कहना था कि स्मृति द्वार समाज की आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और संत परंपरा से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
भूमि पूजन समारोह में संत श्री दुर्लभ नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष शिवकुमार राजोरा, राजकुमार ऐसवाल, सुमित, सुभाष राजोरा, जीतू बागड़ी, भगवत दयाल बडगूजर, संजय, लक्ष्मण ऐशवाल, सुरेश पलवार, शंभू बाटोलिया, सत्तो पलवार, पार्षद गुड्डू मेनन, जयदीप सोनकर, राजीव लवानिया और शशिकांत गुप्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अश्विनी शर्मा ने किया।

समारोह के लिए खटीकपाड़ा और आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचे। भूमि पूजन के दौरान क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। समाज के लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और स्मृति द्वार के निर्माण को समाज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। कार्यक्रम के समापन पर आगंतुकों को प्रसाद वितरित किया गया। संत बाबा दुर्लभ नाथ की स्मृति में बनने वाले इस द्वार को लेकर अब क्षेत्रवासियों की निगाहें इसके निर्माण कार्य पर रहेंगी। समाज के लोगों का कहना है कि स्मृति द्वार तैयार होने के बाद यह केवल खटीकपाड़ा की पहचान नहीं रहेगा, बल्कि संत की विरासत और समाज की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने लाने वाला प्रमुख स्थल बनेगा।
