आगरा। राजकीय जिला पुस्तकालय को विद्यार्थियों और युवाओं के लिए आधुनिक, सुविधायुक्त और उपयोगी अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में मंगलवार को राजकीय जिला पुस्तकालय भवन में जिला पुस्तकालय समिति की बैठक हुई, जिसमें पुस्तकालय के विकास, सुविधाओं के विस्तार, साफ-सफाई, अध्ययन व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों की उपलब्धता, महिला पाठकों की सुरक्षा और परिसर के बेहतर उपयोग समेत कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने पुस्तकालय की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय को ऐसा केंद्र बनाया जाए, जहां विद्यार्थी और युवा नियमित अध्ययन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी बेहतर तरीके से कर सकें।

बैठक में पुस्तकालय अध्यक्ष ने पुस्तकालय में वर्तमान में उपलब्ध सुविधाओं, व्यवस्थाओं और आवश्यकताओं के बारे में समिति को जानकारी दी। इसके बाद पुस्तकालय के विकास और इसे विद्यार्थियों तथा अन्य पाठकों के लिए अधिक उपयोगी बनाने को लेकर विभिन्न प्रस्तावों पर विचार किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि पुस्तकालय में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए और जहां सुविधाओं की कमी है, वहां उसे प्राथमिकता से दूर किया जाए, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी और पाठक इसका लाभ उठा सकें।

पुस्तकालय परिसर और वहां बने शौचालयों की नियमित साफ-सफाई के लिए नगर निगम के समन्वय से एक सफाई कर्मचारी की नियमित तैनाती सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। परिसर में जिन स्थानों पर स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर करने की जरूरत है, वहां आवश्यक प्रबंध करने को कहा गया। इसके साथ ही पुस्तकालय के हरित क्षेत्र की नियमित देखरेख और परिसर में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पुस्तकालय केवल अध्ययन का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण वाला केंद्र भी होना चाहिए।
बैठक में पुस्तकालय में मौजूद तकनीकी स्थायी सामग्री और नॉन-कंज्यूमेबल सामग्री, जैसे फर्नीचर, मेज, कुर्सी, अलमारी आदि को सुव्यवस्थित करने पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने उपयोग में नहीं आ रही सामग्री की पहचान कर उसे नियमानुसार निस्तारित करने के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनुपयोगी सामग्री का पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नीलामी के माध्यम से निस्तारण किया जाए। इससे पुस्तकालय में खाली होने वाली जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा और वहां पाठकों के लिए नई तथा उपयोगी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए वाचनालय के वातावरण को सुविधाजनक बनाने पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने वाचनालय के हॉल में दो एसी लगाए जाने के निर्देश दिए। इससे गर्मी के मौसम में भी विद्यार्थियों को आरामदायक वातावरण में लंबे समय तक पढ़ाई करने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि अध्ययन केंद्र की मूल जरूरतों को पूरा करने के साथ ऐसी सुविधाएं भी विकसित की जाएं, जो पाठकों को नियमित रूप से पुस्तकालय आने के लिए प्रेरित करें।
बैठक में नई शिक्षा व्यवस्था और बदलते पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि नवीन पाठ्यक्रमों के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों को पुस्तकालय में उपलब्ध कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों को तैयारी के लिए एक ही स्थान पर बेहतर अध्ययन सामग्री मिल सके। इसके लिए जनपद स्तर पर कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व यानी सीएसआर के माध्यम से पुस्तकालय के विकास और आवश्यक संसाधन जुटाने के प्रयास करने को कहा गया। इससे पुस्तकालय में नई किताबें, अध्ययन सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाओं के विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद है।
महिला पाठकों की सुविधा और सुरक्षा को भी बैठक में प्रमुखता दी गई। जिलाधिकारी ने वाचनालय में महिला होमगार्ड की तैनाती के निर्देश दिए, ताकि महिला पाठकों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। इसके साथ ही महिला पाठकों के लिए आवश्यक सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर समिति ने विचार किया। उद्देश्य यह है कि छात्राएं और अन्य महिला पाठक बिना किसी असुविधा के नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग कर सकें।
जिलाधिकारी ने कहा कि राजकीय जिला पुस्तकालय को विद्यार्थियों और युवाओं के लिए ज्ञान, अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बेहतर केंद्र बनाया जाना चाहिए। इसके लिए पुस्तकालय में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के साथ आधुनिक सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय की व्यवस्थाओं में सुधार का सीधा लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जो प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षिक लक्ष्यों की तैयारी कर रहे हैं। बेहतर पुस्तकें, अनुकूल वातावरण और आवश्यक सुविधाएं मिलने से पाठकों को अध्ययन में सुविधा होगी।
पुस्तकालय के विकास से जुड़े कार्यों की लगातार निगरानी और समीक्षा के लिए समिति की बैठकें नियमित कराने पर भी जोर दिया गया। तय किया गया कि प्रत्येक छह माह में कम से कम दो बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि विकास कार्यों की प्रगति, नई जरूरतों और उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा होती रहे। इससे पुस्तकालय को विकसित करने की प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी और जरूरत के अनुसार नए सुधार किए जा सकेंगे।
बैठक के बाद जिलाधिकारी ने राजकीय जिला पुस्तकालय परिसर का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को मौके पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, परिसर की व्यवस्था, अध्ययन कक्ष और अन्य सुविधाओं को लेकर भी जानकारी ली गई।
बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक रविंद्रपाल सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह, प्रतिमा भार्गव, पुस्तकालय अध्यक्ष तथा जिला राजकीय पुस्तकालय समिति के सदस्य मौजूद रहे। बैठक और निरीक्षण के दौरान पुस्तकालय को विद्यार्थियों और युवाओं के लिए अधिक उपयोगी बनाने पर विशेष जोर रहा। प्रस्तावित सुविधाओं के विस्तार और व्यवस्थाओं में सुधार के बाद राजकीय जिला पुस्तकालय को शहर में अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक व्यवस्थित और आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।
