कोबरा ने डसा फिर नाग आया अगले दिन नागिन भी पहुंची
आगरा। एक सितंबर को गेंद उठाते समय अरुण की अंगुली में डसा था कोबरा, इलाज के बाद स्वस्थ होकर लौटा था घर मंगलवार को फिर घर में नाग पहुंचा तो मचा हड़कंप अगले दिन नागिन भी आई वन विभाग ने दोनों को रेस्क्यू कर बीहड़ में छोड़ा
चोरंगाहार गांव में एक ही घर में कुछ दिन के अंतराल पर नाग के पहुंचने से परिवार और आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। जिस घर में एक सितंबर की शाम नौ वर्षीय अरुण को कोबरा ने उस समय डस लिया था जब वह गेंद उठा रहा था उसी घर में मंगलवार को फिर एक नाग दिखाई दिया। परिवार के लोग कुछ समझ पाते इससे पहले अगले दिन नागिन के भी वहां पहुंचने से चिंता और बढ़ गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद नाग और नागिन दोनों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। बाद में उन्हें बीहड़ क्षेत्र में उनके प्राकृतिक रहवास में छोड़ दिया गया।

चोरंगाहार गांव निवासी शिवनरेश के घर में एक सितंबर की शाम उस समय चीख-पुकार मच गई थी, जब नौ वर्षीय अरुण गेंद उठाने के लिए गया था। इसी दौरान वहां छिपे कोबरा ने उसकी अंगुली में डस लिया था। सांप के डसने की जानकारी होते ही परिवार में अफरातफरी मच गई थी। बच्चे को तत्काल उपचार के लिए ले जाया गया। समय पर इलाज मिलने के बाद अरुण की हालत में सुधार हुआ और वह स्वस्थ होकर घर लौट आया। परिवार ने भी राहत की सांस ली थी, लेकिन घर में दोबारा सांप दिखाई देने से पुराने हादसे की याद ताजा हो गई।
मंगलवार को शिवनरेश के घर में परिजनों की नजर एक बार फिर सांप पर पड़ी। इस बार भी घर के भीतर नाग को देखकर लोग सहम गए। परिवार के सदस्यों ने उसे पकड़ने या भगाने का जोखिम नहीं लिया और इसकी सूचना वन विभाग को दी। नाग के घर में होने की खबर आसपास के लोगों तक पहुंची तो पड़ोसी भी मौके पर पहुंचने लगे। कुछ ही देर में घर के आसपास लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की थी कि कहीं सांप किसी कमरे या सामान के पीछे छिप न जाए और किसी व्यक्ति को दोबारा नुकसान न पहुंचा दे।
वन विभाग की टीम सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची। टीम ने पहले आसपास के स्थान को सुरक्षित कराया और लोगों को सांप से दूरी बनाए रखने को कहा। रेस्क्यू के दौरान सांप को उकसाने या उसके करीब जाने से बचते हुए उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने का प्रयास किया गया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद नाग को पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। अगले दिन उसी घर में नागिन भी दिखाई दी। इससे परिवार और आसपास के लोगों में एक बार फिर दहशत फैल गई। सूचना वन विभाग तक पहुंची तो टीम दोबारा मौके पर पहुंची। जांच और रेस्क्यू की प्रक्रिया के बाद नागिन को भी सुरक्षित पकड़ लिया गया। दोनों सर्पों को बाद में बीहड़ क्षेत्र में उनके प्राकृतिक रहवास में छोड़ दिया गया। वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।
बच्चे के चाचा शिव प्रकाश ने बताया कि एक सितंबर को अरुण को सांप ने काट लिया था। उस घटना के बाद से परिवार पहले ही डरा हुआ था। अब घर में दोबारा नाग और फिर नागिन दिखाई देने से सभी लोग घबरा गए। वन विभाग की टीम ने पहुंचकर दोनों सर्पों को सुरक्षित बाहर निकाल दिया, जिसके बाद परिवार को कुछ राहत मिली।
गांवों और खेतों के आसपास सर्प दिखाई देना बारिश के मौसम में असामान्य नहीं माना जाता। कई बार पानी भरने, बिलों में पानी जाने या भोजन की तलाश में सांप अपने प्राकृतिक ठिकानों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। घरों के आसपास घास-फूस, लकड़ी, ईंटों के ढेर, कूड़ा या चूहों की अधिकता भी सांपों को आकर्षित कर सकती है। ऐसे में घर के आसपास साफ-सफाई रखना और बिना देखे किसी अंधेरे स्थान या सामान के ढेर में हाथ नहीं डालना जरूरी है।
भारत में सांपों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें सभी जहरीली नहीं होतीं। भारत में चिकित्सकीय दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण जहरीले सांपों में भारतीय चश्माधारी कोबरा, कॉमन क्रेट यानी करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर को आम तौर पर ‘बिग फोर’ के रूप में जाना जाता है। भारत सरकार के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के दस्तावेज के अनुसार देश में दर्ज सर्प प्रजातियों में यही चार प्रजातियां जानलेवा सर्पदंश के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हालांकि क्षेत्र के हिसाब से अन्य जहरीली प्रजातियां भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।
कोबरा का विष मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। करैत का विष भी न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव डाल सकता है और गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकता है। रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे वाइपर का विष रक्त के जमने की प्रक्रिया और शरीर के ऊतकों पर गंभीर असर डाल सकता है। इसलिए किसी सांप को केवल उसके रंग या आकार देखकर जहरीला या गैरजहरीला मान लेना सुरक्षित नहीं है। सांप की सही पहचान न होने पर उसे पकड़ने या उसके करीब जाने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना बेहतर है।
किसी एक सांप को दुनिया का या भारत का ‘सबसे जहरीला’ बताना भी हमेशा सही नहीं होता, क्योंकि विष की ताकत, शरीर में पहुंचने वाली मात्रा और उसके प्रभाव अलग-अलग होते हैं। भारत में आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी संदिग्ध जहरीले सांप के काटने को गंभीरता से लिया जाए और पहचान के चक्कर में उपचार में देरी न की जाए। विशेषज्ञों के अनुसार सर्पदंश के बाद सही समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। एंटी-स्नेक वेनम यानी एंटीवेनम जहरीले सर्पदंश के गंभीर प्रभावों को रोकने या कम करने के लिए प्रमुख प्रभावी उपचार है।
सांप केवल इंसानों के लिए खतरा पैदा करने वाले जीव नहीं हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कई सांप चूहों और दूसरे छोटे जीवों को खाते हैं। इससे खेतों और ग्रामीण इलाकों में कृंतकों की संख्या नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। चूहों की संख्या कम होने से फसलों को होने वाला नुकसान भी घट सकता है। इस वजह से सांपों को देखते ही मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मदद लेना बेहतर माना जाता है। गैरजहरीले सांप भी प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और कई प्रजातियां खेतों के आसपास चूहों की संख्या नियंत्रित करने में योगदान देती हैं।
सर्पदंश की स्थिति में सबसे पहले घबराने के बजाय व्यक्ति को शांत रखना चाहिए। जिस स्थान पर सांप ने काटा है वहां से व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाना जरूरी है, लेकिन उसे अनावश्यक रूप से चलने-फिरने नहीं देना चाहिए। काटे गए अंग को स्थिर रखने की कोशिश करनी चाहिए और व्यक्ति को जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए। अंग में अंगूठी, कड़ा, पायल या कोई अन्य कसाव वाली चीज हो तो सूजन बढ़ने से पहले उसे हटा देना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी संदिग्ध जहरीले सर्पदंश में व्यक्ति को स्थिर रखने और बिना देरी चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की सलाह देता है।
सर्पदंश के बाद कई लोग घाव पर चीरा लगाने, मुंह से जहर चूसने, कसकर रस्सी या तार बांधने, जड़ी-बूटी लगाने या किसी पारंपरिक तरीके से विष निकालने की कोशिश करते हैं। ऐसे उपाय नुकसान पहुंचा सकते हैं और अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी स्थिति को गंभीर बना सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घाव को काटने, जहर चूसने और कसकर टॉर्निकेट बांधने जैसे उपायों से बचने की सलाह दी है।
यदि सांप दिखाई दे तो उसकी तस्वीर सुरक्षित दूरी से ली जा सकती है, लेकिन उसकी पहचान करने या पकड़ने के लिए उसके पास जाना नहीं चाहिए। सांप को पकड़कर अस्पताल ले जाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपातकालीन प्रोटोकॉल में भी सांप को पकड़ने के बजाय सुरक्षित दूरी से पहचान में मदद करने वाली तस्वीर लेने की सलाह दी गई है।
सर्पदंश के बाद सांस लेने में परेशानी, पलकें झुकना, निगलने में दिक्कत, कमजोरी, बेहोशी, खून बहने या शरीर के किसी हिस्से में तेजी से सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए। मरीज को अकेला छोड़ने के बजाय उसके साथ रहना और उसकी हालत पर नजर रखते हुए अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। उल्टी होने की स्थिति में उसकी सांस की नली सुरक्षित रखने के लिए उसे उचित रिकवरी पोजीशन में रखने की जरूरत पड़ सकती है।
चोरंगाहार गांव की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ग्रामीण इलाकों में घरों के आसपास सर्पों के आने पर लोग किस तरह सावधानी बरतें। बारिश के मौसम में घर के आसपास झाड़ियां और कचरा साफ रखना, लकड़ी या ईंटों के ढेर को बिना जांचे नहीं हटाना, रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करना और सोने की जगह के आसपास सावधानी बरतना जरूरी है। खेतों या बीहड़ क्षेत्र के नजदीक रहने वाले परिवारों के लिए यह सावधानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
एक ही घर में पहले बच्चे को कोबरा द्वारा डसे जाने और उसके बाद नाग तथा नागिन के पहुंचने की घटना ने चोरंगाहार गांव में लोगों को जरूर डरा दिया है, लेकिन वन विभाग की टीम द्वारा दोनों सर्पों को सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक रहवास में छोड़ना यह भी दिखाता है कि इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव को बिना किसी जीव को नुकसान पहुंचाए कम किया जा सकता है। ग्रामीणों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि घर या खेत में सांप दिखने पर उसे मारने या पकड़ने की कोशिश न करें और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या संबंधित वन विभाग को सूचना दें।
