आगरा। प्रताप पब्लिक स्कूल, शिवाकुंज, सिकंदरा में संस्कार भारती जिला आगरा की ओर से आयोजित बालकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता में नन्हे प्रतिभागियों ने कृष्ण भक्ति, कला और अभिनय का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। 95 प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। 27 दिन के नवजात कृष्ण स्वरूप से लेकर नौ वर्ष तक के बच्चों ने चार आयु वर्गों में अपनी प्रतिभा दिखाई। इसके साथ ही कृष्ण-सुदामा संवाद, माखन चोरी और कृष्ण लीला पर आधारित नृत्य व नृत्य नाटिकाओं ने कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया। विभिन्न वर्गों में अथर्व, अभिराज, आराध्या श्रीवास्तव और कृष्णा सिंह ने प्रथम स्थान हासिल किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कार भारती जिला आगरा के जिला उपाध्यक्ष रक्षपाल सिंह परमार और महानगर कोषाध्यक्ष राजीव सिंघल ने राधाकृष्ण की युगल प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही समारोह का औपचारिक आगाज हुआ और परिसर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण दिखाई देने लगा। आयोजन में बच्चों के साथ उनके अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। नन्हे बच्चों को कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों में सजाकर मंच तक लाया गया, जिससे कार्यक्रम में आकर्षण और बढ़ गया।

बालकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता में सबसे कम आयु के प्रतिभागी से लेकर नौ वर्ष तक के बच्चों ने अलग-अलग वर्गों में हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता में 27 दिन के नवजात कृष्ण स्वरूप ने भी सहभागिता की। इतने छोटे प्रतिभागी की मौजूदगी ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। बच्चों के अभिभावकों ने भी पूरे उत्साह के साथ उनकी तैयारियां कराईं। किसी ने बाल गोपाल को मुकुट, मोरपंख और बांसुरी से सजाया तो किसी ने पारंपरिक कृष्ण स्वरूप को आकर्षक पोशाक के साथ मंच पर प्रस्तुत किया। बच्चों की वेशभूषा और उनकी मासूम अदाओं ने वातावरण में उत्सव का रंग भर दिया।
प्रतियोगिता को चार आयु वर्गों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक वर्ग में प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति और रूप सज्जा के माध्यम से निर्णायक मंडल को प्रभावित करने का प्रयास किया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों में अथर्व, अभिराज, आराध्या श्रीवास्तव और कृष्णा सिंह शामिल रहे। द्वितीय स्थान पर लक्षु, अनंत गुप्ता, कृतिका माहौर, माधव यादव और सफिया खान ने अपनी जगह बनाई। वहीं हिमांश सारस्वत, मान्या चौहान, वर्तिका प्रकाश और वीर ने अपने-अपने वर्गों में चतुर्थ स्थान हासिल किया। बच्चों की उपलब्धियों पर उनके अभिभावकों और विद्यालय परिवार में उत्साह देखने को मिला।
प्रतियोगिता में महानगर महामंत्री ओमस्वरूप गर्ग, देवेन्द्र थापक, ऋतुराज दुबे और उमा सोलंकी ने निर्णायक की भूमिका निभाई। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की वेशभूषा, प्रस्तुति, भाव-भंगिमा और कृष्ण स्वरूप को ध्यान में रखते हुए बच्चों का मूल्यांकन किया। नन्हे प्रतिभागियों के लिए मंच पर सहज रहना अपने आप में चुनौती थी, लेकिन अधिकांश बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुति दी। निर्णायकों के सामने अलग-अलग कृष्ण स्वरूपों में बच्चों की विविधता भी देखने को मिली।
विद्यालय के प्रधानाचार्य यतेन्द्र सोलंकी ने सभी अतिथियों, आयोजकों, प्रतिभागियों और अभिभावकों का स्वागत किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण के जीवन और उनके संदेशों का प्रत्येक मानव के जीवन में विशेष महत्व है। उन्होंने बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने वाले ऐसे आयोजनों को उपयोगी बताया। उनके अनुसार सांस्कृतिक गतिविधियां बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, रचनात्मकता और संस्कार विकसित करने का माध्यम बनती हैं।

रूप सज्जा प्रतियोगिता के साथ कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी विशेष आकर्षण रहा। गौरव, अन्वी श्रीवास्तव, काव्या श्रीवास्तव, नादिया नजरुल, दिव्या, हार्दिक गुप्ता, निखिल, वैष्णवी, शिवन्या यादव, जसवंत सिंह, निशांत यादव, अनुराग तोमर, आदित्य गौतम, भूमि सोलंकी, श्रेया गुप्ता, सौम्या, आस्था चौधरी, यासीन अब्बास, लक्षिता, मानवी शर्मा, नंदिनी अग्रवाल, कामिनी, शैली चौहान, मधु और आराध्या ने विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
इन बच्चों ने कृष्ण-सुदामा संवाद को मंच पर जीवंत रूप दिया। संवाद के माध्यम से मित्रता, स्नेह और मानवीय संबंधों की भावना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। बच्चों की अभिनय शैली और संवाद अदायगी ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। मंच पर प्रस्तुत किए गए प्रसंगों में बाल कृष्ण की चंचलता और सुदामा के साथ उनके आत्मीय संबंध की झलक दिखाई दी। प्रस्तुति के दौरान बच्चों ने अपनी भूमिका के अनुरूप भाव-भंगिमाओं का प्रयोग किया, जिससे संवाद केवल शब्दों तक सीमित न रहकर दृश्य रूप में सामने आया।
माखन चोरी की प्रस्तुति में बाल कृष्ण की नटखट छवि को बच्चों ने अपने अभिनय के माध्यम से उभारा। इस प्रसंग में हास्य और चंचलता का पुट देखने को मिला। बच्चों की गतिविधियों और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को बाल कृष्ण की लीलाओं की याद दिला दी। इसके बाद कृष्ण लीला पर आधारित नृत्य और नृत्य नाटिकाओं ने समारोह को और प्रभावशाली बना दिया। प्रतिभागियों ने संगीत की लय के साथ सामूहिक प्रस्तुतियां देकर मंच पर अपनी तैयारी और अभ्यास का परिचय दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल बच्चों ने पारंपरिक प्रसंगों को आधुनिक मंचीय प्रस्तुति के साथ जोड़ने का प्रयास किया। नृत्य के दौरान कलाकारों की भाव-भंगिमा, तालमेल और मंच पर उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। अभिभावकों और उपस्थित लोगों ने बच्चों की प्रस्तुतियों का उत्साह बढ़ाया। कई प्रस्तुतियों में समूह के रूप में बच्चों ने भाग लिया, जिससे मंच पर सामूहिकता और समन्वय की झलक भी दिखाई दी।
आयोजन में बच्चों की भागीदारी के साथ अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। नन्हे प्रतिभागियों को कृष्ण स्वरूप देने के लिए परिवारों ने पोशाक, आभूषण, मुकुट, मोरपंख और अन्य आवश्यक सामग्री की तैयारी की। बच्चों को मंच तक लाने और उन्हें प्रस्तुति के लिए तैयार करने में अभिभावकों ने सहयोग किया। प्रतियोगिता में 95 प्रतिभागियों की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि बच्चों और परिवारों में भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर विशेष उत्साह बना हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतियोगिता में शामिल बच्चों को उनकी उपलब्धियों और सहभागिता के लिए सम्मानित किया गया। विद्यालय प्रशासिका राजकुमारी ने सभी बच्चों को उपहार और प्रमाण पत्र प्रदान किए। सम्मान प्राप्त करते समय बच्चों में उत्साह दिखाई दिया। पुरस्कार और प्रमाण पत्र ने प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाया। प्रतियोगिता में स्थान हासिल करने वाले बच्चों के साथ अन्य प्रतिभागियों को भी आयोजन से सीखने और आगे बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिला।
समारोह का संचालन दिव्या शर्मा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया और प्रतिभागियों तथा अतिथियों के बीच समन्वय बनाए रखा। कार्यक्रम संयोजिका ममता चौधरी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, अभिभावकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।
व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में नेहा अग्रवाल, मिनी यादव, मुस्कान, गणेश, प्रणव, लक्ष्य शर्मा और नकुल ने सहयोग किया। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों के मंच पर आने, कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित करने और उपस्थित लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखने में सहयोगियों की भूमिका रही। विद्यालय परिवार और आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास से प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम व्यवस्थित रूप से संपन्न हुए।
समारोह में बालकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास दिखाई दिया। नवजात से लेकर नौ वर्ष तक के बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष रूप से आकर्षक बनाया। अलग-अलग आयु वर्गों के प्रतिभागियों ने अपनी क्षमता के अनुसार कृष्ण के स्वरूप को प्रस्तुत किया। वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों को मंचीय रूप देकर बच्चों की अभिनय और नृत्य प्रतिभा को सामने रखा।
आयोजकों का उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक कथाओं से परिचित कराने के साथ उनकी प्रतिभा को मंच देना रहा। प्रतियोगिता में रूप सज्जा के जरिए बच्चों की रचनात्मकता सामने आई, जबकि कृष्ण-सुदामा संवाद, माखन चोरी और कृष्ण लीला की प्रस्तुतियों ने अभिनय एवं नृत्य कौशल को अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम में अभिभावकों की सहभागिता ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाया।
प्रताप पब्लिक स्कूल, शिवाकुंज, सिकंदरा में आयोजित यह समारोह बच्चों की प्रतिभा, भारतीय संस्कृति और कृष्ण भक्ति के रंगों से सराबोर रहा। 95 प्रतिभागियों की भागीदारी, चार आयु वर्गों में हुई प्रतियोगिता, विजेता बच्चों का सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने अपनी कला का प्रदर्शन करने के साथ कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। संस्कार भारती जिला आगरा के इस आयोजन ने बच्चों को संस्कृति से जोड़ने और उनकी प्रतिभा को पहचान देने का मंच उपलब्ध कराया।
