आगरा। श्रीकृष्ण बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने मनोहारी लीलाओं से बांधा समां, कृतिका, हेमराज, मेहर और भाव्यांश ने हासिल किया प्रथम स्थान
मऊ रोड, खंदारी स्थित पैट्रियोटिक स्कूल में संस्कार भारती जिला आगरा के तत्वावधान में आयोजित श्रीकृष्ण बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों में सजकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बाल कलाकारों ने श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का मनोहारी मंचन कर उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया। प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में कृतिका, हेमराज, मेहर और भाव्यांश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। अथर्व तिवारी, देविका, सिद्धार्थ और नताशा द्वितीय तथा गौरांश, निशु, सूर्या और नंदिनी तृतीय स्थान पर रहे।

मऊ रोड, खंदारी स्थित पैट्रियोटिक स्कूल में आयोजित इस प्रतियोगिता में बच्चों का उत्साह देखते ही बना। छोटे-छोटे प्रतिभागी भगवान श्रीकृष्ण के अलग-अलग स्वरूपों में सजकर कार्यक्रम में पहुंचे। आकर्षक वेशभूषा में सजे बच्चों ने मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाई और श्रीकृष्ण से जुड़ी विभिन्न लीलाओं को प्रस्तुति के माध्यम से सामने रखा। बाल कलाकारों की मासूम अदाओं, अभिनय और मंचीय प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। बच्चों ने जिस उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया, उससे आयोजन का वातावरण सांस्कृतिक रंग में रंग गया।
श्रीकृष्ण बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को केवल अपने रूप-सज्जा का प्रदर्शन करने का अवसर नहीं मिला, बल्कि उन्होंने मंच पर अपनी रचनात्मकता और अभिनय क्षमता भी दिखाई। अलग-अलग स्वरूपों में पहुंचे बच्चों ने अपनी भूमिकाओं के अनुरूप प्रस्तुति दी। श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं के मंचन के दौरान नन्हे कलाकारों की सक्रियता और आत्मविश्वास देखने लायक रहा। उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर किया और बच्चों के लिए यह आयोजन अपनी प्रतिभा को सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर बना।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य मृत्युंजय भदौरिया ने किया। प्रतियोगिता की शुरुआत के बाद बाल प्रतिभागियों ने क्रमवार अपनी प्रस्तुतियां दीं। आयोजन में संस्कार भारती जिला आगरा के जिला महामंत्री यतेन्द्र सोलंकी ने भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्तव्य, सत्य, कर्म और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। उनके जीवन चरित्र में ऐसे अनेक प्रसंग हैं, जो मनुष्य को परिस्थितियों के बीच अपने कर्तव्य का पालन करने और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल बच्चों का उत्साहवर्धन भी किया और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं उपहार प्रदान किए।

प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गों के परिणाम घोषित किए गए। कृतिका, हेमराज, मेहर एवं भाव्यांश ने अपने-अपने वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अथर्व तिवारी, देविका, सिद्धार्थ एवं नताशा ने द्वितीय स्थान हासिल किया, जबकि गौरांश, निशु, सूर्या एवं नंदिनी तृतीय स्थान पर रहे। विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और उपहार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों के साथ अन्य प्रतिभागियों का भी उत्साह बढ़ाया गया। अभिभावकों के लिए भी बच्चों को मंच पर प्रस्तुति देते देखना खास अनुभव रहा।
कार्यक्रम के दौरान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में सजे नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से आयोजन को आकर्षक बनाया। बच्चों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं को मंच पर प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुतियों में बाल कृष्ण की छवि, मासूमियत और नटखट अंदाज की झलक दिखाई दी। मंच पर बच्चों की मौजूदगी और उनके अभिनय ने कार्यक्रम में शामिल लोगों को आकर्षित किया। प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक प्रसंगों से जुड़े विषय को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम की संयोजक नीतू सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया। आयोजन में बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावकों की भी सहभागिता रही। उन्होंने प्रतियोगिता में बच्चों की भागीदारी को देखा और उनका उत्साह बढ़ाया। नीतू सिंह ने आयोजन से जुड़े लोगों के बीच समन्वय बनाते हुए कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।
प्रतियोगिता के निर्णायक रक्षपाल सिंह परमार एवं पिंकी रहे। उन्होंने प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। बच्चों की प्रस्तुतियों के आधार पर परिणाम तय किए गए और इसके बाद विभिन्न वर्गों में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों के नाम घोषित किए गए। निर्णायक मंडल की भूमिका प्रतियोगिता के परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण रही।
कार्यक्रम समन्वयक रश्मि यादव ने आयोजन के समापन पर सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अतिथियों, प्रतिभागियों और अभिभावकों के साथ आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति धन्यवाद जताया। आयोजन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रतियोगिता को सफल बनाने में योगदान दिया।
प्रतियोगिता को सफल बनाने में पूजा, सपना, निखिल, मनोज, नंदिनी, गिरिराज, प्रीति, अर्जुन यादव, लोकेंद्र यादव एवं कीर्ति का विशेष सहयोग रहा। आयोजन की तैयारियों और कार्यक्रम के संचालन में सहयोगी टीम की भूमिका रही। सभी के सामूहिक प्रयास से पैट्रियोटिक स्कूल में श्रीकृष्ण बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता आयोजित की गई।
संस्कार भारती जिला आगरा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों की प्रतिभा को मंच मिला। नन्हे कलाकारों ने श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों में सजकर अपनी प्रस्तुति दी और उनकी लीलाओं का मंचन किया। प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में स्थान हासिल करने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र और उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया। इससे प्रतिभागियों में उत्साह बढ़ा और उन्हें अपनी प्रस्तुति के लिए सम्मान मिला।
आयोजन के दौरान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र और उससे मिलने वाली प्रेरणाओं पर भी चर्चा हुई। यतेन्द्र सोलंकी ने धर्म, कर्तव्य, सत्य, कर्म और लोककल्याण को श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रमुख मूल्यों के रूप में सामने रखा। बच्चों की प्रस्तुतियों और इस संदेश ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक तथा प्रेरणादायक स्वरूप दिया।
मऊ रोड, खंदारी स्थित पैट्रियोटिक स्कूल में हुए इस आयोजन में प्रधानाचार्य मृत्युंजय भदौरिया ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नीतू सिंह ने संयोजन की जिम्मेदारी संभाली। रक्षपाल सिंह परमार और पिंकी निर्णायक रहे, जबकि रश्मि यादव ने कार्यक्रम का समन्वय किया। पूजा, सपना, निखिल, मनोज, नंदिनी, गिरिराज, प्रीति, अर्जुन यादव, लोकेंद्र यादव एवं कीर्ति ने आयोजन को सफल बनाने में विशेष सहयोग दिया।
प्रतियोगिता के परिणाम में कृतिका, हेमराज, मेहर और भाव्यांश प्रथम, अथर्व तिवारी, देविका, सिद्धार्थ और नताशा द्वितीय तथा गौरांश, निशु, सूर्या और नंदिनी तृतीय स्थान पर रहे। बच्चों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बनाया और मंच पर कृष्ण के अलग-अलग स्वरूपों के जरिए द्वापर युग की छटा देखने को मिली।
