आईजीआरएस रैंकिंग और संतुष्टि फीडबैक की रोज समीक्षा के निर्देश, खाद्य सुरक्षा विभाग के 88 और कृषि विभाग के 85 प्रतिशत संतुष्ट फीडबैक की सराहना
आगरा। आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही अब अधिकारियों पर भारी पड़ेगी। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई आईजीआरएस समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी विभागाध्यक्ष प्रतिदिन शिकायतों की समीक्षा करें और शिकायतकर्ताओं से शत-प्रतिशत फोन पर संपर्क कर वास्तविक स्थिति की जानकारी लें। जरूरत पड़ने पर फील्ड विजिट कर मौके पर शिकायतकर्ता से संपर्क करते हुए समस्या का वास्तविक समाधान कराया जाए। शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही से यदि जिले की आईजीआरएस रैंकिंग या संतुष्टि प्रतिशत प्रभावित हुआ तो संबंधित अधिकारी और विभाग की जिम्मेदारी तय की जाएगी। बैठक में खाद्य सुरक्षा विभाग में 88 प्रतिशत और कृषि विभाग में लगभग 85 प्रतिशत संतुष्ट फीडबैक मिलने पर जिलाधिकारी ने दोनों विभागों के काम की सराहना की, जबकि विद्युत और समाज कल्याण विभाग में अधिक असंतुष्ट फीडबैक मिलने पर नाराजगी जताते हुए सुधार के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने टॉप-10 गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने वाले विभागों के साथ टॉप-10 बॉटम विभागों की अपलोड की गई आख्या तलब की। साथ ही पिछले महीने की रैंकिंग, संतुष्टि प्रतिशत, शिकायतकर्ताओं से फोन पर बातचीत किए जाने का प्रतिशत और मुख्यमंत्री कार्यालय से ‘सी’ श्रेणी प्राप्त संदर्भों का भी विवरण मांगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया में जहां भी कमी है, वहां कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार किया जाए।
बैठक में विभिन्न असंतुष्टि वाले प्रकरणों में अधिकारियों की ओर से पोर्टल पर अपलोड की गई आख्या की भी जांच की गई। कई मामलों में शिकायतकर्ता की ओर से असंतुष्टि दर्ज होने के बावजूद निस्तारण आख्या में स्थिति स्पष्ट नहीं थी। ऐसी आख्या में असंतुष्टि पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायत के निस्तारण की आख्या केवल औपचारिकता के लिए न लगाई जाए, बल्कि उसमें समस्या के समाधान की वास्तविक और स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।
विद्युत विभाग, समाज कल्याण, सहकारिता, जिला पंचायत, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, जिला युवा कल्याण विभाग तथा माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग सहित कई विभागों की आख्या में अस्पष्टता और गुणवत्ता की कमी पाई गई। इस पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि भविष्य में शिकायतों की आख्या तैयार करते समय संबंधित विभागाध्यक्ष स्वयं उसे पढ़ें और उसके बाद ही हस्ताक्षर कर अपलोड कराएं। उन्होंने कहा कि आख्या में शिकायत के निस्तारण की पूरी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, जिससे शिकायतकर्ता के साथ-साथ उच्च स्तर पर भी यह साफ रहे कि समस्या का समाधान किस तरह किया गया है।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि आईजीआरएस पोर्टल पर हस्तलिखित आख्या अपलोड नहीं की जाएगी। संबंधित पोर्टल पर आख्या स्पष्ट रूप से टाइप कराने के बाद ही अपलोड की जाए। उनका कहना था कि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। केवल शिकायत बंद कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि और समस्या के वास्तविक समाधान को प्राथमिकता देनी होगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि आईजीआरएस प्रकरणों की शासन स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है। ऐसे में सभी विभागाध्यक्ष अपने स्तर पर प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा और प्रभावी अनुश्रवण करें। उन्होंने निर्देश दिए कि विभागाध्यक्ष प्रतिदिन आईजीआरएस प्रकरणों की स्थिति देखें, शिकायतकर्ताओं से कॉलिंग कर उनकी समस्या की जानकारी लें और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने शिकायतकर्ताओं से शत-प्रतिशत दूरभाष पर संपर्क करने के साथ जरूरत के अनुसार मौके पर जाकर फील्ड विजिट करने के निर्देश भी दिए, ताकि शिकायतों के निस्तारण में किसी तरह की गलत या अधूरी रिपोर्टिंग न हो।
बैठक में चीफ इंजीनियर डीवीवीएनएल के अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि समीक्षा बैठकों में संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी है, क्योंकि शिकायतों की स्थिति और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर सीधे जवाब लिया जाता है।
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी अधिकारी या विभाग की लापरवाही के कारण जिले की आईजीआरएस रैंकिंग अथवा संतुष्टि प्रतिशत प्रभावित होता है तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। आगामी समीक्षा बैठक में सभी अधिकारियों को अपने-अपने विभाग में असंतुष्ट फीडबैक के कारणों और उसमें सुधार के लिए की गई कार्रवाई का स्पष्ट तथा परिणाम आधारित विवरण प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बाद भी यदि किसी प्रकरण का सही और वास्तविक रूप से निस्तारण नहीं किया जाता है तो संबंधित के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विद्युत विभाग और समाज कल्याण विभाग में सर्वाधिक शिकायतों में असंतुष्ट फीडबैक मिलने पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और दोनों विभागों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार के निर्देश दिए। इसके विपरीत खाद्य सुरक्षा विभाग में 88 प्रतिशत तथा कृषि विभाग में लगभग 85 प्रतिशत संतुष्टि फीडबैक मिलने पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के कार्य की सराहना की। उन्होंने अन्य विभागों से भी इन विभागों की तरह शिकायतों के समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संदीप वर्मा, प्रभारी सीएमओ अमित रावत, अपर नगरायुक्त शिशिर कुमार, डीडीओ भावना यादव, डीआईओएस रविन्द्रपाल, डीसी मनरेगा रामायन सिंह यादव, डीपीआरओ मनीष कुमार, एआरटीओ आलोक अग्रवाल, डीडी एग्रीकल्चर मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई नीरज कुमार समेत जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी, उप जिला मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और बीडीओ मौजूद रहे। बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि आईजीआरएस शिकायतों का निस्तारण केवल आंकड़े सुधारने तक सीमित न रहे, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान करना ही प्राथमिकता हो।
