आगरा। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतियोगिता में 70 से अधिक विद्यार्थियों ने संस्कृत गीत और सामान्य ज्ञान में अपनी प्रतिभा दिखाई। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ में आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में उमंग सत्संगी ने संस्कृत गीत और माही सत्संगी ने सामान्य ज्ञान में पहला स्थान हासिल किया।

संस्कृत की प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का मंच देने के उद्देश्य से मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ में संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतियोगिता आयोजित की गई। आयोजन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ और भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से किया गया। इसमें आगरा जनपद के संस्कृत विद्यालयों के अलावा अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।

प्रतियोगिता में 70 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। संस्कृत गीत और संस्कृत सामान्य ज्ञान की प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी तैयारी, ज्ञान और रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ ऐसी प्रतिभाओं को सामने लाना रहा, जो भाषा के अध्ययन और उसके संरक्षण में आगे भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रतियोगिता सुबह 10 बजे शुरू हुई और दोपहर दो बजे तक चली। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने की। उन्होंने संस्कृत के प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से आयोजित इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि संस्थान की ओर से इस प्रकार का आयोजन प्रत्येक वर्ष महाकुंभ के रूप में किया जाता है। उनके अनुसार, जिस प्रकार समुद्र मंथन के बाद अमृत की प्राप्ति हुई थी, उसी प्रकार इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से संस्कृत की प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें सामने लाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने और भाषा के प्रति निरंतर रुचि बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि प्रो. पूनम सिंह, प्राचार्य बैकुंठी कन्या महाविद्यालय, ने संस्कृत के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल पंडितों तक सीमित भाषा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण भाषा है। उन्होंने इसे गणितीय और तार्किक भाषा बताते हुए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इसके लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति, भारतीय परंपरा और संस्कृतनिष्ठ पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने की जरूरत है। उनके अनुसार, भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को भाषा सीखने के साथ उसके साहित्य, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को समझने के लिए भी प्रेरित किया।
संस्कृत गीत में उमंग अव्वल
संस्कृत गीत प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति से निर्णायकों और उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उमंग सत्संगी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सूरत गुप्ता दूसरे स्थान पर रहे, जबकि प्रेम विद्यालय के निहार सहाय ने तीसरा स्थान हासिल किया।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने संस्कृत गीतों के माध्यम से अपनी गायन क्षमता के साथ भाषा पर पकड़ का प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों के मूल्यांकन की जिम्मेदारी डॉ. निशीथ गौड़ और डॉ. मनोज कुमार ने संभाली। दोनों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया।
सामान्य ज्ञान में माही ने मारी बाजी
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में भी विद्यार्थियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। माही सत्संगी ने प्रथम स्थान हासिल किया। चंचल ने दूसरा और गौरी मिश्रा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों से संस्कृत भाषा, साहित्य और उससे जुड़े सामान्य ज्ञान पर आधारित प्रश्न पूछे गए। प्रतिभागियों ने अपनी तैयारी और विषय की समझ के आधार पर सवालों के जवाब दिए। मूल्यांकन की जिम्मेदारी डॉ. वंदना मिश्रा और डॉ. डॉली शर्मा ने निभाई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वर्षा रानी ने किया। उन्होंने प्रतियोगिता की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया और प्रतिभागियों तथा अतिथियों के बीच समन्वय बनाए रखा। जिला संयोजक हितेश कुमार ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले अतिथियों, निर्णायकों, प्रतिभागियों और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
आयोजन में पल्लवी आर्य, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. रमा, कंचन, प्रीति, उपेन्द्र पचौरी, भारती और निधि सहित अनेक शिक्षक एवं गणमान्यजन मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया और प्रतियोगिता के आयोजन को सहयोग मिला।
प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल प्रतिस्पर्धा का अवसर ही नहीं मिला, बल्कि उन्हें अपनी भाषा संबंधी प्रतिभा और रचनात्मक क्षमता को सामने रखने का मंच भी मिला। संस्कृत गीत में प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों ने भाषा के साथ अपनी कलात्मक क्षमता दिखाई, जबकि सामान्य ज्ञान में प्रतिभागियों ने विषय पर अपनी पकड़ का प्रदर्शन किया।
आयोजन से विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति उत्साह और रचनात्मक अभिरुचि बढ़ाने का प्रयास किया गया। साथ ही उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषा से जोड़ने का संदेश भी दिया गया। विद्यालयों से आए विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव अपनी प्रतिभा को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ दूसरे प्रतिभागियों से सीखने का अवसर भी बना।
आयोजकों के अनुसार, इस तरह की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य संस्कृत को विद्यार्थियों के बीच रुचिकर तरीके से पहुंचाना और नई पीढ़ी में भाषा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। प्रतिभा खोज जैसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी क्षमता पहचानने और भविष्य में संस्कृत के अध्ययन से जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
इस आयोजन ने यह भी दिखाया कि संस्कृत के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बनी हुई है और उचित मंच मिलने पर वे अपनी प्रतिभा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों की भागीदारी ने संस्कृत शिक्षा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास को मजबूती दी।
