आगरा। सिंधी समाज के अमर शहीद संत साँई कँवर राम के जीवन, मानवता और धार्मिक सद्भाव के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से उनके जीवन पर आधारित लघु फिल्म बनाई जा रही है। रविवार को जय झूलेलाल मंदिर में फिल्म का पोस्टर जारी किया गया और फिल्म के दो भक्ति भजनों का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम में समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और कलाकारों ने इसे समाज में प्रेम, सेवा और भाईचारे का संदेश फैलाने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया। फिल्म की शूटिंग अगस्त के पहले सप्ताह में आगरा और आसपास के क्षेत्रों में होगी, जिसमें स्थानीय कलाकारों को भी प्रमुख अवसर मिलेगा।

मानवता, सेवा, प्रेम और धार्मिक सद्भाव की मिसाल माने जाने वाले सिंधी समाज के अमर शहीद संत साँई कँवर राम के प्रेरणादायी जीवन को अब लघु फिल्म के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा। श्रद्धेय राजकुमार सामा विचार मंच के तत्वावधान में आरए मूवीज द्वारा संत साँई कँवर राम के जीवन पर आधारित फिल्म का निर्माण किया जा रहा है। रविवार शाम जयपुर हाउस स्थित जय झूलेलाल मंदिर में फिल्म का पोस्टर जारी किया गया। इस अवसर पर फिल्म के दो भक्ति भजनों का भी लोकार्पण हुआ, जिन्होंने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में बताया गया कि संत साँई कँवर राम ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा, भाईचारे और धार्मिक सौहार्द के लिए समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि भूखे को भोजन कराना, जरूरतमंद की सहायता करना और समाज में प्रेम तथा शिक्षा का प्रसार करना ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने पूरी जिंदगी इंसानियत का संदेश दिया और सिंध की साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी शहादत के बाद भी उनके विचार और आदर्श समाज के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
समारोह में फिल्म का पोस्टर जारी करने के साथ दो भक्ति भजन भी प्रस्तुत किए गए। पहला भजन, “युगों युगों में आता है कोई संत ऐसा संसार में, लगे प्रभु स्वयं धरा विराजे मानव के अवतार में…” और दूसरा भजन, “कोसा कोहर लेकर निकला देखो, भाग्य खुला साँई कँवर राम का…” उपस्थित लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहे। दोनों रचनाओं को संजय दुबे और सूरज तिवारी ने लिखा है। भजनों की प्रस्तुति के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रोता संत साँई कँवर राम के जीवन एवं संदेश से भावनात्मक रूप से जुड़ते नजर आए।
कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह और सोमनाथ धाम शाहगंज के गुरु डॉ. पीर शंकर नाथ योगी ने भगवान झूलेलाल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। उन्होंने कहा कि संत साँई कँवर राम का जीवन समाज को सेवा, सद्भाव और प्रेम का संदेश देता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फिल्म नई पीढ़ी को उनके जीवन, संघर्ष और मानवीय मूल्यों से परिचित कराएगी तथा समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देगी।
फिल्म निर्माता रंजीत सामा और विजय सामा ने बताया कि फिल्म की शूटिंग अगस्त के पहले सप्ताह में आगरा और आसपास के क्षेत्रों में शुरू होगी। उन्होंने कहा कि फिल्म का उद्देश्य केवल संत साँई कँवर राम के जीवन का चित्रण करना नहीं, बल्कि उनके विचारों और संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से फिल्म में स्थानीय कलाकारों को भी प्रमुखता दी जा रही है, जिससे आगरा की प्रतिभाओं को बड़ा मंच मिल सके।
फिल्म के विभिन्न किरदारों में रंगकर्मी अनिल जैन, जितेश आसिवाल, रंजीव कोचर, मुकेश नेचुरल, रवि परिहार, अभिवादन, जय सिंह, वानी, शकील और मनोज सिंह लंकेश सहित कई स्थानीय कलाकार अभिनय करेंगे। निर्माताओं का कहना है कि इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और क्षेत्रीय कला को भी नई पहचान मिलेगी।
फिल्म का लेखन और निर्देशन सूरज तिवारी कर रहे हैं। उन्होंने संजय दुबे के साथ मिलकर फिल्म के गीत और भजनों की भी रचना की है। फिल्म की मूल कहानी का विचार धर्मपाल कश्यप ‘बाबू भाई’ ने तैयार किया है। टीम का कहना है कि फिल्म के माध्यम से संत साँई कँवर राम के जीवन की प्रमुख घटनाओं, उनके सामाजिक कार्यों और मानवता के संदेश को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।
समारोह में फिल्म के सह-निर्माता नारायण दास लालवानी और कमल मतलानी सहित जयरामदास, गिरधारी लाल भगत्यानी, प्रमोद वर्मा, शोभाराम पुरुषनानी, पार्षद रेनू गुप्ता, रूबी सहगल, नरेंद्र पुरुषनानी, हरीश बंजानी, खेमचंद बंजानी, शंभू नाथ चौबे, भगवान अवतानी, सुधीर भोजवानी, श्याम भोजवानी, प्रमोद महाजन, घनश्याम लालवानी, रोहित कत्याल, कुसुम महाजन, दीपा लालवानी, जेपी धर्मानी, सत्येंद्र तिवारी, राजेंद्र बत्रा, डॉ. महेश धाकड़, विनीत बवानिया, तीरथ दास भावनानी, राहत जहाँ खानम और राहुल गुप्ता सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी, कलाकार और श्रद्धालु मौजूद रहे।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि संत साँई कँवर राम का जीवन केवल सिंधी समाज की धरोहर नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा है। उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके जीवनकाल में था। आयोजकों ने विश्वास जताया कि यह लघु फिल्म समाज में इंसानियत, प्रेम, सेवा और धार्मिक सद्भाव का संदेश नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

