आगरा। सिकंदरा क्षेत्र में वन्यजीवों के साथ हुई दो अलग-अलग घटनाओं ने शहरीकरण और कचरा प्रबंधन की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। एक ओर प्लास्टिक की बोतल और फेंके गए टेलीफोन के तार में फंसकर आठ फुट लंबा अजगर जिंदगी के लिए संघर्ष करता मिला, वहीं दूसरी ओर एक इंडियन वुल्फ स्नेक वॉशिंग मशीन के भीतर पहुंच गया। वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने दोनों का सुरक्षित रेस्क्यू कर यह संदेश दिया कि इंसानी लापरवाही अब वन्यजीवों की जान पर भारी पड़ रही है।

सिकंदरा क्षेत्र में वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने दो अलग-अलग रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। दोनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, प्राकृतिक आवासों में मानवीय हस्तक्षेप और खुले में फेंके जा रहे कचरे का असर अब वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एक रेस्क्यू में आठ फुट लंबे इंडियन रॉक पायथन (अजगर) को प्लास्टिक और टेलीफोन के तार के जाल से मुक्त कराया गया, जबकि दूसरे अभियान में वॉशिंग मशीन के भीतर फंसे इंडियन वुल्फ स्नेक को सुरक्षित बाहर निकालकर जंगल में छोड़ दिया गया।

पहली घटना में सूचना मिली कि एक विशालकाय अजगर प्लास्टिक की बोतल और लापरवाही से फेंके गए टेलीफोन के तार में बुरी तरह उलझ गया है। तार उसके शरीर पर कसता जा रहा था और हर बार बाहर निकलने की कोशिश के साथ उसकी स्थिति और गंभीर होती जा रही थी। घायल अजगर मुश्किल से हिल-डुल पा रहा था तथा उसकी सांस लेने में भी परेशानी होने लगी थी। सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान चलाकर अजगर को सुरक्षित बाहर निकाला।

रेस्क्यू के बाद अजगर को तत्काल आगरा भालू संरक्षण केंद्र ले जाया गया, जहां पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका विस्तृत परीक्षण किया। चिकित्सकों ने सर्जरी के माध्यम से उसके शरीर में धंसे टेलीफोन के तार को निकाला और प्लास्टिक की बोतल से पूरी तरह मुक्त कराया। उपचार के दौरान रेडियोग्राफिक जांच भी कराई गई, जिससे यह पुष्टि हुई कि अजगर की हड्डियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि उसके शरीर पर गहरे घाव मिले हैं, जिनका उपचार लगातार किया जा रहा है। फिलहाल अजगर विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में है और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।

दूसरी घटना भी सिकंदरा क्षेत्र की ही एक हाउसिंग कॉलोनी से सामने आई। यहां रहने वाले लोगों ने अपनी वॉशिंग मशीन के भीतर एक सांप को देखा, जिसके बाद घर में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को समझते हुए निवासियों ने बिना किसी जोखिम के तुरंत वाइल्डलाइफ़ एसओएस की हेल्पलाइन (+91 9917109666) पर सूचना दी। रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और सावधानी से वॉशिंग मशीन को खोलकर इंडियन वुल्फ स्नेक को सुरक्षित बाहर निकाला। जांच में सांप पूरी तरह स्वस्थ मिला, जिसके बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इंडियन रॉक पायथन (पायथन मोलुरस) देश की महत्वपूर्ण संरक्षित प्रजातियों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में इसे ‘नियर थ्रेटन्ड’ यानी संकट के करीब श्रेणी में रखा गया है। वहीं भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। इस श्रेणी में शामिल वन्यजीवों का शिकार, पकड़ना या उन्हें नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध माना जाता है।
डीएफओ एवं नेशनल चंबल सैंक्चुअरी प्रोजेक्ट के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट राजेश कुमार ने कहा कि जब प्राकृतिक क्षेत्रों के आसपास कचरा जमा होता है तो उसका सबसे बड़ा नुकसान वन्यजीवों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गैर-जिम्मेदाराना तरीके से फेंके गए प्लास्टिक और अन्य कचरे की वजह से ही यह अजगर जानलेवा स्थिति में फंस गया था। वन विभाग के सहयोग से वाइल्डलाइफ़ एसओएस की त्वरित कार्रवाई के कारण उसकी जान बचाई जा सकी, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने का स्थायी समाधान केवल कचरे का वैज्ञानिक और जिम्मेदार निस्तारण ही है।

वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि इंसानों की लापरवाही की कीमत अब जंगली जानवरों को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आवासों के आसपास फेंकी गई प्लास्टिक की बोतल, तार या अन्य कचरा वन्यजीवों के लिए जानलेवा जाल बन जाता है। उनके अनुसार वन्यजीव संरक्षण की शुरुआत छोटे लेकिन जिम्मेदार कदमों से होती है, जिनमें कचरे का उचित निपटान और साझा स्थानों को खतरनाक अपशिष्ट से मुक्त रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि प्रत्येक रेस्क्यू यह याद दिलाता है कि वन्यजीव अब उन इलाकों में भी रहने को मजबूर हो रहे हैं, जहां तेजी से इंसानी गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों और प्राकृतिक आवासों के आसपास फेंका गया कचरा केवल पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि अनेक वन्यजीवों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन जाता है। इसलिए समाज को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति अधिक जिम्मेदार होने की आवश्यकता है।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर बैजू राज एम.वी. ने कहा कि सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और चूहों की आबादी को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित कर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी घर, कॉलोनी या सार्वजनिक स्थान पर सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार तरीका है, जिससे इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. एस. इलयाराजा ने बताया कि जब अजगर को उपचार के लिए लाया गया तो टेलीफोन का तार उसकी खाल में गहराई तक धंस चुका था और उसे सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। चिकित्सकीय टीम की पहली प्राथमिकता तार को हटाना, घावों की सफाई करना और संक्रमण को रोकना था। उन्होंने बताया कि रेडियोग्राफिक जांच में हड्डियों को नुकसान नहीं मिला, जो राहत की बात रही, लेकिन शरीर पर मौजूद गहरे घावों को पूरी तरह भरने में समय लगेगा। इसलिए अजगर को पूरी तरह स्वस्थ होने तक विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाएगा और उसके बाद ही सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा जाएगा।
