आगरा। आगरा मंडल के धौलपुर-हेतरामपुर रेलखंड पर शनिवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। इंटरसिटी एक्सप्रेस में चेन पुलिंग होने के बाद कुछ यात्री ट्रेन से उतरकर ट्रैक पार करने लगे। इसी दौरान दूसरी लाइन से गुजर रही पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आने से तीन महिलाओं समेत चार यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा और राहत-बचाव कार्य के लिए रेलवे की टीमें मौके पर पहुंचीं।

आगरा रेल मंडल के धौलपुर-हेतरामपुर रेलखंड पर शनिवार शाम हुए दर्दनाक रेल हादसे ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। खजुराहो से आगरा आ रही ट्रेन संख्या 19665 डाउन इंटरसिटी एक्सप्रेस में अलार्म चेन पुलिंग होने के बाद कुछ यात्री ट्रेन से नीचे उतर गए। कई यात्री रेलवे ट्रैक पार करने लगे। इसी दौरान दूसरी लाइन से तेज रफ्तार में गुजर रही ट्रेन संख्या 20424 पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आने से चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसा शाम करीब 4:33 बजे हेतरामपुर और धौलपुर स्टेशन के बीच किलोमीटर संख्या 1279/27 पर हुआ। आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम के अनुसार इंटरसिटी एक्सप्रेस एसीपी यानी अलार्म चेन पुलिंग के कारण बीच ट्रैक पर रुक गई थी। ट्रेन रुकते ही कुछ यात्री नीचे उतर आए और अप लाइन की ओर बढ़ने लगे। उसी समय फिरोजपुर कैंट, पंजाब से सिवनी, मध्य प्रदेश जा रही पातालकोट एक्सप्रेस वहां से गुजर रही थी। यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और चार लोग ट्रेन की चपेट में आ गए।

हादसे में जान गंवाने वालों में अफरीन पत्नी नदीम खान निवासी 165 पुलिया, भोगीपुरा, थाना लोहामंडी, आगरा शामिल हैं। उनके साथ मौजूद आठ वर्षीय बच्ची अजहर की भी हादसे में मौत हो गई। इसके अलावा शंकुतला पत्नी मुरारी सिंह परमार निवासी गांव सुचेहरा, थाना इरादतनगर, आगरा तथा बिरमा देवी पत्नी गिरधारी गिरी निवासी महाजन, जिला भरतपुर की भी मौके पर मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इंटरसिटी एक्सप्रेस रुकने के बाद कई यात्री कोचों से नीचे उतर आए थे। कुछ लोग ट्रैक पार कर दूसरी ओर जाने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच अचानक पातालकोट एक्सप्रेस आ गई। ट्रेन की रफ्तार तेज होने के कारण किसी को संभलने या हटने का मौका नहीं मिला। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। रेलवे ने तुरंत अप, डाउन और तीसरी लाइन की ओएचई बंद कर दी ताकि राहत कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। आगरा और झांसी से एआरएमवी यानी एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल वैन को मौके के लिए रवाना किया गया। रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी और स्थानीय पुलिस की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं। शवों को ट्रैक से हटाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
रेलवे अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में रेलवे की प्रत्यक्ष लापरवाही से इनकार किया है। जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम के अनुसार ट्रेन को चेन पुलिंग कर रोका गया था और यात्री निर्धारित स्थान के बजाय ट्रैक पार कर रहे थे। इसी वजह से यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि रेलवे यात्रियों से लगातार अपील करता है कि बिना जरूरत ट्रेन से नीचे न उतरें और रेलवे ट्रैक पार न करें।
हादसे के कारण कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। अप लाइन की ट्रेनों को नियंत्रित गति से चलाया गया। ट्रेन संख्या 12716 का भरतपुर आगमन शाम 6:32 बजे दर्ज किया गया। ट्रेन संख्या 16032 आगरा कैंट शाम 6:05 बजे पहुंची। ट्रेन संख्या 12406 का आगरा कैंट आगमन शाम 6:36 बजे हुआ। ट्रेन संख्या 12782 मथुरा जंक्शन से शाम 6:31 बजे रवाना हुई। ट्रेन संख्या 20658 बयाना फाटक से शाम 6:36 बजे चली, जबकि ट्रेन संख्या 12724 भी देरी से रवाना हुई। ट्रेन संख्या 12616 का मथुरा आगमन शाम 6:41 बजे दर्ज किया गया।
डाउन लाइन पर भी ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा। ट्रेन संख्या 12137 मुरैना से शाम 6:38 बजे रवाना हुई। ट्रेन संख्या 11077 भरतपुर से शाम 6:22 बजे चली। हादसे वाली ट्रेन संख्या 19665 इंटरसिटी एक्सप्रेस आगरा कैंट शाम 6:14 बजे पहुंची। ट्रेन संख्या 12049 बयाना फाटक से शाम 6:34 बजे रवाना हुई। ट्रेन संख्या 20172 धौलपुर शाम 5:49 बजे पहुंची। ट्रेन संख्या 12191 मुरैना शाम 6:29 बजे पहुंची, जबकि ट्रेन संख्या 12190 धौलपुर शाम 6:39 बजे पहुंची।
घटना के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। पोस्टमार्टम हाउस और अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ लगी रही। स्थानीय लोगों ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया। रेलवे प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि चेन पुलिंग किन परिस्थितियों में की गई और यात्रियों ने ट्रेन से उतरकर ट्रैक पार करने का फैसला क्यों लिया।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हादसे से सबक लेने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही और जल्दबाजी किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, यह हादसा उसका बड़ा उदाहरण बन गया। रेलवे लगातार यात्रियों को जागरूक करता है कि चलती या रुकी ट्रेन से अनधिकृत तरीके से नीचे उतरना और ट्रैक पार करना बेहद खतरनाक हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद लोग नियमों की अनदेखी कर अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
धौलपुर-हेतरामपुर रेलखंड पर हुए इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। रेलवे अब पूरे मामले की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
