आगरा। आगरा-दिल्ली हाईवे पर रोडवेज बस पलटने के हादसे में घायल यात्रियों को अस्पताल पहुंचने के बाद भी राहत नहीं मिल सकी। घायलों ने आरोप लगाया कि एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में समय पर इलाज, स्ट्रेचर और बेड जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं। सिर से खून बहने के बावजूद एक घायल करीब एक घंटे तक जमीन पर बैठा रहा, जबकि बस परिचालक को भी बिना स्ट्रेचर के पैदल चलकर बेड तक पहुंचना पड़ा। हादसे में घायल यात्रियों की शिकायतों ने इमरजेंसी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगरा-दिल्ली हाईवे पर बुधवार सुबह हुए रोडवेज बस हादसे के बाद घायल यात्रियों को अस्पताल में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़क दुर्घटना में घायल हुए कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में समय पर उपचार और आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल सकीं। घायलों का कहना है कि हादसे के बाद उन्हें अस्पताल से तत्काल राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वहां पहुंचने पर अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा।
बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे मथुरा से आगरा आ रही उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस का पहिया अचानक निकल गया। इससे बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ते हुए पलट गई। हादसे के समय बस में करीब 12 यात्री सवार थे। दुर्घटना में 10 लोग घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया तथा घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल नौ यात्रियों को एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जबकि कुछ अन्य घायलों को उनके परिजन निजी अस्पतालों में लेकर चले गए।
हादसे में घायल एक यात्री ने बताया कि इमरजेंसी पहुंचने के बाद भी उसे तत्काल उपचार नहीं मिला। सिर में गंभीर चोट लगने और लगातार खून बहने के बावजूद वह करीब एक घंटे तक जमीन पर बैठकर इलाज का इंतजार करता रहा। उसका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने समय पर उसकी ओर ध्यान नहीं दिया। घायल का कहना है कि दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचने पर उम्मीद थी कि तुरंत उपचार मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसी तरह हादसे में घायल अन्य यात्रियों ने भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इमरजेंसी में मरीजों की संख्या अधिक होने के बावजूद पर्याप्त स्ट्रेचर और बेड उपलब्ध नहीं थे। कुछ घायलों को काफी देर तक बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि दुर्घटना में घायल लोगों को प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी, लेकिन मौके पर ऐसा दिखाई नहीं दिया।
बस के परिचालक रूपेंद्र ने भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि घायल होने के बावजूद उन्हें समय पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके चलते उन्हें खुद पैदल चलकर इमरजेंसी वार्ड से बेड तक पहुंचना पड़ा। परिचालक का कहना है कि चोट लगने के कारण चलने-फिरने में परेशानी हो रही थी, फिर भी कोई सहायता नहीं मिली। उनका आरोप है कि यदि समय पर मदद मिल जाती तो अतिरिक्त परेशानी से बचा जा सकता था।
घायलों और उनके परिजनों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाओं को पूरी तरह सतर्क और तैयार रहना चाहिए। लेकिन इस हादसे के बाद सामने आई शिकायतों ने एसएन मेडिकल कॉलेज की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरी ओर, हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे परिजन भी अव्यवस्थाओं से परेशान नजर आए। उनका कहना था कि घायल मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिलने से उनकी चिंता और बढ़ गई। कई लोग अपने स्तर पर व्हीलचेयर और अन्य व्यवस्थाएं तलाशते दिखाई दिए। परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दुर्घटना पीड़ितों के लिए बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है ताकि संकट की घड़ी में मरीजों को तत्काल राहत मिल सके।
गौरतलब है कि बुधवार सुबह हुए इस हादसे में बस का पहिया निकल जाने से वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया था। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि अस्पताल में सामने आई शिकायतों ने राहत और उपचार व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
घायलों के आरोपों के बाद अब इमरजेंसी सेवाओं की कार्यप्रणाली और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि दुर्घटना जैसी आपात परिस्थितियों में मरीजों को त्वरित उपचार, पर्याप्त स्ट्रेचर और बेड उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में घायलों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर व्यवस्थाओं में सुधार किया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े।

