फतेहाबाद। जामुन तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़े आठ वर्षीय मासूम के साथ शनिवार को दर्दनाक हादसा हो गया। संतुलन बिगड़ने से बच्चा ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा, जिससे उसके सिर और शरीर में गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची एंबुलेंस ने बच्चे को प्राथमिक उपचार देने के बाद आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना थाना फतेहाबाद क्षेत्र के ग्राम रिहावली की है। शनिवार को गांव निवासी सुनील का आठ वर्षीय पुत्र दुष्यंत घर के पास लगे जामुन के पेड़ पर फल तोड़ने के लिए चढ़ा था। बताया जा रहा है कि पेड़ पर चढ़ने के दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह काफी ऊंचाई से सीधे जमीन पर आ गिरा। गिरने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके की ओर दौड़ पड़े।
हादसे की सूचना मिलते ही परिजन भी घटनास्थल पर पहुंच गए। बच्चे की गंभीर हालत देखकर परिवार के लोगों में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने तत्काल एंबुलेंस सेवा को सूचना दी और घायल बच्चे को संभालकर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की। कुछ ही देर में एंबुलेंस मौके पर पहुंची और चिकित्साकर्मियों ने बच्चे की स्थिति का प्राथमिक परीक्षण किया।
प्राथमिक उपचार के बाद दुष्यंत को तत्काल बेहतर इलाज के लिए आगरा रेफर कर दिया गया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने बच्चे का उपचार शुरू किया। प्रारंभिक जांच में सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आने की बात सामने आई। फिलहाल बच्चे का इलाज विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटना के बाद पूरे गांव में चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी और बरसात के मौसम में बच्चे अक्सर पेड़ों पर चढ़कर जामुन, आम और अन्य फल तोड़ते हैं। ऐसे में कई बार थोड़ी सी लापरवाही या संतुलन बिगड़ने से गंभीर हादसे हो जाते हैं। ग्रामीणों ने अभिभावकों से छोटे बच्चों पर विशेष नजर रखने और उन्हें बिना निगरानी ऊंचे पेड़ों पर चढ़ने से रोकने की अपील की।
परिजनों ने बताया कि दुष्यंत रोज की तरह घर के पास खेल रहा था। जामुन तोड़ने की इच्छा से वह पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में यह खुशी बड़े हादसे में बदल जाएगी। घटना के बाद परिवार के सभी सदस्य बच्चे के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी कहना है कि छोटे बच्चों में जोखिम का सही आकलन करने की क्षमता कम होती है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को ऊंचे पेड़ों, छतों या अन्य खतरनाक स्थानों पर अकेले न जाने दें। समय पर सतर्कता बरतकर ऐसे हादसों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
फिलहाल दुष्यंत का इलाज आगरा के अस्पताल में जारी है। चिकित्सकों की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है और परिवार उसकी हालत में सुधार की उम्मीद लगाए हुए है। गांव के लोग भी बच्चे के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

