आगरा। आगरा में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जंगलों और प्राकृतिक आवासों में बढ़ते तापमान के कारण वन्यजीव छाया और सुरक्षित स्थानों की तलाश में शहर की आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे हैं। गुरुवार को शहर में एक ही दिन के भीतर तीन अलग-अलग स्थानों से एक रैट स्नेक और दो बंगाल मॉनिटर लिजर्ड (गोह) का रेस्क्यू किया गया, जिससे वन्यजीवों के सामने बढ़ते संकट की तस्वीर सामने आई है।

आगरा में बढ़ती गर्मी और तपते मौसम के बीच वन्यजीव भी प्रभावित हो रहे हैं। तापमान बढ़ने के साथ कई सरीसृप अपने प्राकृतिक आवास छोड़कर ऐसी जगहों पर पहुंच रहे हैं, जहां सामान्य परिस्थितियों में उनका दिखाई देना दुर्लभ होता है। इसी क्रम में वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने एक ही दिन में शहर के अलग-अलग इलाकों से एक इंडियन रैट स्नेक और दो बंगाल मॉनिटर लिजर्ड को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया।
दिन का पहला रेस्क्यू सेंट पीटर्स कॉलेज परिसर में किया गया। कॉलेज स्टाफ ने परिसर में पानी की टंकी के पास एक इंडियन रैट स्नेक को देखा। सांप दिखाई देने के बाद कर्मचारियों ने समझदारी दिखाते हुए उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय वाइल्डलाइफ़ एसओएस की हेल्पलाइन पर सूचना दी। मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक सांप को पकड़ा और उसके स्वास्थ्य की जांच की। पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने पर उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

इसके कुछ समय बाद शहर की एक आवासीय कॉलोनी से दूसरी सूचना मिली। स्थानीय लोगों ने देखा कि एक बंगाल मॉनिटर लिजर्ड तेज गर्मी से बचने के लिए वहां खड़ी एक स्कूटी के अंदर घुस गई है। इस घटना से आसपास के लोगों में उत्सुकता के साथ घबराहट भी फैल गई। कोई भी व्यक्ति स्कूटी के पास जाने का साहस नहीं कर पा रहा था। सूचना मिलने पर वाइल्डलाइफ़ एसओएस की टीम मौके पर पहुंची और स्कूटी के आवश्यक हिस्सों को सावधानीपूर्वक खोलकर मॉनिटर लिजर्ड को सुरक्षित बाहर निकाला। जांच में वह स्वस्थ मिली और बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया गया।
तीसरी घटना जिला एवं सत्र न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश के आवास पर सामने आई। घर के परिसर में स्थित छायादार स्थान पर एक बंगाल मॉनिटर लिजर्ड दिखाई दी थी। परिवार के लोगों ने स्थिति को समझते हुए तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचना दी। टीम ने मौके पर पहुंचकर गोह को सुरक्षित पकड़ा और उसे भी उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों के मौसम में सरीसृप अक्सर ठंडी और छायादार जगहों की तलाश में मानव बस्तियों के आसपास पहुंच जाते हैं। कई बार वे वाहनों, बगीचों, इमारतों, दीवारों और परिसर के शांत कोनों में छिप जाते हैं। ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय सतर्कता बरतनी चाहिए और विशेषज्ञों की सहायता लेनी चाहिए।
इंडियन रैट स्नेक एक गैर-विषैला सांप होता है, जो खेतों और शहरी क्षेत्रों में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं बंगाल मॉनिटर लिजर्ड भी पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा है। दोनों प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं और इनके शिकार या नुकसान पहुंचाने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि मॉनिटर लिजर्ड और रैट स्नेक जैसे जीव पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि लोगों ने घबराकर वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञों को सूचना दी, जिससे तीनों जीव सुरक्षित बचाए जा सके।
कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर बैजूराज एम.वी. ने बताया कि बढ़ते तापमान के कारण सरीसृपों का व्यवहार बदल रहा है। गर्मी से राहत पाने के लिए वे अक्सर गाड़ियों, कंपाउंड की दीवारों, संस्थानों और घरों के छायादार हिस्सों में पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं बताती हैं कि जलवायु परिस्थितियों का असर वन्यजीवों पर भी पड़ रहा है और ऐसे समय में लोगों की जागरूकता उनके जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
एक ही दिन में हुए ये तीन रेस्क्यू इस बात का संकेत हैं कि भीषण गर्मी का असर अब जंगलों तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आवासों में बढ़ती चुनौतियों के कारण वन्यजीव शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखने की दिशा में गंभीर प्रयास किए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।
