आगरा। जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में जिला सलाहकार समिति की पीसीपीएनडीटी एक्ट-1994 की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें कन्या भ्रूण हत्या रोकने, घटते लिंगानुपात में सुधार, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी और अस्पतालों में कानून के सख्ती से पालन पर जोर दिया गया। बैठक में नए पंजीकरण, नवीनीकरण, डॉक्टर जोड़ने-हटाने, पता परिवर्तन और नई अल्ट्रासाउंड मशीनों से जुड़े कुल कई आवेदनों पर विचार करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।

बैठक में गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने तथा बालिकाओं के जीवन के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बैठक के दौरान सभी अस्पताल संचालकों और संबंधित संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पीसीपीएनडीटी एक्ट का पूरी सख्ती के साथ पालन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम-1994 केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण कानून है, जिसका मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना और बालिकाओं के जीवन के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए रिकॉर्ड का सही और नियमित रखरखाव बेहद आवश्यक है तथा यदि इसमें किसी प्रकार की कमी या लापरवाही पाई जाती है तो वह दंडनीय होगी।
उन्होंने कहा कि यह कानून विशेष रूप से कन्या भ्रूण हत्या और लगातार घटते लिंगानुपात को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत गर्भधारण से पहले अथवा गर्भावस्था के दौरान बच्चे के लिंग का निर्धारण करने या लिंग चयन से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही प्रसव पूर्व निदान तकनीकों के दुरुपयोग को नियंत्रित करने के लिए भी इस कानून में कड़े प्रावधान किए गए हैं।
जिलाधिकारी ने सभी अस्पताल संचालकों को निर्देशित करते हुए कहा कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम-1994 का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कन्या भ्रूण हत्या समाज के लिए एक जघन्य अपराध है और यदि किसी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र के खिलाफ कन्या भ्रूण हत्या से संबंधित शिकायत प्राप्त होती है तथा जांच में आरोप पुष्ट होते हैं तो संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर बायोमेट्रिक मशीन और सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाने पर जोर दिया। साथ ही अल्ट्रासाउंड केंद्रों और संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित एवं आकस्मिक जांच की संख्या बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया, ताकि नियमों के अनुपालन की प्रभावी निगरानी की जा सके।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट केवल कानूनी प्रावधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेटियों के जीवन और उनके अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में लगातार निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे और जहां कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बैठक में पीसीपीएनडीटी अधिनियम-1994 के अंतर्गत पूर्व में हुई बैठक के बिंदुओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही नए पंजीकरण के लिए प्राप्त चार आवेदन पत्रों तथा नवीनीकरण के लिए प्राप्त तीन आवेदन पत्रों पर भी चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
अन्य कार्यवाही परिवर्तन नियम-13 के अंतर्गत डॉक्टर हटाने (इनएक्टिव) के लिए प्राप्त दो आवेदन पत्रों और अल्ट्रासाउंड चिकित्सक जोड़ने के लिए प्राप्त छह आवेदन पत्रों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड केंद्र का पता परिवर्तन करने के लिए प्राप्त चार आवेदन पत्रों, स्वयं के अनुरोध पर केंद्र पंजीकरण निरस्त करने के लिए प्राप्त एक आवेदन तथा केंद्र पर पंजीकृत मशीन को दूसरे पंजीकृत केंद्र पर विक्रय करने के लिए प्राप्त एक आवेदन पर भी चर्चा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने अल्ट्रासाउंड मशीनों के क्रय-विक्रय से जुड़े मामलों में मशीन का भौतिक निरीक्षण किए जाने के निर्देश भी दिए। साथ ही पीसीपीएनडीटी एक्ट के परिवर्तन नियम-13 के अंतर्गत अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर डॉक्टरों के नए नाम जोड़ने अथवा नाम हटाने से पूर्व यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि संबंधित मशीन पर डॉक्टर की उपलब्धता बनी रहे। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि एक डॉक्टर अधिकतम दो केंद्रों पर स्वयं को पंजीकृत करा सकता है।
इसके अलावा बैठक में केंद्रों पर नई अल्ट्रासाउंड मशीन क्रय अपडेट से संबंधित प्राप्त 14 आवेदन पत्रों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, डीजीसी क्राइम राधा कृष्ण गुप्ता, हरि सिंह गौर, डिप्टी सीएमओ सुरेंद्र मोहन प्रजापति, दिलीप वर्मा सहित जिला सलाहकार समिति के सदस्य और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
