लेमन ट्री होटल में आयोजित “फन्नी ढाबा कवि सम्मेलन” में शहर के साहित्य प्रेमियों की उमड़ी भीड़
अजहर इकबाल, डॉ. अनुज त्यागी, पवन आगरी, उपेन्द्र पांडेय ने काव्य पाठ से बांधा समां
हास्य, व्यंग्य, गीत और ग़ज़ल की शानदार प्रस्तुतियों से देर रात तक काव्यमय रहा माहौल
आगरा। इनक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन एवं सृजन दीप्ति के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य और हास्य से सराबोर फन्नी ढाबा कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन शनिवार को लेमन ट्री होटल, आगरा में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शहर के साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर कवियों की रचनाओं का आनंद लिया। हास्य, व्यंग्य, गीत और ग़ज़ल की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को काव्यमय बना दिया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डेवलपमेंट काउंसिल फॉर फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के चेयरमैन पूरन डावर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथियों में एमपीएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरपर्सन स्क्वाड्रन लीडर ए.के. सिंह, ज्योतिषाचार्य डॉ. सरस्वती देवी कृष्णा गौड़ तथा इनक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के वाइस चेयरमैन राजेश गर्ग उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
अध्यक्षीय संबोधन में पूरन डावर ने कहा कि कविता और हास्य समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं तथा ऐसे आयोजन साहित्यिक परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशिष्ट अतिथि स्क्वाड्रन लीडर ए.के. सिंह ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियाँ युवाओं में रचनात्मकता और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करती हैं। वहीं ज्योतिषाचार्य डॉ. सरस्वती देवी कृष्णा गौड़ ने कहा कि कवि सम्मेलन भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें निरंतर बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संयोजक अभिषेक शर्मा, इनक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के महासचिव अजय शर्मा, संयोजक ब्रजेश शर्मा, सृजन दीप्ति के अध्यक्ष सतीश देव त्यागी, उपाध्यक्ष डॉ. रणवीर त्यागी, सचिव राकेश चन्द्र शुक्ला एवं कोषाध्यक्ष मनोज कुमार शर्मा ने किया।
कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को हास्य, व्यंग्य और साहित्य के रंगों में सराबोर कर दिया। मुजफ्फरनगर से आए मशहूर शायर कपिल शर्मा शो फेम अजहर इकबाल ने अपनी प्रभावशाली पंक्तियों से समां बांध दिया।
“हज़ारों साल से प्रतीक्षारत थी ये धरती धाम हो जाने से पहले,
समंदर भी कहां देता है रस्ता किसी को राम हो जाने से पहले।”
मेरठ के डॉ. अनुज त्यागी ने जीवन के संघर्ष और अनुभवों को शब्द देते हुए कहा—
“बर्बाद सब लगे कभी-कभी लगे आबाद है,
कशमकश है दे रही जिंदगी में स्वाद है।
गिरे तो थे गिर के फिर उठ के हम खड़े हुए,
हुए जो उठ खड़े तो फिर जरा-जरा बड़े हुए।”
हास्य कवि पवन आगरी ने समसामयिक व्यंग्य से भरपूर रचना सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया—
“चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल,
एक साल में इस गोरी ने खूब कमाया माल।
महबूब के नखरों की तरह सोने की कीमत बढ़ गई,
उधर सियासी पारे की तरह चांदी भी ऊपर चढ़ गई।
ब्याह शादी भी इनकी चमक के आगे फीके रहे,
हमारी कविता से बढ़िया तो इन पर बने लतीफे रहे।
ट्रंप के इस टैरिफ बार ने फैलाया कुछ ऐसा जाल,
कि एक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल।”
दिल्ली के उपेन्द्र पांडेय ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत अपनी रचना से माहौल को भावुक कर दिया—
“निगाहें झुकती सजदें में वहाँ सम्मान क्या होगा,
वतन पर जाँ लुटाने से बड़ा बलिदान क्या होगा।
सरहदों पर न्योछावर कर के खुद को बस कहा इतना,
तिरंगा खुद लिपटकर नेह दे आराम क्या होगा।”
कवयित्री सलोनी राणा ने मानवीय संवेदनाओं को व्यक्त करते हुए कहा
“कल की कुछ भी खबर कुछ पता तो नहीं,
तू भी सबकी तरह है जुदा तो नहीं।
चाहे कितना भी खुद को बड़ा मान लें,
आदमी आदमी है खुदा तो नहीं।”
गीतकार अभिषेक शर्मा ने भी अपनी भावपूर्ण रचना से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया—
“जिसे हमदर्द हम समझे वजह वो दर्द की निकला,
था जिसका हौसला हमको यकीं वो खोखला निकला।
मेरे हर हाल में शामिल रहेगा था यकीं मुझको,
हकीकत से मिला जब मैं बड़ा मसरूफ वो निकला।”
कवियों की इन उत्कृष्ट प्रस्तुतियों पर उपस्थित श्रोताओं ने जोरदार तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में काव्य की विविध धाराओं—श्रृंगार, व्यंग्य, राष्ट्रभक्ति और जीवन दर्शन—का सुंदर संगम देखने को मिला, जिससे पूरा वातावरण काव्यमय हो उठा।
इस अवसर पर एफमेक के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता, उपाध्यक्ष राजेश सहगल, डॉ. सीपी राय, डॉ. गिरधर शर्मा, राममोहन कपूर, कुलदीप ठाकुर, निर्मला दीक्षित, संतोष कटारा, डॉ. रजनीश त्यागी, रंजीत सामा, सचिन शंकर, आदर्श नंदन गुप्ता, डॉ. महेश धाकड़, अविनाश वर्मा, प्रो. वेद प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. अमिता त्रिपाठी, आईआरएस प्रभाकर शर्मा, प्रो. सीमा भदौरिया, प्रो. डीसी मिश्रा, पंकज भूषण, नीरज मिश्रा, एनएचएआई के पूर्व परियोजना निदेशक संजय वर्मा, आयकर अधिकारी अतुल चतुर्वेदी, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक रंजन शर्मा, एलेश अवस्थी, मोहित सक्सेना, संजय बैजल, सुजाता शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सृजन दीप्ति संस्था के अध्यक्ष सतीश देव त्यागी ने कहा कि संस्था विगत आठ वर्षों से निरंतर कवि सम्मेलनों के आयोजन के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन कर रही है। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने के साथ-साथ हिन्दी साहित्य की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

