आगरा। आगरा के रावतपाड़ा स्थित श्री मनःकामेश्वर मठ मंदिर के श्रीनाथजी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के तहत आयोजित नंदोत्सव एवं सांस्कृतिक संध्या में नन्हे कलाकारों ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, राधा-कृष्ण रास, गोवर्धन लीला, कालिया नाग मर्दन और ग्वाल-बालों के साथ कान्हा की लीलाओं की मनोहारी प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को ब्रज की भक्ति संस्कृति से जोड़ दिया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों की प्रस्तुतियों के दौरान मंदिर परिसर श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंजता रहा। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीनाथजी के समक्ष मधुराष्टकम पाठ से हुई और समापन आरती, दर्शन एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
रावतपाड़ा स्थित श्री मनःकामेश्वर मठ मंदिर के श्रीनाथजी मंदिर में नंदोत्सव के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बच्चों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को ब्रज की भक्ति और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का जीवंत अहसास कराया। नन्हे कलाकार जब अलग-अलग स्वरूपों में मंच पर पहुंचे तो मंदिर परिसर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के अंतर्गत हुए इस आयोजन में राधा-कृष्ण के प्रेम, कान्हा की बाल लीलाओं और ब्रज की धार्मिक परंपराओं को बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने रखा। मंदिर परिसर में लगातार गूंजते श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु देर तक प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे और कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीनाथजी के समक्ष मधुराष्टकम पाठ के साथ हुआ। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ। बच्चों ने रंग-बिरंगे परिधानों में राधा-कृष्ण रास, श्रीकृष्ण जन्म, माखन चोरी, कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन लीला और ग्वाल-बालों के साथ कान्हा की बाल लीलाओं को मंच पर प्रस्तुत किया। बच्चों की मासूम अदाओं और अभिनय के साथ जैसे-जैसे लीलाओं के प्रसंग सामने आते गए, श्रद्धालुओं के बीच उत्साह बढ़ता गया।
किसी बच्चे ने कान्हा का स्वरूप धारण कर माखन चोरी की लीला प्रस्तुत की तो किसी ने राधा का रूप लेकर कृष्ण के साथ रास की मनोहारी छटा बिखेरी। राधा-कृष्ण रास के दौरान शास्त्रीय एवं ब्रज संगीत की धुनों पर बच्चों की भाव-भंगिमाओं ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। प्रस्तुति पूरी होने पर मंदिर परिसर तालियों से गूंज उठा। नन्हे कलाकारों की मेहनत और आत्मविश्वास ने दर्शकों को प्रभावित किया। बच्चों ने केवल अभिनय के जरिए ही नहीं, बल्कि अपने परिधानों, भाव-भंगिमाओं और मंचीय प्रस्तुति से भी ब्रज की संस्कृति को सामने रखने का प्रयास किया।
नंदोत्सव के दौरान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े अलग-अलग प्रसंगों को भी बच्चों ने आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। ग्वाल-बालों के साथ कान्हा की बाल लीलाओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की छवि सामने रखी। माखन चोरी के प्रसंग में बाल कलाकारों की चंचलता और मासूमियत ने श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित किया। इन प्रस्तुतियों के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु बच्चों का उत्साह बढ़ाते रहे।
गोवर्धन लीला की प्रस्तुति में बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा करने का प्रसंग प्रस्तुत किया। इसके जरिए ब्रजवासियों की रक्षा और भगवान श्रीकृष्ण के संरक्षण का संदेश सामने आया। वहीं कालिया नाग मर्दन की प्रस्तुति में भगवान श्रीकृष्ण के पराक्रम और धर्म की विजय को दर्शाया गया। बच्चों ने इन प्रसंगों को मंच पर अपने अभिनय के माध्यम से जीवंत करने का प्रयास किया, जिसे श्रद्धालुओं ने सराहा।
सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण राधा-कृष्ण रास रहा। ब्रज संगीत और शास्त्रीय धुनों के बीच बच्चों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु रास की प्रस्तुति के दौरान भाव-विभोर नजर आए। भगवान श्रीकृष्ण और राधा के स्वरूप में सजे बच्चों ने अपनी भाव-भंगिमाओं के जरिए ब्रज की परंपरा और भक्ति भावना को सामने रखा। मंच पर प्रस्तुत लीलाओं के साथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच भक्ति का माहौल बना रहा।
मठ-मंदिर प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि नंदोत्सव भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में ब्रज की परंपरा के अनुरूप मनाया गया। उन्होंने बताया कि नंदोत्सव के अवसर पर बच्चों को खिलौने एवं प्रसाद वितरित किए गए। उनका कहना था कि बच्चों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर प्रस्तुत कराने के पीछे उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति, ब्रज परंपरा और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन संदेश से जोड़ना है। बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ ही ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें अपनी विरासत को समझने का अवसर भी मिलता है।
श्रीमहंत योगेश पुरी ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं। इनमें प्रेम, करुणा, वात्सल्य, मित्रता और धर्म का संदेश निहित है। बच्चों द्वारा इन लीलाओं को मंच पर प्रस्तुत करना हमारी संस्कृति के संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सुंदर माध्यम है। उन्होंने कहा कि बच्चों की भागीदारी से धार्मिक आयोजनों में नई ऊर्जा आती है और उन्हें अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
नंदोत्सव के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और बच्चों की प्रस्तुतियों का उत्साह बढ़ाया। भक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच मंदिर परिसर में लंबे समय तक उत्सव का माहौल बना रहा। बच्चों के मंच पर आने से आयोजन में खास आकर्षण दिखाई दिया और श्रद्धालु श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं से जुड़े प्रसंगों को देखते रहे।
नंदोत्सव के समापन पर श्रीनाथजी की आरती हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। इस तरह श्री मनःकामेश्वर मठ मंदिर में आयोजित नंदोत्सव केवल श्रीकृष्ण जन्म की खुशी का आयोजन नहीं रहा, बल्कि बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए ब्रज की परंपरा, श्रीकृष्ण की लीलाओं और सनातन संस्कृति के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बना।
