आगरा। भूमि पूजन-हवन और संगीतमय सुंदरकांड पाठ के साथ 18वें श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का शुभारंभ, मेहंदी से निशान यात्रा और 11 किलो की पोशाक से भजन संध्या तक होंगे भव्य आयोजन
यमुना मैया के पावन तट पर स्थित बल्केश्वर के महालक्ष्मी मंदिर में मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार, हवन की पवित्र अग्नि और संगीतमय सुंदरकांड पाठ के बीच 18वें श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का शुभारंभ हुआ। देवी जी ट्रस्ट एवं श्री महालक्ष्मी भक्त मंडल के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुए पांच दिवसीय महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलेगी।

5 सितंबर तक चलने वाले आयोजन में ‘कान्हा के नाम की मेहंदी’, म्यूजिक भजन कंसर्ट, भव्य भक्ति निशान यात्रा, राधानगर से मंदिर तक पोशाक यात्रा, 11 किलो की विशेष सतरंगी पोशाक, भजन संध्या, फूल बंगला वाटिका थीम पर मां महालक्ष्मी का श्रृंगार और अंतिम दिन 7000 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए विशाल शाम की रसोई प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
मंगलवार को महोत्सव की शुरुआत मां महालक्ष्मी के पावन चरणों में श्रद्धा निवेदित करने के साथ हुई। यमुना तट पर स्थित मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच भूमि पूजन संपन्न कराया गया। इसके बाद हवन कुंड में विधिविधान से आहुतियां अर्पित की गईं। मंत्रोच्चार, हवन की अग्नि और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं की आस्था से वातावरण भक्तिमय हो उठा। यमुना मैया के तट पर गूंजते वैदिक मंत्रों ने आयोजन के शुभारंभ को धार्मिक गरिमा प्रदान की। भूमि पूजन के दौरान महोत्सव के सफल, निर्विघ्न और मंगलमय आयोजन की कामना की गई।
देवी जी ट्रस्ट के राम मोहन कपूर, सतीश गोपाल कपूर, अपिल अंजलि कपूर और तुषार शिवानी कपूर ने आचार्य संतोष शास्त्री के मार्गदर्शन में हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कीं। धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से पांच दिवसीय महोत्सव की शुरुआत की गई। इसके पश्चात संध्याकाल में पंडित सीपी शर्मा द्वारा स्वरबद्ध संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ। सुंदरकांड की संगीतमय प्रस्तुति से मंदिर परिसर में रामभक्ति और कृष्णभक्ति का वातावरण एक साथ दिखाई दिया। दिन में वैदिक मंत्रों और हवन से शुरू हुआ धार्मिक आयोजन शाम तक भक्ति संगीत की स्वर लहरियों में बदल गया।
महालक्ष्मी भक्त मंडल के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि यमुना तट, बल्केश्वर स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर परिसर में होने वाला यह आयोजन लगातार 18वें वर्ष आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव में इस बार भी धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। पांच दिनों तक चलने वाले आयोजन में अलग-अलग दिन श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर तक मंदिर परिसर में भक्ति की विभिन्न प्रस्तुतियां और धार्मिक आयोजन होंगे।
महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को मंदिर परिसर में ‘कान्हा के नाम की मेहंदी’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में श्रद्धालु कान्हा के नाम की मेहंदी के माध्यम से अपनी भक्ति और आस्था प्रकट करेंगे। इसी दिन म्यूजिक भजन कंसर्ट भी आयोजित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वल्लभा बैंड अपनी प्रस्तुतियां देगा। बैंड की भक्ति संगीत से जुड़ी प्रस्तुति के दौरान मंदिर परिसर भजनों की मधुर स्वर लहरियों से गूंजेगा। मेहंदी कार्यक्रम और भजन कंसर्ट के जरिए महोत्सव के दूसरे दिन धार्मिक आस्था के साथ संगीत का रंग देखने को मिलेगा।
3 सितंबर को महोत्सव का प्रमुख आकर्षण भव्य भक्ति निशान यात्रा होगी। यात्रा सुबह 7 बजे निकाली जाएगी। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु निशान लेकर शामिल होंगे। निशान यात्रा बल्केश्वर महादेव मंदिर से प्रारंभ होकर जीवनी मंडी स्थित श्री खाटू श्याम जी मंदिर तक जाएगी। यात्रा के मार्ग में श्रद्धालुओं के स्वागत की विशेष व्यवस्था रहेगी। पूरे रास्ते निशान यात्रा का पुष्पवर्षा और इत्रवर्षा के साथ स्वागत किया जाएगा। इससे यात्रा के दौरान धार्मिक उत्साह और भक्ति का वातावरण बनेगा। निशान लेकर शामिल होने वाले श्रद्धालु इस आयोजन को भक्ति के साथ पूरा करेंगे।
इसी दिन शाम को राधानगर से श्री महालक्ष्मी मंदिर तक भव्य पोशाक यात्रा निकाली जाएगी। इस वर्ष मां महालक्ष्मी को अर्पित की जाने वाली विशेष पोशाक का वजन 11 किलो होगा। वृंदावन से विशेष रूप से तैयार होकर आ रही यह सतरंगी और आकर्षक पोशाक पोशाक यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहेगी। राधानगर से मंदिर तक होने वाली इस यात्रा के बाद विशेष पोशाक मां महालक्ष्मी को अर्पित की जाएगी। वृंदावन से तैयार होकर आ रही पोशाक को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण रहेगा।
4 सितंबर की शाम महोत्सव में भक्ति संगीत का विशेष आयोजन होगा। इस अवसर पर प्रख्यात भजन गायक ब्रजराज सिंह लक्खा, कानपुर की शर्मा सिस्टर्स तथा बेटू व आल्या शर्मा अपनी भजन प्रस्तुतियां देंगे। अलग-अलग कलाकारों की भजन प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर होंगे। इसी दिन मां महालक्ष्मी का दिव्य श्रृंगार फूल बंगला वाटिका की थीम पर किया जाएगा। मंदिर परिसर में फूलों की थीम पर होने वाला यह श्रृंगार महोत्सव के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को विशेष आकर्षण देगा।
पांच दिवसीय महोत्सव का अंतिम दिन 5 सितंबर को होगा। इस दिन 7000 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए विशाल शाम की रसोई आयोजित की जाएगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए होने वाली यह व्यवस्था महोत्सव के समापन कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगी। पांच दिनों तक चलने वाले आयोजन में जहां अलग-अलग धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से श्रद्धालु जुड़ेंगे, वहीं अंतिम दिन सामूहिक भोजन की व्यवस्था के जरिए बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता होगी।
महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर अशोक आशा सिंघल, अजय अंशु अग्रवाल, अखिलेश स्वाति गुप्ता, अमित रश्मि मित्तल, दिलीप श्रुति बंसल, ध्रुव आयुषी गर्ग, गौरव रीना वार्ष्णेय, हेमंत पायल मोहता, करतार चंद्र शुभलेश शास्त्री, मनोज मनीषा जैन, केएल अग्रवाल, मनीष गुप्ता, मनीष सुकृती सिंघल, मनीष रचना गोयल, मुकेश संध्या गुप्ता, पवन प्रीति जैन, राकेश ममता अग्रवाल, राकेश निर्मला अग्रवाल, सुमित सुलेखा बंसल, तनु गुप्ता, विष्णु शकुन अग्रवाल और विष्णु रश्मि गर्ग आदि उपस्थित रहे।
बल्केश्वर के श्री महालक्ष्मी मंदिर में शुरू हुआ यह आयोजन धार्मिक अनुष्ठान से लेकर भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक कई रंग समेटे हुए है। पहले दिन भूमि पूजन और हवन के साथ शुभारंभ हुआ, जिसके बाद संगीतमय सुंदरकांड पाठ ने वातावरण को भक्तिमय बनाया। अगले दिनों में मेहंदी, भजन कंसर्ट, निशान यात्रा, पोशाक यात्रा और भजन संध्या के आयोजन निर्धारित हैं। मां महालक्ष्मी के लिए वृंदावन से तैयार होकर आ रही 11 किलो की सतरंगी पोशाक, फूल बंगला वाटिका की थीम पर होने वाला दिव्य श्रृंगार और अंतिम दिन 7000 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए शाम की रसोई आयोजन के प्रमुख पड़ाव होंगे।
महोत्सव की शुरुआत से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की धार्मिक सहभागिता देखने को मिली। यमुना तट पर भूमि पूजन के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण हुआ तो हवन के समय श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कीं। शाम को सुंदरकांड के संगीतमय पाठ ने आयोजन को अलग स्वरूप दिया। राम और कृष्ण भक्ति के इस संगम के साथ पांच दिवसीय महोत्सव की गतिविधियों का सिलसिला शुरू हो गया है।
आयोजकों के अनुसार, लगातार 18वें वर्ष आयोजित हो रहा यह महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ भक्ति संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी एक मंच पर ला रहा है। अलग-अलग दिनों के लिए निर्धारित कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की सहभागिता को केंद्र में रखा गया है। बुधवार को कान्हा के नाम की मेहंदी और वल्लभा बैंड का म्यूजिक भजन कंसर्ट होगा। 3 सितंबर को सुबह बल्केश्वर महादेव मंदिर से जीवनी मंडी स्थित श्री खाटू श्याम जी मंदिर तक निशान यात्रा निकलेगी और शाम को राधानगर से श्री महालक्ष्मी मंदिर तक पोशाक यात्रा होगी। 4 सितंबर को भक्ति संगीत के साथ मां महालक्ष्मी का फूल बंगला वाटिका थीम पर श्रृंगार होगा। 5 सितंबर को 7000 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए विशाल शाम की रसोई के साथ पांच दिवसीय आयोजन अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचेगा।
इस प्रकार भूमि पूजन, हवन और सुंदरकांड पाठ से शुरू हुआ श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव आने वाले दिनों में अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आगे बढ़ेगा। यमुना तट पर स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर परिसर में भक्ति संगीत की प्रस्तुतियों से लेकर निशान यात्रा और पोशाक यात्रा तक श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न आयोजन होंगे। वृंदावन से आने वाली 11 किलो की विशेष पोशाक, भजन गायकों की प्रस्तुतियां, वल्लभा बैंड का कंसर्ट, फूल बंगला वाटिका की थीम और 7000 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए शाम की रसोई इस वर्ष के महोत्सव को विशेष स्वरूप देंगे।
