आगरा। ग्वालियर रोड पर ग्राम तेहरा के पास खारी नदी के किनारे डूब क्षेत्र में चल रहे कॉलोनी निर्माण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अगली सुनवाई तक निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान एनजीटी ने राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक मौके पर किसी भी तरह का नया निर्माण न हो। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने न्यायालय को इसका आश्वासन दिया है। मामले में उत्तर प्रदेश सरकार जिलाधिकारी आगरा समेत छह पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।

ग्वालियर रोड पर ग्राम तेहरा से पहले खारी नदी के किनारे कॉलोनी निर्माण को लेकर डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने एनजीटी की प्रधान पीठ नई दिल्ली में याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि खारी नदी के डूब क्षेत्र में निर्माण कराया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इसे पर्यावरणीय दृष्टि से गंभीर मामला बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि नदी के डूब क्षेत्र में निर्माण होने से नदी के प्राकृतिक बहाव और आसपास की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजित शर्मा और अनंत मिश्रा ने एनजीटी में पैरवी की। सुनवाई के दौरान उन्होंने न्यायालय के सामने निर्माण स्थल की स्थिति रखी। अधिवक्ताओं ने कहा कि खारी नदी के किनारे जिस स्थान पर निर्माण गतिविधियां चल रही हैं वह नदी के डूब क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। ऐसे स्थान पर कॉलोनी निर्माण से बारिश के दौरान पानी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आने की आशंका है। इससे आसपास के क्षेत्रों की जल निकासी व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। अधिवक्ताओं ने न्यायालय से निर्माण गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने और संबंधित विभागों से स्थिति स्पष्ट कराने का अनुरोध किया।

सुनवाई के दौरान एनजीटी ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता से पूछा कि अगली सुनवाई तक संबंधित स्थल पर निर्माण रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। इस पर राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को भरोसा दिलाया गया कि मौके पर किसी भी प्रकार का नया निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। सरकार के आश्वासन के बाद अगली सुनवाई तक निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ाने की स्थिति स्पष्ट हो गई। फिलहाल संबंधित स्थल पर निर्माण गतिविधियां रुक गई हैं।
मामले में एनजीटी ने छह पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव के माध्यम से प्रतिवादी बनाया गया है। जिलाधिकारी आगरा को कलेक्ट्रेट मोहनपुरा स्थित कार्यालय के माध्यम से मामले में पक्षकार बनाया गया है। उप जिलाधिकारी फतेहाबाद और तहसीलदार फतेहाबाद को भी प्रतिवादी बनाया गया है। इसके साथ ही सहायक अभियंता-द्वितीय लोअर खंड आगरा नहर तथा केंद्रीय जल आयोग को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। केंद्रीय जल आयोग को उसके अध्यक्ष के माध्यम से प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिका में नदी के डूब क्षेत्र में निर्माण की वैधता और उसके पर्यावरणीय प्रभाव का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में निर्माण होने से भविष्य में जल निकासी प्रभावित हो सकती है। बारिश के दौरान नदी में पानी बढ़ने पर प्राकृतिक जल प्रवाह के लिए उपलब्ध क्षेत्र कम होने से आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से निर्माण स्थल की स्थिति और वहां लागू नियमों का पालन किए जाने की जानकारी सामने आना जरूरी है।
एनजीटी की सुनवाई में इन बिंदुओं को न्यायालय के सामने रखा गया। हालांकि अभी यह अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है कि संबंधित निर्माण स्थल डूब क्षेत्र में किस सीमा तक आता है। वहां अब तक हुए निर्माण में किन नियमों का पालन किया गया है यह भी संबंधित विभागों के जवाब के बाद स्पष्ट होगा। न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
अब संबंधित विभागों की रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण होगी। उन्हें निर्माण स्थल की स्थिति से जुड़े तथ्य न्यायालय के सामने रखने होंगे। साथ ही नदी के डूब क्षेत्र और जल प्रवाह से जुड़े पहलुओं पर भी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। केंद्रीय जल आयोग तथा आगरा नहर से जुड़े अधिकारियों का जवाब भी मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एनजीटी की कार्रवाई के बाद तेहरा के पास खारी नदी के किनारे निर्माण को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। राज्य सरकार ने अगली सुनवाई तक नया निर्माण नहीं होने देने का आश्वासन न्यायालय को दिया है। अब संबंधित स्थल पर इस आदेश और आश्वासन का पालन कराना प्रशासन के सामने प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी। उस समय संबंधित पक्षों की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब और दस्तावेजों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। खारी नदी के डूब क्षेत्र में निर्माण को लेकर उठाए गए सवालों पर भी इसी सुनवाई में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल एनजीटी की कार्रवाई के बाद तेहरा के पास खारी नदी के किनारे संबंधित स्थल पर निर्माण पर रोक लग गई है और अगली सुनवाई तक वहां नया निर्माण नहीं हो सकेगा।

