आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षोत्सव के सांस्कृतिक आयोजनों के तहत शुक्रवार को खंदारी परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार में देशभक्ति समूह गायन और समूह लोक नृत्य प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन हुआ। विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने देशभक्ति, भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं से ओतप्रोत प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिताओं में ललित कला संस्थान और दीनदयाल उपाध्याय संस्थान ने प्रथम स्थान हासिल किया। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों की प्रतिभा, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को खंदारी परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार (जे.पी. सभागार) देशभक्ति के स्वरों और लोक संस्कृति की रंगत से सराबोर नजर आया। विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित देशभक्ति समूह गायन एवं समूह लोक नृत्य प्रतियोगिताओं में विभिन्न आवासीय संस्थानों के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी कला, अनुशासन तथा सांस्कृतिक समझ का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक चेतना और रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना था।
प्रतियोगिता की शुरुआत देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों से हुई। मंच पर एक के बाद एक टीमों ने ऐसे गीत प्रस्तुत किए, जिन्होंने सभागार में मौजूद दर्शकों में देशभक्ति का भाव जागृत कर दिया। संगीत, स्वर और समूह समन्वय के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया। कड़े मुकाबले के बाद ललित कला संस्थान ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति के दम पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। के.एम.आई. की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान हासिल किया, जबकि इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंस की टीम तृतीय स्थान पर रही।

देशभक्ति गायन प्रतियोगिता के बाद आयोजित समूह लोक नृत्य प्रतियोगिता ने पूरे सभागार को भारतीय लोक संस्कृति के रंगों से भर दिया। विभिन्न क्षेत्रों की लोक परंपराओं, वेशभूषा, संगीत और नृत्य शैली को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों की ऊर्जा, तालमेल और मंच प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। प्रतियोगिता में दीनदयाल उपाध्याय संस्थान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। के.एम.आई. की टीम द्वितीय और इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंस की टीम तृतीय स्थान पर रही।

कार्यक्रम के दौरान सभागार में मौजूद विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने सभी प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। देशभक्ति गीतों ने जहां राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया, वहीं लोक नृत्यों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। प्रत्येक प्रस्तुति में प्रतिभागियों की तैयारी, आत्मविश्वास और मंच संचालन कौशल स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन निर्णायक मंडल के सदस्य डॉ. ज्योति खंडेलवाल, गजेंद्र सिंह, राशि जौहरी और सुजाता अग्रवाल ने किया। निर्णायकों ने प्रस्तुति, विषय की अभिव्यक्ति, समूह समन्वय, संगीत, नृत्य शैली, मंच अनुशासन और समग्र प्रभाव के आधार पर विजेताओं का चयन किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नीलू सिन्हा के नेतृत्व में डॉ. रमा, डॉ. तपस्या चौहान और पुरुषोत्तम मयूरा ने आयोजन की सभी व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया। कार्यक्रम का मंच संचालन इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंस की छात्रा कौशाम्बी ने आत्मविश्वास और प्रभावशाली शैली में किया, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
दीक्षोत्सव-2026 के इस सांस्कृतिक आयोजन में केवल प्रतियोगिता का माहौल ही नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस अवसर पर प्रो. आर.के. अग्निहोत्री, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा, जनसंपर्क अधिकारी पूजा सक्सेना, डॉ. सुरभि महाजन, डॉ. मोनिका अस्थाना, डॉ. उदिता तिवारी, डॉ. निभा जादौन, डॉ. रत्ना पाण्डेय, डॉ. नीरज कुशवाह, पं. देवाशीष गांगुली, डॉ. मोहिनी दयाल, डॉ. नंदिनी, डॉ. जागृति और डॉ. शिवानी सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
देशभक्ति, सांस्कृतिक विविधता और युवा प्रतिभा के संगम से सजे इस आयोजन ने दीक्षोत्सव-2026 के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को नई ऊंचाई प्रदान की। विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियों ने यह साबित किया कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों को सशक्त बनाने का भी महत्वपूर्ण मंच है। पूरे कार्यक्रम के दौरान सभागार तालियों की गूंज से सराबोर रहा और प्रतिभागियों के उत्साह ने आयोजन को यादगार बना दिया।
