लखनऊ/आगरा। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ शहरी परिवहन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए टाइम्स इंटरनेट इकोप्रेन्योर अवॉर्ड्स-2026 में प्रतिष्ठित ‘एंटरप्राइज सस्टेनेबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह सम्मान निदेशक (वित्त) शील कुमार मित्तल ने निगम की ओर से प्राप्त किया। ऊर्जा संरक्षण, ग्रीन बिल्डिंग, सौर ऊर्जा, रीजनरेटिव ब्रेकिंग, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने की दिशा में यूपीएमआरसी के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने पर्यावरण संरक्षण और सतत शहरी परिवहन के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। टाइम्स इंटरनेट इकोप्रेन्योर अवॉर्ड्स-2026 में यूपीएमआरसी को प्रतिष्ठित ‘एंटरप्राइज सस्टेनेबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित समारोह में निगम की ओर से निदेशक (वित्त) शील कुमार मित्तल ने प्राप्त किया। यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास को लेकर यूपीएमआरसी की दीर्घकालिक सोच और सफल क्रियान्वयन का राष्ट्रीय स्तर पर मिला महत्वपूर्ण प्रमाण है।
यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि इस बात की पुष्टि भी है कि उत्तर प्रदेश की मेट्रो सेवाएं अब केवल तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के क्षेत्र में भी देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन चुकी हैं। निगम ने योजना निर्माण से लेकर संचालन तक हर स्तर पर ऐसी तकनीकों और व्यवस्थाओं को अपनाया है, जिनसे ऊर्जा की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हुआ है।
“ग्रीन मेट्रो, क्लीन मेट्रो” की अवधारणा को आधार बनाकर यूपीएमआरसी ने लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो परियोजनाओं में पर्यावरणीय मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। निर्माण कार्यों में हरित तकनीकों का उपयोग, ऊर्जा दक्ष प्रणालियां, सौर ऊर्जा आधारित बिजली उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे कदमों ने निगम को देश के सबसे पर्यावरण-अनुकूल मेट्रो संगठनों में शामिल कर दिया है।
यूपीएमआरसी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि यह भारत का पहला मेट्रो संगठन बन गया है, जिसके तीनों शहरों—लखनऊ, कानपुर और आगरा—के सभी 48 मेट्रो स्टेशनों को आईजीबीसी प्लेटिनम ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि स्टेशन निर्माण और संचालन में ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन, हरित डिजाइन और पर्यावरणीय मानकों का पूरी गंभीरता से पालन किया गया है।
ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में भी यूपीएमआरसी ने कई नवाचार किए हैं। निगम ने CO₂ सेंसर आधारित स्मार्ट HVAC सिस्टम लागू किया है, जिससे हर वर्ष लगभग 70 लाख रुपये की ऊर्जा बचत हो रही है। यह प्रणाली यात्रियों की संख्या और वातावरण के अनुसार एयर कंडीशनिंग को नियंत्रित करती है, जिससे बिजली की खपत कम होती है और यात्रियों को बेहतर सुविधा भी मिलती है।
इसी प्रकार रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक के माध्यम से मेट्रो ट्रेनों में ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न ऊर्जा का लगभग 45 प्रतिशत दोबारा उपयोग में लाया जाता है। इस तकनीक से प्रतिवर्ष लगभग 2.1 करोड़ यूनिट बिजली की बचत हो रही है। ऊर्जा दक्षता की दिशा में यह पहल देश की आधुनिक मेट्रो प्रणालियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यूपीएमआरसी ने 4.122 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट भी स्थापित किए हैं। इनसे हर वर्ष लगभग 48 लाख यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होता है। सौर ऊर्जा, स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन और रीजनरेटिव ब्रेकिंग जैसी तकनीकों के संयुक्त प्रभाव से निगम हर साल लगभग 4.4 करोड़ यूनिट बिजली बचाने में सफल हो रहा है।
पर्यावरण संरक्षण केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है। यूपीएमआरसी ने जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए भी कई अभिनव पहल की हैं। निगम ने जीरो डिस्चार्ज डिपो विकसित किए हैं, जहां पानी का पुनर्चक्रण कर उसे ट्रेनों की धुलाई और बागवानी में इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन प्रणाली को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
निर्माण कार्यों के दौरान 500 से अधिक पेड़ों का वैज्ञानिक तरीके से स्थानांतरण किया गया, जिसमें लगभग 95 प्रतिशत सफलता प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त निगम ने 1.1 लाख वर्गमीटर से अधिक हरित क्षेत्र विकसित कर शहरी वातावरण को बेहतर बनाने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया है।
यूपीएमआरसी ने कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में भी नई मिसाल पेश की है। जब्त किए गए तंबाकू और पान मसाला उत्पादों से जैविक खाद तैयार की जा रही है, जबकि सभी स्टेशनों, डिपो और मेट्रो ट्रेनों में 100 प्रतिशत एलईडी लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। इससे बिजली की खपत कम होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली है।
मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद से यूपीएमआरसी 20 करोड़ से अधिक यात्राएं पूरी करा चुका है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 8 करोड़ लीटर ईंधन की बचत हुई है और करीब 2 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका जा सका है। इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आई है, बल्कि ट्रैफिक जाम कम होने और लोगों को तेज, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
इस उपलब्धि पर प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि यह सम्मान पूरे यूपीएमआरसी परिवार के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि निगम का लक्ष्य केवल आधुनिक मेट्रो सेवा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली विकसित करना है जो ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी यूपीएमआरसी नई तकनीकों को अपनाकर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका बनाए रखेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश की मेट्रो परियोजनाएं अब केवल परिवहन व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हरित विकास, ऊर्जा संरक्षण और सतत शहरी भविष्य की दिशा में देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर चुकी हैं।
