आगरा। आगरा मंडल ने रेल संचालन को अधिक सुरक्षित, तेज और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। होडल–शोलाका खंड की तीसरी और चौथी रेल लाइन पर 10.34 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का सफल कमीशनिंग कर दिया गया है। मात्र 120 मिनट के ट्रैफिक ब्लॉक में पूरा हुआ यह कार्य भूतेश्वर–शोलाका रेल खंड के कुल 61 किलोमीटर क्षेत्र को ऑटोमैटिक सिग्नलिंग नेटवर्क से जोड़ता है। नई प्रणाली लागू होने से लाइन क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों का अनावश्यक ठहराव कम होगा, समयपालन में सुधार होगा और भविष्य की बढ़ती रेल यातायात आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

उत्तर मध्य रेलवे के आगरा मंडल ने रेल अवसंरचना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है। शनिवार को होडल–शोलाका खंड की तीसरी एवं चौथी रेल लाइन पर 10.34 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया गया। यह पूरा कार्य केवल 120 मिनट के ट्रैफिक ब्लॉक के भीतर संपन्न हुआ, जिसे तकनीकी दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस कमीशनिंग के साथ ही आगरा मंडल के भूतेश्वर–शोलाका रेल खंड के कुल 61 किलोमीटर क्षेत्र में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का कार्य पूरा हो गया है। इससे रेल संचालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और व्यवस्थित होगा तथा बढ़ते रेल यातायात के बीच ट्रेनों का संचालन अधिक दक्षता के साथ किया जा सकेगा।
परियोजना के तहत अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक का व्यापक विस्तार किया गया। इस दौरान दो नए रिले हट, 12 ऑटोमैटिक सिग्नल तथा आधुनिक हिताची एमएलके-2 (MLK-II) इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की गई। इसके अलावा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए 56 ट्रैक सेक्शनों में फ्रॉशर (Frauscher) एक्सल काउंटर आधारित डुअल डिटेक्शन प्रणाली लगाई गई, जिससे ट्रैक पर ट्रेनों की सटीक निगरानी और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
परियोजना के अंतर्गत एलसी-554, एलसी-556 और एलसी-556ए इंजीनियरिंग लेवल क्रॉसिंग गेटों को भी नई सिग्नलिंग प्रणाली से एकीकृत किया गया है। इसके साथ ही आधुनिक इंटीग्रेटेड पावर सप्लाई (IPS) प्रणाली, फायर अलार्म यूनिट तथा शोलाका यार्ड का पूर्ण आधुनिकीकरण किया गया है। इन सुधारों के बाद वीडियो डिस्प्ले यूनिट (VDU) आधारित संचालन और सिस्टम रीसेटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे तकनीकी कार्य अधिक सरल और प्रभावी बनेंगे।
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि होडल–शोलाका खंड की तीसरी एवं चौथी लाइन पर पहले लागू एब्सलूट ब्लॉक वर्किंग प्रणाली को पूरी तरह उन्नत कर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली में परिवर्तित किया गया है। इससे अब ट्रेनों का संचालन अधिक आधुनिक प्रणाली के माध्यम से होगा और लाइन की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
नई ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली लागू होने से रेल यात्रियों और रेलवे दोनों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही रेल खंड में सुरक्षित रूप से एक से अधिक ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा। ट्रेनों को अगले स्टेशन से लाइन क्लियर मिलने की प्रतीक्षा कम करनी पड़ेगी, जिससे परिचालन अधिक सुचारु होगा। इसके परिणामस्वरूप ट्रेनों का अनावश्यक ठहराव घटेगा, समयपालन में सुधार होगा और यात्रियों को अधिक समयबद्ध रेल सेवाएं मिल सकेंगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह तकनीक भविष्य में बढ़ते रेल यातायात को संभालने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बढ़ती ट्रेनों की संख्या के बीच लाइन क्षमता बढ़ाना रेलवे की प्राथमिकता है और ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे रेल यातायात की दक्षता, सुरक्षा और विश्वसनीयता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
पूरी परियोजना का कार्य उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह तथा आगरा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक गगन गोयल के मार्गदर्शन में पूरा किया गया। परियोजना के सफल क्रियान्वयन में मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (परियोजना) खुश गुप्ता, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (संकेत) अनिल पटेल, आगरा मंडल तथा मुख्यालय की ड्रॉइंग टीम के तकनीकी सहयोग और समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल तकनीकी उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों को अधिक सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद रेल सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में इस तरह की आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली अन्य महत्वपूर्ण रेल खंडों पर भी लागू किए जाने की योजना है, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन क्षमता और यात्री सुविधाओं में लगातार सुधार हो सके।

