आगरा। जिला कारागार की महिला बैरक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में महिला बंदियों को उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, महिला संरक्षण संबंधी कानूनों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही उनकी समस्याएं सुनकर विधिक परामर्श प्रदान किया गया तथा कारागार में उपलब्ध सुविधाओं का भी अवलोकन किया गया।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार तथा जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा के अध्यक्ष संजय कुमार मलिक के मार्गदर्शन में बुधवार को जिला कारागार, आगरा की महिला बैरक में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य महिला बंदियों को उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी उपलब्ध कराना तथा न्याय प्राप्त करने के लिए उपलब्ध कानूनी व्यवस्थाओं से अवगत कराना रहा।
शिविर के दौरान जिला कारागार के अधीक्षक हरिओम शर्मा, उप कारापाल अंजनी कुमार, मेघा तथा कारागार के कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महिला बंदियों को विभिन्न विधिक विषयों की विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक हो सकें।
शिविर में उपस्थित महिला बंदियों को बताया गया कि प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा समान अधिकार प्रदान किए गए हैं और यदि कोई व्यक्ति आर्थिक अथवा अन्य किसी कारण से न्याय प्राप्त करने में सक्षम नहीं है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्हें यह भी बताया गया कि ऐसे पात्र व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे न्यायिक प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रख सकें।
कार्यक्रम के दौरान महिला बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था के साथ-साथ लोक अदालत की कार्यप्रणाली और उसके महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि लोक अदालत के माध्यम से कई प्रकार के मामलों का सौहार्दपूर्ण एवं त्वरित निस्तारण संभव है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल बनती है।
शिविर में महिला संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनों की भी विस्तार से जानकारी दी गई। महिला बंदियों को घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों तथा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और यह जानकारी देना था कि आवश्यकता पड़ने पर वे कानून द्वारा उपलब्ध कराए गए संरक्षण और सहायता का लाभ कैसे प्राप्त कर सकती हैं।
महिला बंदियों को यह भी बताया गया कि न्याय तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लगातार कार्य कर रहा है। आर्थिक स्थिति या अन्य किसी कारण से यदि कोई व्यक्ति अधिवक्ता करने में असमर्थ है तो उसे निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वह अपने अधिकारों की रक्षा कर सके और न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम के दौरान महिला बंदियों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को गंभीरता से सुना गया। उनसे संवाद स्थापित कर उनकी ओर से उठाए गए विभिन्न विधिक विषयों से जुड़े प्रश्नों का समाधान किया गया तथा आवश्यक विधिक परामर्श उपलब्ध कराया गया। शिविर का उद्देश्य केवल कानूनी जानकारी देना ही नहीं, बल्कि महिला बंदियों की शंकाओं का समाधान कर उन्हें उपलब्ध कानूनी सहायता व्यवस्थाओं से जोड़ना भी रहा।
विधिक जागरूकता शिविर के उपरांत जिला कारागार, आगरा की महिला बैरक का अवलोकन भी किया गया। निरीक्षण के दौरान महिला बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सुविधाओं का जायजा लिया गया। इस दौरान स्वच्छ एवं सुरक्षित आवास, शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण भोजन, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता व्यवस्था, परामर्श सेवाओं तथा दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का अवलोकन किया गया।
निरीक्षण के दौरान महिला बंदियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के लिए कारागार प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया। उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन करने के बाद महिला बंदियों के लिए की गई व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया गया। निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि महिला बंदियों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
विधिक जागरूकता शिविर का मुख्य उद्देश्य महिला बंदियों को उनके अधिकारों, उपलब्ध कानूनी सहायता, महिला संरक्षण संबंधी कानूनों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें जागरूक बनाना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें यह भी बताया गया कि न्याय प्राप्त करना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे सभी पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। शिविर में कारागार प्रशासन की उपस्थिति में महिला बंदियों को विभिन्न विधिक विषयों पर जानकारी देने के साथ उनकी समस्याओं को सुनकर आवश्यक विधिक परामर्श भी प्रदान किया गया तथा निरीक्षण के दौरान महिला बैरक में उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन कर व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया गया।
