आगरा। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के तहत शुक्रवार को प्राथमिक विद्यालय छीपीटोला और उच्च प्राथमिक विद्यालय रोहता का औचक निरीक्षण किया। छीपीटोला में कक्षाएं व्यवस्थित, बच्चों का शैक्षिक स्तर संतोषजनक, स्मार्ट क्लास संचालित और मिड-डे मील की गुणवत्ता ठीक मिली। जिलाधिकारी ने पूरे शैक्षिक स्टाफ को प्रशस्ति पत्र देने के निर्देश दिए। इसके विपरीत उच्च प्राथमिक विद्यालय रोहता में संसाधनों का उपयोग न होने, रसोईघर की अव्यवस्था, परिसर में साफ-सफाई की कमी और पठन-पाठन की स्थिति कमजोर मिलने पर इंचार्ज प्रधानाध्यापक सुनीता सक्सेना को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने, आरोपपत्र देने और शासन को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी इन दिनों जनसुनवाई के साथ विभिन्न विभागों की योजनाओं, निर्माण कार्यों, अस्पतालों, पंचायतों, पेयजल व्यवस्था और सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के दौरान विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। अभियान एक जुलाई से 15 जुलाई तक चल रहा है। निरीक्षण का उद्देश्य बच्चों के नए नामांकन, शिक्षकों की उपस्थिति, मिड-डे मील, संसाधनों के उपयोग और पठन-पाठन की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति जानना था।

कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के बाद जिलाधिकारी बिना पूर्व सूचना के प्राथमिक विद्यालय छीपीटोला पहुंचे। यहां कक्षाएं नियमित रूप से संचालित मिलीं। उन्होंने सबसे पहले कक्षा तीन का निरीक्षण किया। बच्चों से बातचीत कर पढ़ाई, नई किताबें, ड्रेस और भोजन में मिलने वाली सामग्री के बारे में जानकारी ली। बच्चों ने उत्साह के साथ जवाब दिए। जिलाधिकारी के सामने बलदेव, तन्वी और अन्य बच्चों ने हिंदी और अंग्रेजी की किताबें पढ़कर सुनाईं। बच्चों ने अपना नाम लिखकर दिखाया, गिनती सुनाई और पहाड़े भी बताए।

बच्चों के साथ संवाद के दौरान जिलाधिकारी ने उनकी समझ और आत्मविश्वास को परखा। कुछ ही देर में बच्चे सहज हो गए। इसके बाद जिलाधिकारी ने स्वयं चॉक लेकर ब्लैकबोर्ड पर बच्चों को पढ़ाया। जिलाधिकारी को अपने बीच पाकर बच्चे उत्साहित दिखे। उन्होंने कक्षा पांच और कक्षा दो में भी जाकर बच्चों से उनकी पसंदीदा कहानी, खिलाड़ी और सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे। बच्चों ने अपनी बात रखी और प्रश्नों के उत्तर दिए। जिलाधिकारी बच्चों के पठन-पाठन के स्तर से संतुष्ट नजर आए।

प्राथमिक विद्यालय छीपीटोला में जिलाधिकारी ने स्मार्ट क्लास का भी निरीक्षण किया। बच्चों से अपने सामने स्मार्ट टीवी चलवाकर उसकी उपयोगिता देखी। उन्होंने लाइब्रेरी का निरीक्षण कर पुस्तकों और वहां की व्यवस्था की जानकारी ली। लाइब्रेरी में पर्याप्त रोशनी के लिए गुणवत्तापूर्ण एलईडी लाइट लगवाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें सामान्य ज्ञान, परिवेश और बाहरी दुनिया की जानकारी भी दी जाए, जिससे वे प्रतिस्पर्धा के दौर में बेहतर ढंग से आगे बढ़ सकें।

जिलाधिकारी ने विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर की जांच की। बताया गया कि विद्यालय में 146 बच्चे नामांकित हैं। यहां दो शिक्षक और तीन शिक्षामित्र तैनात हैं। उन्होंने मिड-डे मील में तैयार भोजन को चखकर गुणवत्ता जांची। भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक मिली। कक्षाओं की व्यवस्था, बच्चों की भागीदारी, स्मार्ट क्लास और मिड-डे मील की स्थिति ठीक मिलने पर जिलाधिकारी ने सभी शैक्षिक कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देने के निर्देश दिए।
इसके बाद जिलाधिकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय रोहता पहुंचे। उन्होंने इंचार्ज प्रधानाध्यापक से विद्यालय की व्यवस्थाओं, नए नामांकन और बच्चों की उपस्थिति के बारे में जानकारी ली। बताया गया कि विद्यालय में 56 नए प्रवेश हुए हैं और कुल नामांकन 235 है। निरीक्षण के समय 108 बच्चे उपस्थित मिले। विद्यालय में 10 शिक्षक, दो शिक्षामित्र और दो अनुदेशक सहित कुल 14 शैक्षिक कर्मचारी तैनात हैं।
जिलाधिकारी ने विद्यालय की रसोई, कंप्यूटर कक्ष, अग्निशमन यंत्र, खेल सामग्री, खेल किट, संगीत यंत्र, सीखते हुए करने की प्रयोगशाला, फर्नीचर और परिसर की साफ-सफाई का निरीक्षण किया। रसोईघर में राशन उपलब्ध नहीं मिला। व्यवस्था भी बेतरतीब पाई गई। जिलाधिकारी ने संबंधित कर्मचारियों से इसका कारण पूछा और जवाब तलब किया।
उन्होंने सभी शिक्षक और कर्मचारियों से बच्चों के साथ मिड-डे मील खाने के बारे में पूछा। कर्मचारियों ने बताया कि वे बच्चों के साथ भोजन करने के बजाय घर से लाया भोजन करते हैं। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया और सभी को बच्चों के साथ मिड-डे मील में शामिल होने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए शिक्षकों की भागीदारी जरूरी है।
कंप्यूटर कक्ष में जिलाधिकारी ने बच्चों से पूछा कि नियमित रूप से कंप्यूटर की कक्षाएं चलती हैं या नहीं और कंप्यूटर शिक्षक उपलब्ध हैं या नहीं। विद्यालय में नया स्मार्ट टीवी रखा मिला, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो रहा था। खेल सामग्री, खेल किट और अन्य पाठ्य सहगामी गतिविधियों के लिए उपलब्ध संसाधन भी बच्चों के उपयोग में नहीं मिले। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने इंचार्ज प्रधानाध्यापक से जवाब मांगा, लेकिन वह संसाधनों के उपयोग और व्यवस्था को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की कमी मिली। कक्षा समय में भी कुछ बच्चे बाहर खेलते मिले। जिलाधिकारी ने इसे अनुशासन और पठन-पाठन की व्यवस्था में कमी माना। उन्होंने पाया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय रोहता के लिए शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई विशेष सुविधाओं का अपेक्षित ढंग से क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। पठन-पाठन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली।
जिलाधिकारी ने इंचार्ज प्रधानाध्यापक सुनीता सक्सेना को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी को आरोपपत्र जारी करने और मामले की रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए कहा। साथ ही, विद्यालय में मिली कमियों को तत्काल दूर कराने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने मौके पर बीडीओ बरौली अहीर, एडीओ पंचायत और खंड शिक्षा अधिकारी को बुलाया। अधिकारियों को विद्यालय परिसर की व्यापक साफ-सफाई कराने, रसोईघर की व्यवस्था सुधारने और निरीक्षण में सामने आई सभी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। शिक्षक स्टाफ को नियमित समय पर विद्यालय पहुंचने, बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने, अभिभावकों से संपर्क कर नए नामांकन बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कहा गया।
उन्होंने कहा कि उच्च प्राथमिक विद्यालय रोहता में शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का लाभ बच्चों तक पहुंचना चाहिए। स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर, खेल सामग्री, प्रयोगशाला और अन्य उपकरणों का उपयोग पढ़ाई तथा बच्चों के समग्र विकास के लिए किया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि व्यवस्थाओं में सुधार के बाद वह रोहता विद्यालय का दोबारा निरीक्षण करेंगे।
निरीक्षण के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी नगर सुमित कुमार, डीसी बालिका कुलदीप कुमार और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
