आगरा। एक किसान ने खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन का नया अध्याय शुरू किया है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत जनपद के किसान सोमदत्त ने 0.7 मेगावाट क्षमता का ग्राउंड-माउंटेड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर उसे सफलतापूर्वक विद्युत ग्रिड से जोड़ दिया है। यह उपलब्धि न केवल स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों के लिए खेती के साथ स्थायी आय का नया स्रोत भी बनेगी। इससे यह संदेश भी मजबूत हुआ है कि अब किसान केवल अन्न उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
खेती अब केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रही। बदलते दौर में किसान आधुनिक तकनीक और अक्षय ऊर्जा को अपनाकर अपनी आय के नए स्रोत तैयार कर रहे हैं। इसी दिशा में आगरा के किसान सोमदत्त ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत 0.7 मेगावाट क्षमता का ग्राउंड-माउंटेड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर एक नई मिसाल पेश की है। इस संयंत्र से उत्पादित बिजली को सफलतापूर्वक विद्युत ग्रिड से जोड़ दिया गया है। यह उपलब्धि न केवल किसान की आर्थिक मजबूती का नया आधार बनेगी, बल्कि जिले में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यूपी नेडा, आगरा तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के सहयोग से प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के घटक-सी2 के अंतर्गत यह परियोजना स्थापित की गई है। इस योजना का उद्देश्य कृषि फीडरों का सौरकरण कर किसानों की भागीदारी से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाना है।
स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र की कुल क्षमता 0.7 मेगावाट है। संयंत्र से उत्पादित बिजली का सफलतापूर्वक 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र अयेला, खेरागढ़ तक निष्कासन (इवैक्यूएशन) कर विद्युत ग्रिड से जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही संयंत्र से उत्पादित बिजली अब नियमित रूप से विद्युत व्यवस्था का हिस्सा बन सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं किसानों के लिए अतिरिक्त और स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन सकती हैं। जहां खेती की आय मौसम, बाजार और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर रहती है, वहीं सौर ऊर्जा उत्पादन किसानों को लंबे समय तक नियमित आर्थिक लाभ देने की क्षमता रखता है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य किसानों को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के माध्यम से कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।
यूपी नेडा और डीवीवीएनएल के अधिकारियों ने इसे आगरा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि इस सफलता से अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे भी अपनी भूमि का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करने की दिशा में आगे आएंगे। यदि अधिक किसान इस योजना से जुड़ते हैं तो जिले में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का विस्तार भविष्य की जरूरत है। देश में बढ़ती बिजली मांग और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता को देखते हुए किसानों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे संयंत्र न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाएंगे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेंगे।
इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि आज का किसान केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है। आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर वह देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन का यह मॉडल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण विकास का नया आधार बनकर उभर रहा है।
पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत स्थापित यह सौर संयंत्र इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में यदि इस तरह की परियोजनाओं का विस्तार होता है तो अधिक से अधिक किसान खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन से भी जुड़ सकेंगे।
आगरा में स्थापित यह परियोजना केवल एक सौर संयंत्र नहीं, बल्कि बदलते ग्रामीण भारत की नई तस्वीर है। यह संदेश देती है कि आज का अन्नदाता केवल देश का पेट भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर राष्ट्र के विकास में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सौर ऊर्जा किसानों के लिए आय की तीसरी फसल बनकर उभर रही है, जो उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी अहम योगदान दे रही है।
