आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा विभाग ने के.एम. इंस्टीट्यूट में एक माह का निःशुल्क वैल्यू-एडेड कोर्स पूरा कराया। 1 से 30 जून तक चले प्रशिक्षण में रूसी, फ्रेंच और जर्मन भाषा की बुनियादी जानकारी, संवाद, व्याकरण, उच्चारण और संबंधित देशों की संस्कृति सिखाई गई। सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के के.एम. इंस्टीट्यूट स्थित विदेशी भाषा विभाग की ओर से आयोजित एक माह के निःशुल्क वैल्यू-एडेड कोर्स ‘बेसिक नॉलेज ऑफ रशियन, फ्रेंच एंड जर्मन लैंग्वेजेज’ का शुक्रवार को समापन हुआ। इस अवसर पर पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। समारोह में विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागी मौजूद रहे।
विदेशी भाषा विभाग ने यह विशेष पाठ्यक्रम 1 जून से 30 जून तक संचालित किया। कोर्स के लिए करीब 300 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें अलग-अलग आयु वर्ग के विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी तथा निजी और सरकारी क्षेत्रों से जुड़े पेशेवर शामिल रहे। विभाग ने पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया कि विदेशी भाषाओं का पूर्व ज्ञान न रखने वाले प्रतिभागी भी भाषा सीखने की शुरुआत कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रूसी, फ्रेंच और जर्मन भाषाओं की आधारभूत जानकारी दी गई। दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले सामान्य संवाद, शुरुआती व्याकरण, शब्दों के उच्चारण और वाक्य संरचना से परिचित कराया गया। भाषा सीखने के साथ संबंधित देशों की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक परिवेश पर भी जानकारी दी गई, ताकि प्रतिभागी केवल शब्दों तक सीमित न रहें, बल्कि भाषाई संदर्भ को भी समझ सकें।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप बहुभाषिक शिक्षा विद्यार्थियों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। विदेशी भाषाओं का ज्ञान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद स्थापित करने के साथ उच्च शिक्षा, शोध, रोजगार और वैश्विक अवसरों तक पहुंच बनाने में उपयोगी हो सकता है। बदलते शैक्षणिक और व्यावसायिक माहौल में अतिरिक्त भाषा कौशल विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने में सहायक होता है।
के.एम. इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि वैश्विक और प्रतिस्पर्धी परिवेश में विदेशी भाषाओं की जानकारी विद्यार्थियों की अकादमिक और व्यावसायिक क्षमता को नई दिशा देती है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसे व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराना भी है, जो उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकें। उन्होंने कहा कि कौशल-आधारित पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ करियर की जरूरतों के अनुरूप तैयार करते हैं।
वक्ताओं ने बताया कि विदेशी भाषाओं की जानकारी से उच्च शिक्षा और शोध के अवसरों के साथ पर्यटन, अनुवाद, शिक्षण, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आतिथ्य, कॉरपोरेट क्षेत्र और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में संभावनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा की बुनियादी समझ देकर आगे के अध्ययन और कौशल विकास के लिए तैयार करना है। विश्वविद्यालय ने भविष्य में भी रोजगारोन्मुखी और व्यावहारिक पाठ्यक्रमों के आयोजन की बात कही।
समारोह में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण से जुड़े अनुभव साझा किए। विमलेश द्विवेदी ने कहा कि पाठ्यक्रम से उन्हें रूसी, फ्रेंच और जर्मन भाषाओं की प्रारंभिक जानकारी मिली है। इससे विदेशी भाषाओं के अध्ययन के प्रति उनकी रुचि बढ़ी है और आगे सीखने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि निःशुल्क पाठ्यक्रम ने भाषा सीखने का अवसर सुलभ बनाया।
अनुराग रमन शर्मा ने शिक्षण पद्धति को व्यवस्थित, सरल और व्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में भाषा के साथ विभिन्न देशों की संस्कृति और परंपराओं की जानकारी भी उपयोगी रही। इससे शब्दों और संवादों के प्रयोग को समझने में मदद मिली। पूनम बघेल ने कहा कि संवादात्मक शिक्षण पद्धति से सीखने की प्रक्रिया रोचक और प्रभावी बनी। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कौशल-आधारित पाठ्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की अपेक्षा जताई।
समापन समारोह में सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। वक्ताओं ने उनकी नियमित उपस्थिति, अनुशासन और सीखने के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। प्रतिभागियों ने इस पहल को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और भविष्य के लिए उपयोगी बताया। विभाग के अनुसार प्रमाण-पत्र वितरण का उद्देश्य प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों के प्रयासों को मान्यता देना और उन्हें आगे भाषा अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन फ्रेंच भाषा के शिक्षक डॉ. आदित्य प्रकाश ने किया। इस अवसर पर डॉ. अंगद, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. विशाल शर्मा और प्रदीप वर्मा उपस्थित रहे। विदेशी भाषा विभाग की इस पहल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी विदेशी भाषा सीखने का अवसर उपलब्ध कराया।
