आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के 100वें स्थापना दिवस समारोह से एक दिन पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। समारोह की पूर्व संध्या पर कुलपति प्रो. आशु रानी ने स्वामी विवेकानंद (खंदारी) परिसर का व्यापक निरीक्षण कर कार्यक्रम स्थल से लेकर सुरक्षा, स्वच्छता, अतिथि सत्कार और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का शताब्दी समारोह उसकी गौरवशाली विरासत के अनुरूप भव्य, सुव्यवस्थित और यादगार होना चाहिए।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय 1 जुलाई को अपना 100वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं, जिन्हें अंतिम रूप देने के लिए कुलपति प्रो. आशु रानी स्वयं निरीक्षण के लिए पहुंचीं। उन्होंने समारोह स्थल जयप्रकाश नारायण सभागार (जेपी ऑडिटोरियम) सहित पूरे परिसर का भ्रमण कर प्रत्येक व्यवस्था का बारीकी से अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान कुलपति ने कार्यक्रम स्थल की साज-सज्जा, मंच व्यवस्था, अतिथियों के बैठने की व्यवस्था, प्रवेश और निकास मार्ग, सुरक्षा इंतजाम, स्वच्छता, विद्युत व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तैयारियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और जहां आवश्यक लगा, वहां तत्काल सुधार के निर्देश भी दिए।
उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियों की भी समीक्षा की और आयोजकों से कहा कि सभी प्रस्तुतियां विश्वविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को प्रतिबिंबित करें। कार्यक्रम का प्रत्येक चरण समयबद्ध, व्यवस्थित और गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हो, इसके लिए संबंधित समितियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि विश्वविद्यालय का शताब्दी स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए ऐतिहासिक और भावनात्मक अवसर है। 100 वर्षों की यात्रा ज्ञान, अनुसंधान, संस्कार और सामाजिक दायित्व के प्रति निरंतर समर्पण की कहानी है। इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है और शताब्दी वर्ष इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ-साथ भविष्य की नई संभावनाओं और संकल्पों का भी प्रतीक है। आने वाले समय में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की दिशा में विश्वविद्यालय और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा। शताब्दी वर्ष के दौरान प्रस्तावित कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा मंच प्रदान करेंगे।
निरीक्षण के दौरान कुलपति ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समारोह में आने वाले सभी विशिष्ट अतिथियों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों, शिक्षकों और आमंत्रित आगंतुकों के स्वागत-सत्कार में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। अतिथि विश्वविद्यालय की पहली छवि व्यवस्थाओं से ही बनाते हैं, इसलिए प्रत्येक व्यवस्था को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्वच्छ एवं सुंदर परिसर पर विशेष जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का वातावरण उसकी गरिमा और शताब्दी वर्ष की ऐतिहासिक महत्ता के अनुरूप दिखाई देना चाहिए। परिसर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह महसूस हो कि वह एक ऐसे संस्थान में आया है जिसने एक शताब्दी तक देश की उच्च शिक्षा को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
कुलपति ने आयोजन से जुड़ी विभिन्न समितियों के सदस्यों, अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से संवाद भी किया। उन्होंने सभी से टीम भावना के साथ कार्य करने और अपने-अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करती है और विश्वविद्यालय परिवार की एकजुटता ही इस समारोह को ऐतिहासिक बनाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि शताब्दी स्थापना दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे वर्ष चलने वाले शताब्दी महोत्सव की शुरुआत है। इस दौरान शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति, नवाचार, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से विश्वविद्यालय समाज से अपने संबंधों को और मजबूत करेगा।
प्रशासन ने विश्वास जताया कि सभी तैयारियां निर्धारित समय पर पूर्ण कर ली जाएंगी और 1 जुलाई 2026 का शताब्दी स्थापना दिवस समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा। विश्वविद्यालय परिवार ने इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं और उम्मीद जताई है कि यह समारोह विश्वविद्यालय की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को नई ऊर्जा और नई दिशा देने वाला साबित होगा।
