आगरा। एक सदी पहले शुरू हुई ज्ञान की यात्रा अब नए युग में प्रवेश करने जा रही है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा 1 जुलाई को अपना 100वां स्थापना दिवस भव्य समारोह के साथ मनाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वविद्यालय अपनी शताब्दी यात्रा की उपलब्धियों को देश के सामने प्रस्तुत करेगा और शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, संस्कृति तथा सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का औपचारिक शुभारंभ करेगा। समारोह के साथ तीन दिवसीय शताब्दी प्रदर्शनी भी शुरू होगी, जबकि पूरे वर्ष लगभग 100 शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा का शताब्दी स्थापना दिवस समारोह 1 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे स्वामी विवेकानंद परिसर, खंदारी स्थित जयप्रकाश नारायण सभागार (जेपी ऑडिटोरियम) में आयोजित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की 100 वर्षों की गौरवगाथा को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, विशेष प्रदर्शनों और सम्मान समारोह के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा तथा शताब्दी वर्ष की आगामी गतिविधियों की औपचारिक घोषणा भी की जाएगी।

वर्ष 1927 में स्थापित विश्वविद्यालय ने पिछले 100 वर्षों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित इस संस्थान ने समय-समय पर कई नए विश्वविद्यालयों के गठन की आधारशिला रखी। यहां से शिक्षित हजारों विद्यार्थी आज देश-विदेश में शिक्षाविद, वैज्ञानिक, न्यायविद, चिकित्सक, प्रशासक, साहित्यकार, उद्यमी और समाजसेवी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

कुलपति प्रो. आशु रानी ने शताब्दी स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की 100 वर्षों की यात्रा केवल इतिहास नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, समर्पण और उत्कृष्टता की निरंतर साधना का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने लाखों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि शताब्दी वर्ष को केवल उत्सव तक सीमित न रखकर शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाएगा।

कुलसचिव अजय मिश्रा ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय परिवार के प्रत्येक शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी, शोधार्थी और पूर्व छात्र के सामूहिक योगदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष के सभी कार्यक्रम शिक्षा और समाज के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेंगे तथा नई पीढ़ी को उत्कृष्टता और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए प्रेरित करेंगे।

शताब्दी समारोह समिति के संयोजक प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा ने बताया कि 1 जुलाई का समारोह शताब्दी वर्ष का औपचारिक शुभारंभ होगा। इसके बाद वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग 100 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण को नई दिशा देना है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने संबंधित मंत्रालय के सहयोग से शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विशेष स्मारक सिक्के और स्मारक डाक पोस्टकार्ड का डिजाइन तैयार कराया है। इसका अनावरण पहले ही लखनऊ स्थित जनभवन में कुलाधिपति की उपस्थिति में किया जा चुका है। इनका सार्वजनिक विमोचन शताब्दी वर्ष के मुख्य समारोह में विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में किया जाएगा।
प्रो. शर्मा ने बताया कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं कुलाधिपति सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपलब्धता और संबंधित कार्यालयों से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तिथि निर्धारित होने के बाद विस्तृत कार्यक्रम सार्वजनिक किए जाएंगे।
इसी दौरान विश्वविद्यालय की 100 वर्षों की यात्रा पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रथम प्रदर्शन और औपचारिक लोकार्पण भी प्रस्तावित है। इसमें विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की ऐतिहासिक उपलब्धियों, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार, सामाजिक योगदान और भविष्य की विकास योजनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा।
शताब्दी वर्ष के शुभारंभ के साथ स्वामी विवेकानंद परिसर स्थित दीक्षांत पार्क में तीन दिवसीय ‘सेंटेनरी एग्जीबिशन’ भी शुरू होगी। यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों, शोधार्थियों और आम नागरिकों के लिए निशुल्क खुली रहेगी। इसमें विश्वविद्यालय की 100 वर्षों की यात्रा से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज, दुर्लभ छायाचित्र, दीक्षांत समारोहों की झलकियां, शोध उपलब्धियां, नवाचार और विभिन्न संकायों की प्रमुख उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रदर्शनी में सामाजिक कार्य विभाग की गतिविधियां, केएमआई विभाग का संग्रहालय, इतिहास विभाग की ऐतिहासिक धरोहरें, इनक्यूबेशन सेंटर के नवाचार, सामुदायिक रेडियो की उपलब्धियां, खेल विभाग की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सफलताएं, हस्तकला, पेंटिंग, संगीत, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रदर्शन तथा विभिन्न विभागों की शोध परियोजनियों पर आधारित विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सामाजिक उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाना तथा नई पीढ़ी को इसकी समृद्ध विरासत से परिचित कराना है।
शताब्दी वर्ष के दौरान टीबी पोषण पोटली वितरण, एचपीवी टीकाकरण अभियान, व्यापक पौधारोपण, साइकिल यात्रा, योग महोत्सव, सांस्कृतिक महोत्सव, ट्रेडिशनल गेम्स फेस्टिवल, यूथ पार्लियामेंट, गोद ग्राम कार्यक्रम, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां, स्वास्थ्य शिविर, महिला सशक्तिकरण अभियान, पूर्व छात्र सम्मेलन, नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियां, खेल प्रतियोगिताएं और विभिन्न समाजोपयोगी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता, भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव और राष्ट्र निर्माण की भावना को और मजबूत करना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, पूर्व छात्रों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और नागरिकों से शताब्दी स्थापना दिवस समारोह में सहभागिता की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यह अवसर केवल विश्वविद्यालय के 100 वर्षों का उत्सव नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए ज्ञान, नवाचार, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के नए संकल्प का भी प्रतीक होगा।
