ब्लैक स्पॉट चिन्हित, सड़क सुरक्षा समिति सक्रिय, अभियान जारी… लेकिन आगरा में मौतें 17.4% बढ़ीं।
यूपी फिर देश में नंबर-1, हर दिन 66 से ज्यादा लोगों की सड़क हादसों में मौत।
आगरा। सड़क सुरक्षा पर बैठकें समय से हो रही हैं। ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं। हेलमेट अभियान चल रहे हैं। ई-चालान भी कट रहे हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठकों में अधिकारियों की मौजूदगी भी दर्ज हो रही है। कागजों में सब कुछ व्यवस्थित दिखाई देता है। बस, अगर कुछ नहीं रुक रहा तो वह है सड़कों पर बिखरता खून और उजड़ते परिवार।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ‘रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट ने आगरा की ऐसी तस्वीर पेश की है, जो किसी भी जिम्मेदार तंत्र के लिए चेतावनी से कम नहीं है। ताजमहल के शहर आगरा ने सड़क दुर्घटना में मौतों के मामले में देश के 50 बड़े शहरों में 11वें स्थान से छलांग लगाकर सीधे छठा स्थान हासिल कर लिया है। यानी शहर विकास की रफ्तार से ज्यादा तेजी से मौतों की रैंकिंग में ऊपर पहुंच गया।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में आगरा में 1,223 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 586 लोगों की मौत हो गई, जबकि 984 लोग घायल हुए। वर्ष 2023 में मौतों का आंकड़ा 499 था। यानी एक साल में मौतों में 17.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यह तब है, जब शहर में लगातार सड़क सुरक्षा अभियानों, ब्लैक स्पॉट सुधार, ट्रैफिक प्रवर्तन और जागरूकता कार्यक्रमों के दावे किए जाते रहे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आगरा में दुर्घटनाओं की संख्या देश के कई बड़े शहरों से कम है, तब मौतों की संख्या इतनी अधिक क्यों है? क्या ब्लैक स्पॉट केवल रिपोर्टों तक सीमित हैं? क्या सड़कों की इंजीनियरिंग में सुधार अभी भी अधूरा है? क्या दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है? या फिर हर हादसे के बाद जिम्मेदारी भी अगले हादसे तक टाल दी जाती है?
आगरा की स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि देश के जिन शहरों में उससे कहीं अधिक दुर्घटनाएं हुईं, वहां मौतें अपेक्षाकृत कम रहीं। इसका सीधा अर्थ यही निकलता है कि आगरा की सड़कें केवल दुर्घटनाग्रस्त नहीं, बल्कि ज्यादा जानलेवा होती जा रही हैं।

अगर उत्तर प्रदेश की तस्वीर देखें तो चिंता और गहरी हो जाती है। प्रदेश लगातार पांचवें वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के मामले में देश में पहले स्थान पर बना हुआ है। वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में 46,052 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 24,118 लोगों की मौत हो गई। यानी औसतन हर दिन 66 लोगों की जान सड़क पर चली गई। प्रदेश में जिला सड़क सुरक्षा समितियां हैं, सड़क सुरक्षा कोष है, ब्लैक स्पॉट सुधार कार्यक्रम हैं, हेलमेट और सीट बेल्ट अभियान हैं, ई-चालान व्यवस्था है और समय-समय पर विशेष अभियान भी चलाए जाते हैं। लेकिन आंकड़े पूछ रहे हैं कि यदि व्यवस्था इतनी मजबूत है तो मौतों का सिलसिला आखिर क्यों नहीं रुक रहा?
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि देश के दस सबसे अधिक मौत वाले बड़े शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर शामिल हैं। आगरा छठे, लखनऊ सातवें, कानपुर आठवें और प्रयागराज नौवें स्थान पर हैं। यह केवल एक सूची नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड है, जो हर बैठक में सड़क सुरक्षा की समीक्षा तो करती है, लेकिन हर साल मौतों का आंकड़ा और बड़ा हो जाता है।
देश की तस्वीर भी कम भयावह नहीं है। वर्ष 2024 में पूरे भारत में 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 1,77,175 लोगों की मौत हुई, जबकि 4,71,441 लोग घायल हुए। यानी हर दिन औसतन 485 लोगों की जान सड़क पर चली गई। दूसरे शब्दों में कहें तो हर घंटे लगभग 20 भारतीय सड़क हादसों में दम तोड़ रहे हैं।
देश के बड़े शहरों की सूची भी कई सवाल छोड़ती है। सड़क दुर्घटना में मौतों के मामले में दिल्ली पहले स्थान पर है, जहां 1,551 लोगों की जान गई। इसके बाद बेंगलुरु (894), जयपुर (860), रायपुर (594), जबलपुर (589) और फिर आगरा (586) का स्थान है। आगरा के बाद लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और चेन्नई हैं। यानी उत्तर प्रदेश के चार शहर देश के सबसे जानलेवा शहरों की सूची में शामिल हैं।
सरकार ने सड़क सुरक्षा के लिए 4E मॉडल (Engineering, Enforcement, Education और Emergency Care) लागू करने की बात कही। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन हुआ। ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए। हाईवे पर एम्बुलेंस नेटवर्क बढ़ाया गया। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए गए। हर साल सड़क सुरक्षा माह मनाया जाता है। लेकिन इन सभी प्रयासों के बावजूद आंकड़े यह कह रहे हैं कि सड़कें पहले से अधिक सुरक्षित होने के बजाय अधिक घातक साबित हो रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मौतें ओवरस्पीडिंग के कारण होती हैं। लेकिन केवल चालक को दोष देकर व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती। यदि सड़क पर संकेतक नहीं हैं, अनियोजित कट बने हुए हैं, स्ट्रीट लाइट नहीं है, ब्लैक स्पॉट वर्षों से वैसे ही पड़े हैं और हादसे के बाद समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलती, तो यह केवल चालक की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सामूहिक विफलता भी है।
आगरा के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी है। शहर को स्मार्ट बनाने की योजनाएं तभी सार्थक होंगी, जब सड़कें भी सुरक्षित होंगी। वरना सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें, समीक्षा रिपोर्टें और जागरूकता अभियान अपनी जगह चलते रहेंगे और दूसरी ओर हर दिन किसी घर का बेटा, पिता, बहन या मां सड़क पर दम तोड़ते रहेंगे। आखिर सड़क सुरक्षा का असली पैमाना बैठकों की संख्या नहीं, बल्कि सड़क पर बची हुई जिंदगियां होती हैं। फिलहाल, आंकड़े बता रहे हैं कि व्यवस्था के दावे तेज हैं, लेकिन मौतों की रफ्तार उनसे भी तेज है।
आगरा के सड़क हादसों पर एक नजर
| वर्ष | सड़क दुर्घटनाएं | मौतें | घायल | राष्ट्रीय रैंक* |
|---|---|---|---|---|
| 2023 | 1,007 | 499 | 657 | 11 |
| 2024 | 1,223 | 586 | 984 | 6 |
| बढ़ोतरी | +21% | +17.4% | +49% | ↑ 5 स्थान |
मिलियन-प्लस शहरों में सड़क दुर्घटना मौतों के आधार पर रैंक।
उत्तर प्रदेश के सड़क हादसों पर एक नजर
| वर्ष | सड़क दुर्घटनाएं | मौतें | घायल | मृत्यु में राष्ट्रीय रैंक |
|---|---|---|---|---|
| 2022 | 41,746 | 22,595 | — | 1 |
| 2023 | 44,534 | 23,652 | — | 1 |
| 2024 | 46,052 | 24,118 | 34,665 | 1 |
देश के टॉप-10 सबसे खतरनाक बड़े शहर (2024)
| रैंक | शहर | मौतें | दुर्घटनाएं | 2023 की तुलना |
|---|---|---|---|---|
| 1 | दिल्ली | 1,551 | 5,657 | +6.5% |
| 2 | बेंगलुरु | 894 | 4,769 | -2.3% |
| 3 | जयपुर | 860 | 3,115 | +1.3% |
| 4 | रायपुर | 594 | 2,079 | +17.2% |
| 5 | जबलपुर | 589 | 3,928 | +8.1% |
| 6 | आगरा | 586 | 1,223 | +17.4% |
| 7 | लखनऊ | 576 | 1,630 | +1.4% |
| 8 | कानपुर | 560 | 1,448 | -12.2% |
| 9 | प्रयागराज | 547 | 1,246 | -6.0% |
| 10 | चेन्नई | 542 | 3,762 | +7.8% |
पूरे देश की तस्वीर
| वर्ष | सड़क दुर्घटनाएं | मौतें | घायल | गंभीर घायल |
|---|---|---|---|---|
| 2022 | 4,61,312 | 1,68,491 | 4,43,366 | 1,43,374 |
| 2023 | 4,80,583 | 1,72,890 | 4,62,825 | 1,58,576 |
| 2024 | 4,87,707 | 1,77,175 | 4,71,441 | 1,61,225 |
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों की स्थिति
| शहर | दुर्घटनाएं (2024) | मौतें (2024) | 2024 रैंक |
|---|---|---|---|
| आगरा | 1,223 | 586 | 6 |
| लखनऊ | 1,630 | 576 | 7 |
| कानपुर | 1,448 | 560 | 8 |
| प्रयागराज | 1,246 | 547 | 9 |
| मेरठ | 911 | 390 | 13 |
| गाजियाबाद | 996 | 381 | 14 |
| वाराणसी | 538 | 304 | 24 |
