आगरा। ऐतिहासिक मीना बाजार क्षेत्र स्थित उस कोठी को लेकर नई हलचल तेज हो गई है, जिसे कुछ इतिहासकार छत्रपति शिवाजी महाराज की नजरबंदी और उनके साहसिक पलायन से जोड़ते हैं। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर इस स्थल पर भव्य स्मारक निर्माण का प्रस्ताव रखा। योगी सरकार द्वारा अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और दोनों राज्यों के संयुक्त सहयोग से इसे शौर्य, स्वाभिमान और भारतीय इतिहास के प्रतीक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

आगरा की पहचान अब केवल ताजमहल और मुगलकालीन धरोहरों तक सीमित नहीं रहेगी। छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, कूटनीति और अदम्य साहस को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। आगरा के मीना बाजार क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक कोठी पर शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक बनाने की योजना को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारें मिलकर काम करेंगी।
इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री और आगरा दक्षिण से भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके आवास पर मुलाकात की। बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि दोनों राज्य सरकारें मिलकर ऐसा स्मारक विकसित करें, जो देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों को भारतीय वीरता और स्वाभिमान के इतिहास से परिचित कराए। योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि यह केवल एक स्मारक नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारत के गौरवशाली अतीत से जोड़ने वाला राष्ट्रीय प्रेरणा केंद्र बनेगा।
मुलाकात के दौरान योगेंद्र उपाध्याय ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहासकार प्रो. सुगम आनंद और दिवंगत इतिहासकार डॉ. अमि आधार निडर के संयुक्त अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि वर्तमान की मीना बाजार की कोठी ही वह स्थान है, जहां जयपुर के महाराजा मिर्जा राजा जयसिंह के पुत्र राम सिंह की कोठी में औरंगजेब ने छत्रपति शिवाजी महाराज को नजरबंद रखा था। इसी स्थान से शिवाजी महाराज ने अपनी बुद्धिमत्ता, रणनीति और अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए मुगल पहरे को धता बताकर सुरक्षित निकलने में सफलता प्राप्त की थी।
योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस स्मारक के लिए वे पिछले छह से सात वर्षों से लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर लंबी प्रक्रिया के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संबंधित भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अधिग्रहण पूरा होते ही स्मारक निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने की तैयारी है।
बैठक में उन्होंने यह भी प्रस्तावित किया कि स्मारक का स्वरूप ऐसा हो, जो भारतीय संस्कृति, मराठा परंपरा और राष्ट्रीय गौरव का समन्वित प्रतीक बने। उन्होंने कहा कि आगरा आने वाले पर्यटक ताजमहल के साथ-साथ शिवाजी महाराज के इस शौर्य स्थल को भी श्रद्धा से देखें, यही इस परियोजना का उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पहल की सराहना करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास के वीर पुरुषों और उनके संघर्ष स्थलों को संरक्षित करना दोनों राज्यों की साझा जिम्मेदारी है और महाराष्ट्र सरकार इस कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाएगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भाजपा नेता सुनील कुमार सिंह भी मौजूद रहे। इससे पहले योगेंद्र उपाध्याय ने महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार से भी विस्तृत चर्चा की थी, जहां से उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। अब संभावना जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के संस्कृति विभागों की संयुक्त टीम जल्द ही आगरा पहुंचकर स्मारक की रूपरेखा, डिजाइन और विकास योजना पर काम शुरू करेगी।
यदि यह परियोजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो आगरा को एक नया सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आयाम मिल सकता है, जहां ताजमहल के साथ-साथ छत्रपति शिवाजी महाराज का शौर्य भी देश-दुनिया के सामने प्रमुखता से स्थापित होगा।

