आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस में आयोजित डिजाइनर वस्त्र एवं नवाचार उत्पाद प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, तकनीकी दक्षता और फैशन डिज़ाइनिंग के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा को नई पहचान दी। वस्त्र एवं परिधान विभाग द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने अपने हाथों से तैयार किए गए आकर्षक परिधान और अपसाइक्लिंग उत्पाद प्रस्तुत किए। प्रदर्शनी में आधुनिक फैशन, पारंपरिक सौंदर्य और नवाचार का सुंदर समन्वय देखने को मिला। विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों और आगंतुकों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे कौशल आधारित शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस में बुधवार को रचनात्मकता, नवाचार और फैशन डिजाइनिंग का अनूठा संगम देखने को मिला। वस्त्र एवं परिधान विभाग द्वारा डिप्लोमा इन अपैरल डिजाइनिंग के छात्र-छात्राओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से डिजाइनर वस्त्रों एवं नवाचार उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए परिधानों और विभिन्न उपयोगी उत्पादों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान की निदेशक प्रो. अचला गखर और डीन प्रो. अर्चना सिंह ने किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को अपने कौशल और रचनात्मकता को व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित करने के अवसर भी मिलने चाहिए। इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करती हैं।

प्रदर्शनी का संयोजन और संचालन विभाग की वरिष्ठ शिक्षिका डॉ. संघमित्रा गौतम के मार्गदर्शन में किया गया। उनके निर्देशन में विद्यार्थियों ने परिधान निर्माण, डिजाइनिंग और अपसाइक्लिंग की अवधारणाओं को साकार करते हुए कई आकर्षक एवं उपयोगी उत्पाद तैयार किए। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की मेहनत, कल्पनाशीलता और तकनीकी समझ स्पष्ट रूप से दिखाई दी। डॉ. गौतम ने विद्यार्थियों को केवल डिजाइन तैयार करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें बाजार की मांग, उपभोक्ताओं की पसंद और फैशन उद्योग की बदलती प्रवृत्तियों को समझने के लिए भी प्रेरित किया।

प्रदर्शनी में विद्यार्थियों अंशुल सिंघारिया, चारु वार्ष्णेय, शिखा पचौरी, सुरिति और उदिता कुमारी सहित अन्य छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किए गए अनेक परिधान और नवाचार उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इनमें महिलाओं के लिए डिजाइनर ड्रेस, बच्चों के आकर्षक परिधान, कस्टमाइज्ड ड्रेस, कुर्तियां, जेंट्स शर्ट, सलवार-कमीज, पेटीकोट तथा विभिन्न प्रकार के उपयोगी वस्त्र शामिल थे। इसके अलावा पुराने और अनुपयोगी कपड़ों को नए रूप में तैयार कर बनाए गए अपसाइक्लिंग उत्पादों ने भी दर्शकों को प्रभावित किया।
प्रदर्शनी की विशेषता यह रही कि विद्यार्थियों ने पारंपरिक भारतीय परिधानों में आधुनिक फैशन के तत्वों को शामिल करते हुए ऐसे डिजाइन तैयार किए जो व्यावहारिक होने के साथ-साथ सौंदर्य की दृष्टि से भी आकर्षक थे। विभिन्न परिधानों में रंगों का संतुलित प्रयोग, कपड़ों का चयन, डिजाइन की मौलिकता और सिलाई की गुणवत्ता दर्शकों को प्रभावित करती रही। कई उत्पाद ऐसे थे जिन्हें व्यावसायिक स्तर पर भी प्रस्तुत किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षकों और विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि फैशन और परिधान उद्योग में रचनात्मक सोच के साथ तकनीकी दक्षता भी अत्यंत आवश्यक है। प्रदर्शनी में प्रदर्शित उत्पादों से यह स्पष्ट हुआ कि विद्यार्थी न केवल डिजाइनिंग की बारीकियों को समझ रहे हैं, बल्कि वे व्यावसायिक संभावनाओं को भी ध्यान में रखकर कार्य कर रहे हैं। यह अनुभव उनके भविष्य के करियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डॉ. संघमित्रा गौतम ने कहा कि सीमित संसाधनों में भी विद्यार्थियों ने जिस समर्पण और लगन के साथ कार्य किया है, वह सराहनीय है। उन्होंने बताया कि ऐसी प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देती हैं और उन्हें उद्योग जगत की वास्तविक आवश्यकताओं से भी परिचित कराती हैं। इससे विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है और वे स्वरोजगार तथा उद्यमिता की दिशा में भी प्रेरित होते हैं।
उन्होंने कहा कि आज के समय में फैशन और डिजाइनिंग का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए केवल तकनीकी शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें रचनात्मक सोच, नवाचार और प्रस्तुतीकरण की कला भी सीखनी होती है। इसी उद्देश्य से विभाग समय-समय पर इस प्रकार की गतिविधियों का आयोजन करता है ताकि विद्यार्थी अपने कौशल को और बेहतर बना सकें।
प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, शोधार्थी और आगंतुक पहुंचे। सभी ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए परिधानों और नवाचार उत्पादों की प्रशंसा की। आगंतुकों का कहना था कि विद्यार्थियों ने जिस प्रकार रचनात्मकता और उपयोगिता को एक साथ प्रस्तुत किया है, वह उनकी मेहनत और प्रतिभा का प्रमाण है।
कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि यदि युवाओं को उचित मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे अपने कौशल के बल पर नए आयाम स्थापित कर सकते हैं। यह प्रदर्शनी केवल वस्त्रों और डिजाइन का प्रदर्शन भर नहीं थी, बल्कि विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं का उत्सव भी बनी। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह पहल कौशल आधारित शिक्षा, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास साबित हुई।
