आगरा। एमजी रोड स्थित आगरा कॉलेज के सामने सड़क के बीच बनी करीब 250 वर्ष पुरानी मजार को मंगलवार को प्रशासन ने शांतिपूर्ण ढंग से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया। सड़क हादसों, लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम और जनहित से जुड़ी शिकायतों के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की। करीब आधे घंटे तक चले अभियान के दौरान मजार को सावधानीपूर्वक हटाकर लगभग 60 से 70 फीट दूर स्थित दरगाह परिसर में स्थापित किया गया। पूरी कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और मौके पर चार थानों की पुलिस फोर्स तैनात रही।

कार्रवाई के दौरान एमजी रोड के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर यातायात को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके बाद बुलडोजर और अन्य मशीनों की सहायता से मजार के पत्थर और संरचना को सुरक्षित तरीके से निकाला गया और धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखते हुए उसे नए स्थान पर स्थापित किया गया। पूरी प्रक्रिया प्रशासन की निगरानी में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।
यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था। आगरा कॉलेज के सामने सड़क के बीच स्थित इस मजार के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने, बार-बार जाम लगने और सड़क दुर्घटनाओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना था कि सड़क के बीच स्थित होने के कारण यह स्थान दुर्घटनाओं का कारण बन रहा था। इसी को आधार बनाकर मामले को न्यायालय तक पहुंचाया गया।
मामले की शुरुआत 19 जनवरी 2026 को हुई, जब योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष एवं हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर ने अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में जनहित याचिका दायर की। याचिका में सड़क के बीच स्थित दो मजारों को हटाने की मांग करते हुए कहा गया कि इनके कारण यातायात बाधित होता है, आए दिन जाम लगता है और कई सड़क हादसे हो चुके हैं। याचिकाकर्ता ने सड़क को अतिक्रमण मुक्त कर आम लोगों के लिए सुरक्षित बनाने की मांग की थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने आगरा के जिलाधिकारी, नगर निगम के नगर आयुक्त तथा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता को समन जारी कर जवाब तलब किया। इसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की।
जांच समिति ने मौके का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट में पाया कि सड़क पर स्थित एक मजार के कारण यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है तथा इससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। हालांकि समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि उसी स्थान के पास स्थित दूसरी मजार से यातायात या आम लोगों को कोई विशेष परेशानी नहीं हो रही थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने केवल उसी मजार को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था।
रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन ने मजार के मुतवल्ली, मजार समिति के प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। विस्तृत चर्चा और आपसी सहमति के बाद मजार को पास स्थित दरगाह परिसर में स्थानांतरित करने पर सहमति बनी। इसके बाद प्रशासन ने तय योजना के अनुसार मंगलवार को कार्रवाई को अंजाम दिया।
इतिहासकार राजकिशोर राजे के अनुसार यह मजार मुगल काल की मानी जाती है और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसका संबंध मुगल सम्राट औरंगजेब के धार्मिक गुरु से बताया जाता है। इतिहासकारों के अनुसार यह मजार लगभग 250 वर्ष पुरानी है और लंबे समय से उसी स्थान पर मौजूद थी।
प्रशासन की इस कार्रवाई पर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। बसपा पार्षद ने मजार को हटाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि धार्मिक स्थल को इस प्रकार दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह मजार कई वर्षों से वहां स्थित थी और इस विषय पर अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता था।
वहीं स्थानीय लोगों ने प्रशासन के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सड़क के बीच स्थित मजार के कारण आए दिन सड़क हादसे होते थे और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। उनके अनुसार प्रशासन का यह निर्णय जनहित में है और इससे ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।
इस पूरे मामले पर एडीसीपी क्राइम हिमांशु गौरव ने बताया कि आगरा कॉलेज के सामने स्थित मजार के कारण अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी। सड़क दुर्घटनाओं के अलावा एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती थी। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से पहले मजार के मुतवल्ली, स्थानीय पार्षद, पीडब्ल्यूडी विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ कई बैठकें की गईं। सभी पक्षों की सहमति मिलने के बाद ही मजार को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और कहीं से किसी प्रकार के विरोध या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
प्रशासन का मानना है कि मजार के स्थानांतरण के बाद एमजी रोड पर यातायात अधिक सुचारु होगा, जाम की समस्या कम होगी और सड़क दुर्घटनाओं पर भी प्रभावी अंकुश लग सकेगा। वहीं यह कार्रवाई जनहित, न्यायालय में चल रही प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की सहमति के आधार पर की गई, जिससे पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी रही।
