आगरा। एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से बनी जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में नालों की सफाई, नए नालों के निर्माण, तालाबों की तलीझाड़ सफाई तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अधिकारियों को मानसून से पहले सभी आवश्यक कार्य पूरे कराने के निर्देश दिए गए।
एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए मंगलवार को जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह के साथ नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बरसात के दौरान उत्पन्न होने वाली जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना रहा।
बैठक में नगरायुक्त संतोष कुमार वैश्य, अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार, उप जिलाधिकारी एत्मादपुर सुमित सिंह, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जी.के. वार्ष्णेय तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने सभी विभागों से क्षेत्र में जलनिकासी की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
समीक्षा के दौरान खंदौली क्षेत्र में जलभराव की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि खंदौली आबादी क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई संयुक्त रूप से नालों की तलीझाड़ सफाई कराएं ताकि पानी का प्रवाह सुचारु बना रहे। इसके अलावा खंदौली स्थित मुख्य मार्ग को मध्य भाग से कनवर्ट बनाकर नाले को हाथरस रोड से जोड़ने की योजना पर भी सहमति बनी। साथ ही एनएचएआई के नाले को गाटा संख्या 328 स्थित तालाब से जोड़ने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
आगरा-अलीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-509) पर खंदौली आबादी क्षेत्र में सड़क पर होने वाले जलभराव की समस्या के समाधान के लिए विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने एनएचएआई अधिकारियों से कहा कि नाले में बने वीप होल्स में रिंग डलवाने तथा उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, जिससे बरसात के दौरान पानी का निकास बाधित न हो।
बैठक में लोक निर्माण विभाग को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पैतीखेड़ा मार्ग से होकर शंकरा तालाब तक नाला निर्माण का कार्य मानसून से पहले हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने अधिशासी अभियंता को निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की देरी न होने देने के निर्देश दिए, ताकि वर्षा ऋतु के दौरान जलभराव की समस्या से लोगों को राहत मिल सके।
क्षेत्र में स्थित विभिन्न तालाबों की सफाई को लेकर भी बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि गाटा संख्या 427/3 में स्थित शंकरा तालाब तथा गाटा संख्या 396, 328 और 312 में बने तालाबों की तलीझाड़ सफाई पोकलेन मशीनों के माध्यम से कराई जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि तालाबों की क्षमता बढ़ाकर वर्षा जल संचयन और जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
बैठक में टेढ़ी बगिया से नगर निगम सीमा तक प्रस्तावित नाले के निर्माण पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 1900 मीटर लंबे नाले का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा। इस संबंध में बैठक में सहमति बनी कि नाले का आधा निर्माण नगर निगम और शेष आधा निर्माण एनएचएआई द्वारा कराया जाएगा। जिलाधिकारी ने दोनों विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य तेजी से शुरू करने के निर्देश दिए।
आगरा-जलेसर-एटा राष्ट्रीय मार्ग की खराब स्थिति को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मार्ग की पैच मरम्मत के लिए निर्माण खंड राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग को लगभग 19 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हो चुकी है और तकनीकी बोली 14 मई को खोली जा चुकी है। इस पर जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सड़क मरम्मत कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए।
बैठक में शाहदरा मार्ग के सर्विस रोड पर स्थित पेट्रोल पंप के निकट अधूरे पड़े नाले के निर्माण का मामला भी सामने आया। बताया गया कि लगभग 100 मीटर लंबा नाला एनएचएआई द्वारा अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे जलनिकासी प्रभावित हो रही है। जिलाधिकारी ने इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश दिए और कहा कि अधूरे कार्यों के कारण जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि मानसून से पहले जलभराव से जुड़े सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय समन्वय के माध्यम से ही क्षेत्र की जलनिकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकता है और नागरिकों को जलभराव की समस्या से राहत दिलाई जा सकती है।
